परिसीमन की बहस: समुचित प्रतिनिधित्व के बिना समानता अधूरी
भारत सिंह यूनानी दार्शनिकों सुकरात, प्लेटो और अरस्तू ने लोकतंत्र के संभावित ख़तरों की ओर इशारा करते हुए चेताया था कि प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ जाए तो लोकतंत्र को भीड़तंत्र में तब्दील होते देर नहीं लगेगी। ऐसा होने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की वैधता पर भी सवाल खड़े होने लगते हैं। यह संकट परिसीमन बहस के […] Read more




















































