अरुण कुकसाल
उत्तराखण्ड के समग्र विकास की रूपरेखा पर चिन्तन-मनन करने के संदर्भ में हिमांचल प्रदेश की औद्योगिक नीति के प्रमुख बिन्दुओं का उल्लेख करना प्रासंगिक है। हिमांचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली सरकारी सुविधायें इस शर्त पर प्रदान की जाती हंै कि सुविधाभोगी औद्योगिक इकाई में रोजगार प्राप्त कामगारों में कम से कम पचास प्रतिशत हिमांचल प्रदेश के मूल निवासी अनिवार्य रूप में कार्यरत हों। इस व्यवस्था में यह भी प्रावधान है कि हिमांचल प्रदेश के मूल निवासी का प्रतिनिधित्व इकाई के सेवायोजन में हर स्तर पर होना चाहिए। इस व्यवस्था से वहाँ स्थानीय रोजगार अवश्य बढ़ा है, परन्तु व्यावहारिक रूप में उक्त व्यवस्था का अक्षरशः पालन नहीं किया जाता। उत्तराखण्ड में औद्योगिक इकाइयों को सुविधाएं देते समय स्थानीय निवासियों के सेवायोजन का उक्त प्रावधान आकर्षक तो है, परन्तु स्थानीय उद्योगों के दीर्घकालिक हितों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के अनुभवों की व्यापक पड़ताल कर ली जानी चाहिये।
हिमांचल प्रदेश में विशिष्ट उद्यमियों के लिए कुछ विशेष सुविधाएँ राज्य स्तर पर प्रदान की गयी हैं। इस वर्ग में अनु. जाति एवं जनजाति, महिला, भूतपूर्व सैनिक, विकलांग एवं एकीकृत ग्राम्य विकास योजना के अन्तर्गत चयनित व्यक्ति सम्मिलित हैं। इन उद्यमियों को 10 प्रतिशत विशेष पूंजी उपादान रु. 75,000 की सीमा तक अनुमन्य है। इस श्रेणी के उद्यमियों को 10 प्रतिशत अथवा 50,000 की सीमा तक एक प्रतिशत ब्याज पर मार्जिन मनी ऋण दिया जाता है। हिमांचल प्रदेश में ए व बी श्रेणी के विकास खण्डों में स्थापित इकाइयों को 5 प्रतिशत ब्याज उपादान टर्मलोन पर दिया जाता है, जबकि विशिष्ट उद्यमियों को 8 प्रतिशत ब्याज उपादान की व्यवस्था है। विशिष्ट उद्यमियों को किसी कार्ययोजना की फिजीबिलिटी रिपोर्ट बनाने के लिए 90 प्रतिशत अथवा अधिकतम रु. 25,000 का उपादान किया जाता है। विशिष्ट प्रकृति के उद्यमियों को उनकी इकाई में लगने वाले प्लांट एवं मशीनरी की स्थापना (स्टॉलेशन) पर होने वाले व्यय की शतप्रतिशत पूर्ति की जाती है। हिमांचल प्रदेश में विशिष्ट प्रकृति के उद्यमी को औद्योगिक आस्थानों के शैड-भूखण्ड के मूल्य में 60 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है। ये सभी व्यवस्थायें उत्तराखण्ड में की जानी चाहिए।
हिमांचल प्रदेश में बीमार इकाइयों को पुनर्जीवित करने के लिए इकाई को अतिरिक्त ऋण दिया जाता है, तो ऐसे ऋण पर देय ब्याज पर 3 प्रतिशत की छूट देने का प्रावधान है। इसकी अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये है। हिमांचल में रुग्ण इकाई के संबंध में अध्ययन (ताकि उस इकाई को पुनर्जीवित किया जा सके) हेतु प्रति अध्ययन रु. 5,000 तक की व्यवस्था है। रुग्ण इकाइयों के लिए उत्तराखण्ड में भी इस प्रकार का प्रावधान किया जाना चाहिए। प्राइज प्रेफरेन्स की नीति भारत सरकार के निर्देशन में लगभग सभी प्रदेशों में विद्यमान है। इसके अन्तर्गत लघु एवं लघुतर औद्योगिक इकाइयों को अन्य इकाइयों के मुकाबले 15 प्रतिशत तथा मध्यम-बृहद् औद्योगिक इकाइयों को 5 प्रतिशत का प्राइस प्रेफरेन्स उपलब्ध है। प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों को प्रदेश के बाहर स्थित औद्योगिक इकाइयों की तुलना में परचेज प्रेफरेन्स की नीति है। इस संबंध में शासकीय आदेश होने के बावजूद राजकीय व्ययों में मितव्ययिता को दृष्टिगत रखते हुए यह नीति प्रभावशाली नहीं रही है। उत्तराखण्ड के सन्दर्भ में प्राइस प्रेफरेन्स के स्थान पर परचेज प्रेफरेन्स देना ज्यादा उचित प्रतीत होता है।
उत्तराखण्ड में स्थापित औद्योगिक इकाइयों जिनके उत्पादन निर्धारक सामान्य मानकों पर उत्पादित हो रहे हैं, को परचेज प्रेफरेन्स दिया जा सकता है।
हिमांचल प्रदेश में पाइनियर यूनिट का तात्पर्य उन मध्यम अथवा वृहद इकाइयों से हैं, जो ए श्रेणी के विकास खण्डों में प्रथम सात इकाइयों, बी श्रेणी के विकास खण्डों में प्रथम पाँच इकाइयों में अथवा सी श्रेणी के विकास खण्डों में प्रथम स्थापित इकाई हों। उत्तर प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर रु. 10 लाख निवेश की प्रथम तीन इकाइयों अथवा तहसील स्तर पर रु. 5 करोड़ के पूँजी निवेश की प्रथम इकाई को पाइनियर इकाई की संज्ञा दी गयी है। हिमांचल प्रदेश में पाइनियर इकाइयों को व्यावसायिक उत्पादन प्रारम्भ करने की तिथि से श्रेणी ‘ए’ विकास खण्ड में 144 माह, श्रेणी ‘बी’ विकास खण्ड में 108 माह एवं श्रेणी श्सीश् विकास खण्ड में 84 माह के लिए प्रदेश व्यापार कर एवं केन्द्रीय बिक्री कर से मुक्त रखा जाता है। इन इकाइयों को श्रेणी ‘ए’ विकास खण्ड में 10 साल, श्रेणी ‘बी’ विकास खण्ड में 8 साल तक, श्रेणी ‘सी’ विकास खण्ड में 5 साल के लिए विद्युत ड्यूटी के भुगतान में छूट प्रदान की गई है। श्रेणी ‘ए’ एवं ‘बी’ विकास खण्डों में स्थापित पायनियर इकाइयों को क्रमशः 4 वर्ष तथा 3 वर्ष के लिए विद्युत चार्जेज में बढ़ोतरी से मुक्त रखा जाता है। इस अवधि में यदि विद्युत रेटों में बढ़ोतरी होती है तो उसकी प्रतिपूर्ति उद्योग विभाग द्वारा इकाई को की जाती है। हिमांचल प्रदेश में प्रेस्टेजिएस इकाई का तात्पर्य ऐसी नयी औद्योगिक इकाई से है, जिसमें स्थाई पूँजी निवेश कम से कम रु. 75 करोड़ हो। उत्तर प्रदेश में प्रेस्टेजिएस इकाई का तात्पर्य एसी नई औद्योगिक इकाई से है, जिसमें स्थाई पूंजी निवेश रु. 125 करोड़ या उससे अधिक हो तथा जनपद स्तर पर वह इतनी पूँजी निवेश वाली ऐसी प्रथम इकाई हो। उत्तर प्रदेश में प्रेस्टेजिएस इकाइयों को रु. 15 लाख का विशेष उपादान देय है। हिमाचल प्रदेश में प्रेस्टेजिएस इकाइयों को प्रथम 5 वर्ष के लिए प्रदेश व्यापार कर तथा केन्द्रीय बिक्री कर से मुक्त रखा जाता है तथा अगले 2 से 7 वर्ष (श्रेणी ‘सी’ 2 वर्ष, श्रेणी ‘बी’ 4 वर्ष, तथा श्रेणी ‘ए’ 7 वर्ष) के लिए इन इकाइयों से मात्र 1 प्रतिशत व्यापार कर केन्द्रीय बिक्री कर वसूल किया जाता है। सुझाव है कि उत्तराखण्ड क्षेत्र में 50 करोड़ या उससे अधिक पूंजी निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों को प्रथम 5 वर्ष के लिए बिक्री कर से मुक्त कर दिया जाए तथा अगले 5 वर्षों में छूट में कमी करते हुए ग्यारहवें वर्ष में पूर्ण देय व्यापार कर की स्थिति में लाया जाना चाहिए।
हिमांचल प्रदेश में उद्यम स्थापना एवं संचालन के लिए दी गयी उक्त सभी सुविधाएँ वहाँ के स्थानीय परिवेश, आवश्यकता एवं सम्भावनाओं के अनुकूल हंै। महत्वपूर्ण यह है कि उक्त सुविधाओं का स्वरूप दीर्घकालिक हैं, इसलिए उनसे सभी क्षेत्रों के संतुलित विकास की दिशा वहाँ दिखाई देती है। नवीं पंचवर्षीय योजना में विकास आयुक्त उत्तराखण्ड द्वारा उक्त सुविधाओं को उत्तराखण्ड परिपेक्ष्य में अनुमन्य करने की ओर पहल की गयी है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि उक्त नियमों, सुविधाओं एवं प्रावधानों के व्यावहारिक अनुभवों की प्राप्त कर ली जाए, ताकि उत्तराखण्ड क्षेत्र गहन जानकारी भी हिमांचल प्रदेश से में उन्हें ज्यादा प्रभावी एवं नवीन तकनीकी एवं आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जा सके।
(यह आलेख राज्य गठन के दौरान नैनीताल समाचार के 1 नवम्बर 2000 के अंक में पहली बार प्रकाशित हुआ था)
































