1990 में रिलीज हुई फिल्म “आशिकी” के एक बड़े हिट गाने का बड़ा हिट अंतरा है “बस एक सनम चाहिए आशिकी के लिए”. इसमें थोड़ा बदलाव करने की इजाज़त अगर दें और इसे “बस एक हादसा चाहिए शासन-प्रशासन की सक्रियता के लिए” किया जा सके तो यह हमारे शासन-प्रशासन का ‘लोगो’ या प्रतीक चिन्ह माना जा सकता है.
अपने दायित्वों के लिए शासन-प्रशासन किसी हादसे के बाद ही सक्रिय होता है और यह सक्रियता भी उतने ही समय तक दिखाई देती है जब तक कि इस हादसे की स्मृति बनी रहती है या अलग तरह का कोई और हादसा नहीं हो जाता.
अब दो दिन पहले दिल्ली के सत्य निकेतन में उस पांच-मंजिला इमारत के गिरने की ही बात करें जिसमें छात्रों के लिए ‘पी.जी.’ चलाया जा रहा था तो हादसे के तत्काल बाद दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर एम.सी.डी., डी.डी.ए., दिल्ली पुलिस, डी.यू., फायर सर्विस और न जाने कितने विभागों के झंडाबरदार सक्रिय हो गए. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को आँखों देखा हाल के लिए नया मसाला मिल गया.
पता चला कि इमारत के मालिकों के पास पी.जी.चलाने के लिए एम.सी.डी. की अनुमति नहीं थी, कोई बिल्डिंग प्लान भी नहीं था और तो और फायर सर्विस का एन.ओ.सी. भी नहीं था. एक जर्जर इमारत थी और अपेक्षाकृत कम किराये पर ठिकाने की तलाश कर रहे विद्यार्थियों की विवशता थी. सात की मौत हो गयी, पांच-सात गंभीर रूप से घायल हैं.
हादसा हो गया झंडाबरदार सक्रिय हो गए आदेश हो गया कि चार से अधिक मंजिल वाली अनधिकृत, नियमविरुद्ध इमारतों और ख़ास तौर पर पी.जी. भवनों की जाँच और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाये. (चार या कम मंजिल वाले जर्जर भवनों का क्या?) एस.ई. से लेकर जे.ई. तक के कुछ इन्जीनियरों का निलंबन हो गया, उन्हें भी मालूम है यह प्रशासनिक कार्रवाई है. देर सबेर बहाली हो ही जानी है. रुचिकर यह जानना भी हो सकता है कि इन्हीं निलम्बितों में से दो बड़े साहब मालवीयनगर के होटल अग्निकांड में भी चर्चा में आये थे. उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय के वी.सी. को हड़का लिया. इलेक्ट्रोनिक मीडिया इलाके की गलियों में कैमरा लेकर खोजी पत्रकारिता करने लगा कि कैसी अंधेरी गलियाँ हैं, कितने अँधेरे कमरे हैं और कैसी कैसी जर्जर इमारतें हैं. तीन गिरफ्तारियां भी हो ही गयीं. अब और क्या चाहिए सारे झंडाबरदार मंच पर हैं और नाटक जारी है.
ऐसा केवल दिल्ली में ही नहीं होता. ऐसे तमाम हादसे पूरे देश में हमारे आस-पास होते रहते हैं और यहाँ भी शासन-प्रशासन को हादसे का इंतज़ार करता है सक्रिय होने के लिए. सड़क दुर्घटना में कुछ एक की मौत के बाद अतिक्रमण हटाये जाते हैं मगर कुछ समय बाद वही ढाक के तीन पात और एक नए हादसे का इंतज़ार.
जैसे हादसे के बाद चेतावनी / सावधानी का बोर्ड लगाया तो जाता है मगर कुछ समय तक जब कोई दुर्घटना नहीं घटती तो हटा भी लिया जाता है.
फोटो इंटरनेट से साभार































