बचाव पक्ष के वकील अरविन्द वशिष्ठ ने जमानत और सजा निलंबन की मांग करते हुए कहा कि अंकिता भंडारी की मौत ’’आत्महत्या’’ थी, हत्या नहीं। आरोपियों का इसमें कोई हाथ नहीं है। घटना का ’’कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह’’ नहीं है। पूरी कहानी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उनकी सुनवाई सही ढंग से नहीं हुई। उनके खिलाफ पेश किए गए तथ्य और सबूत कमजोर हैं। व्हटसैप चैट्स, जिन पर पूरा केस टिका हुआ है, ’’सत्यापित नहीं’’ हैं और साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। निचली अदालत ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया। इसलिए अपील लंबित रहने तक जमानत दी जानी चाहिए। ये दलीलें 18 अगस्त को शुरू हुईं और 19 अगस्त को भी दोहराई तथा विस्तार से रखी गईं।
राज्य सरकार की ओर से स्टेंडिंग काउंसिल और एडवोकेट नवनीश नेगी ने जमानत का जोरदार विरोध किया। उन्होंने अपनी दलीलें सामने रखते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद ’’महत्वपूर्ण साक्ष्य जानबूझकर नष्ट’’ किए गए। रिसॉर्ट के कमरों को बुलडोजर से तोड़ा गया, आगजनी की गई, सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर के साथ छेड़छाड़ की गई। अगर आरोपी निर्दोष होते तो सबूत मिटाने की जरूरत क्यों पड़ती? ’’फॉरेंसिक साक्ष्य’’ और व्हटसैप चैट्स’’ आरोपियों को अपराध से सीधे जोड़ते हैं। चैट्स में अंकिता द्वारा “एक्स्ट्रा सर्विसेज” का दबाव और अपनी असहमति साफ दर्ज है। निचली अदालत में 47 गवाहों के बयान और 500 पन्नों की चार्जशीट के आधार पर साक्ष्य ’’पूरी तरह साबित’’ हो चुके हैं। दोषसिद्धि पर्याप्त और मजबूत है। आरोपियों की मौजूदगी घटनास्थल पर ट्रैक की गई थी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य श्रृंखला पूरी है।
अभियोजन पक्ष के वकील ने जोर देकर कहा कि निचली अदालत का फैसला सही है और जमानत देने से न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने 19 अगस्त को तीनों जमानत याचिकाएं ’’खारिज’’ कर दीं।
यह मामला 19 सितंबर 2022 का है जब पौड़ी गढ़वाल के दोभ-श्रीकोट गांव की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी 28 अगस्त 2022 को ऋषिकेश के पास यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे), मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक अंकित गुप्ता थे। 18 सितंबर 2022 की रात अंकिता अचानक लापता हो गईं। परिवार और दोस्तों की तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला। 24 सितंबर को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने ऋषिकेश के पास चीला बैराज से उनका शव बरामद किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया, साथ ही शरीर पर चोटों के निशान भी मिले। जांच में सामने आया कि अंकिता पर रिसॉर्ट में “एक्स्ट्रा सर्विसेज” देने का दबाव था, जिसे उन्होंने साफ मना कर दिया था। व्हटसैप चैट्स और गवाहों के बयानों के अनुसार, उन्होंने आरोपियों को साफ शब्दों में जवाब दिया था कि “मैं गरीब हूं, लेकिन खुद को 10 हजार रुपये में नहीं बेचूंगी।”
21 से 23 सितंबर 2022 के बीच तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने हत्या कबूल की। आरोप था कि विवाद के बाद उन्होंने अंकिता को नहर में धकेल दिया और साक्ष्य मिटाने की कोशिश की। मामले को रेवेन्यू पुलिस से नियमित पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपा गया। रिसॉर्ट के कुछ हिस्सों पर बुलडोजर चलाया गया, जिस पर साक्ष्य नष्ट करने के आरोप लगे। दिसंबर 2022 में एसआईटी ने करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की। इसमें हत्या (आईपीसी 302), साक्ष्य मिटाना (201), आपराधिक साजिश (120बी), यौन उत्पीड़न संबंधी धाराएं और अनैतिक तस्करी से जुड़े प्रावधान शामिल थे।
कोटद्वार की अदालत में दो साल से ज्यादा चली सुनवाई के बाद 30 मई 2025 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी ने तीनों को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 47 गवाहों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
सजा के खिलाफ तीनों दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील और जमानत याचिकाएं दाखिल कीं। जून 2026 में भी अदालत ने अंतरिम राहत नहीं दी थी। 18 और 19 अगस्त 2026 को दो दिन की विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दी।































