राम सिंह
कलावती तिवारी जी के निधन की खबर बेहद दुखद और हृदय को व्यथित करने वाली है। वे केवल राज्य के एक सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकारी पूरन तिवारी जी की पत्नी नहीं थीं, बल्कि स्वयं उस संघर्ष, उस त्याग और उस सादगी की प्रतिमूर्ति थीं, जिसने तिवारी जी के संघर्ष को जमीन पर टिकाए रखा।
एक आंदोलनकारी का जीवन अक्सर बाहर सड़कों पर दिखता है, पर उस आंदोलन को घर के अंदर संभालने वाली शक्ति का नाम ही कलावती जी जैसी माताएँ /बहनें होती हैं। तिवारी जी जब राज्य के हक के लिए, समाज के हक के लिए बाहर लड़ रहे होते थे, तब घर, परिवार और आते-जाते साथियों को संभालने का पूरा जिम्मा कलावती जी ने अपने कंधों पर ले रखा था।
मेरा कई बार उनके घर जाना और रहना हुआ है। मुझे याद है, उनकी आत्मीयता और दिल बहुत बड़ा था। कोई भी साथी, चाहे कितनी भी रात को पहुँचे, उनके चेहरे पर कभी शिकन नहीं देखी। एक माँ/ बहन की तरह चाय-पानी, खाना, और वही पहाड़ी आत्मीयता – राम सिंह जी खाना खा के जाना।” उस घर में मेहमान नहीं, परिवार के सदस्य की तरह महसूस होता था।
आज जब वे चली गई हैं, तो ऐसा लग रहा है जैसे उस आंगन की एक आत्मा ही चली गई हो। तिवारी जी के संघर्षों की सबसे मजबूत साथी, उनकी सबसे बड़ी हिम्मत चली गई। एक कार्यकर्ता के लिए अपने साथी को खोना कितना कठिन होता है, इसे शब्दों में कहना मुश्किल है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और पूरन तिवारी जी सहित समस्त परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। नैनीताल समाचार परिवार की श्रद्धांजलि !































