केशव भट्ट बागेश्वर से दिल्ली को रोजाना चलने वाली रोडवेज बस आज सुबह चार बजे डिपो से निकली ही थी कि बस स्टेशन के पास जाकर रुक गई और फिर वहीं ठप पड़ गई. ड्राइवर और कंडक्टर ने घंटों कोशिश की, ले... Read more
केशव भट्ट जीवन की सबसे गहरी कहानियाँ अकसर वे होती हैं जो शब्दों में नहीं, रिश्तों की गंध में बसती हैं. ‘झंझावात’ ऐसी ही एक कथा है. एक स्त्री की, जो न केवल परिवार की धुरी थी, बल्क... Read more
जारेड फ़ार्मर पुराने पेड़ बड़ी मुसीबत में हैं। पूरे के पूरे जंगल जिनमें 3,000 वर्ष पुराने अग्निरोधी जायंट सीक्वॉया वृक्ष हैं, हाल ही में आग की लपटों में समा गए हैं। सूखा-प्रतिरोधी ग्रेट बेसि... Read more
हरीश जोशी यहां लक्ष्मी आश्रम में ‘गांधी कथा’ पर तीन दिवसीय विमर्श कार्यक्रम और गांधी जी की अनन्य शिष्या कैथरीन मेरी हाइलामन (सरला बहिन) स्मृति चतुर्थ व्याख्यान आयोजित किया गया। इ... Read more
अशोक पांडे बरसातों में घूमना, पहाड़ों की लम्बी यात्राओं पर निकल पड़ना अच्छा लगता था. विकास को पता लगा तो उसने सारे पहाड़ों में सड़कों को इतना चौड़ा करने की ठानी कि बरसातों के दौरान सफ़र शुरू करने... Read more
भूपेन सिंह नब्बे के दशक में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान मैं पिथौरागढ़ में छात्र राजनीति में सक्रिय था. हम उस दौरान आंदोलन की केंद्रीय ताक़त बने छात्रों के मोर्चे से जुड़े थे. कर्मचारी, अ... Read more
राजीव लोचन साह दृश्य एक (7 नवम्बर 2000, समय 11 बजे पूर्वान्ह): देहरादून के हर्रावाला में एक बंगाली परिवार बतलाता है कि हरिद्वार से एक टाटा सुमो किराये पर लेकर वे देहरादून और मसूरी घूमने जा... Read more
नवीन जोशी मनोज तिवारी और मैंने पत्रकारिता की दुनिया में एक साथ ही कदम रखे थे। 1977 का साल था। ‘स्वतंत्र भारत’ से एक बड़ी अनुभवी टीम ‘अमृत प्रभात’ चली गई थी, जो उसी समय... Read more
प्रिय मित्र, बधाई। जनता के अनवरत संघर्ष के पश्चात् उत्तराखण्ड राज्य अस्तित्व में आ गया है। अन्तरिम विधानसभा में जनता के प्रतिनिधि होने के नाते इस समय आप पर ऐतिहासिक जिम्मेदारी आ पड़ी है। इस स... Read more
राजीव लोचन साह जब भी चुनाव की रुत आती है तो सबसे बड़ा हमला सामाजिक समरसता और भाषायी शुचिता पर होता है। चुनाव क्षेत्र से यह छूत की बीमारी दूर.दूर तक चली जाती है। इस दौर में यह मान लिया गया है... Read more































