राजीव लोचन साह उत्तराखण्ड राज्य के गठन की संक्रान्ति के ऐतिहासिक अवसर पर जिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिये थी, दुर्भाग्य से वे नदारद हैं। राजधानी, हाईकोर्ट, मुख्यमंत्री जैसे मसलों... Read more
राजेन्द्र धस्माना नये उत्तराखण्ड को माफिया, राजनेता और नौकरशाह की टिकडी से बचाने के लिये जरूरी है कि यहाँ ई-गवर्नेन्स का सूझबूझ के साथ उपयोग किया जाये। राजधानी का मुद्दा टालने के लिये जो फाल... Read more
अरुण कुकसाल उत्तराखण्ड के समग्र विकास की रूपरेखा पर चिन्तन-मनन करने के संदर्भ में हिमांचल प्रदेश की औद्योगिक नीति के प्रमुख बिन्दुओं का उल्लेख करना प्रासंगिक है। हिमांचल प्रदेश में औद्योगिक... Read more
पवन गुप्ता/भुवन पाठक उत्तराखण्ड राज्य की माँग के पीछे दो मुख्य कारण थे, (1), यहाँ के निवासियों की अस्मिता का सवाल और, (2). व्यवस्था से असंतोष। अस्मिता का सवाल सीधे आत्मसम्मान और आत्मविश्वास... Read more
रमदा उत्तराखण्ड के एक पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आ जाने के साथ ही इस सच्चाई को स्वीकारना आवश्यक है कि आजादी के तत्काल बाद से देश-प्रदेश के स्तर पर सामाजिक, राजनैतिक-आर्थिक मामलों, प्... Read more
पुरुषोत्तम असनोड़ा उत्तरांचल राज्य का गठन क्या जनाकांक्षाओं की पूर्ति है ? सपनों में भी उत्तराखण्ड पुकार रहे बच्चों, घसियारों के लोकगीतों में पैंठ चुके भावों और तथा आम उत्तराखण्डी की आशा-अभिल... Read more
रमदा सवाल है कि इस समय 1994 के जन सैलाब के असल हिस्सेदार कहाँ हैं ? अनिश्चितताजनित संज्ञाहीनता में या चिन्तन में (ईश्वर करे कि चिन्तन में हों)? वे अखबारों की ताजा सुर्खियों में नहीं हैं... Read more
आशा जोशी समय हर घाव को नहीं मिटाता, पर जीने की नई वजह ज़रूर दे देता है…… ‘झंझावात’ पुस्तक वरिष्ठ लेखक व स्वतंत्र पत्रकार हरीश जोशी जी एवं उनके दोनों बच्चों अचला और अन... Read more
पूरन बिष्ट बताते है कि मूल नक्षत्रों में पैदा होने वाले बच्चों का माँ-बाप परित्याग कर दिया करते थे। बाद में जब अघविश्वासों में वर्णित ‘अशुभ’ को ‘शुभ’ में बदलने के शॉर्टकट अपनाये जाने... Read more
चंदन घुघत्याल स्कूल के Founders’ Day के बाद पहली बार दीवाली की पाँच दिन की छुट्टियाँ मिलीं। मन में एक ही ललक थी कि इस बार माँ के साथ गाँव में दीवाली मनाऊँगा। वह बचपन की सोंधी यादें, माँ के ह... Read more































