राहुल कोटियाल पहाड़ की जमीनें बिक जाने का शोर सिर्फ दो दिन तक सीमित रहता है। जबकि जमीनों के बिकने की प्रक्रिया अपनी गति से चलती ही रहती है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है कि आखिर बाहर के लोग... Read more
विनीता यशस्वी कुछ वर्ष पहले तक बाजार में खरीदारी के बाद जेब से नोट निकालना और दुकानदार को पैसे देना भारतीय जीवन का सामान्य हिस्सा था। आज वही दुकानदार QR कोड सामने कर देता है और ग्राहक मोबाइ... Read more
विनीता यशस्वी उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, लेकिन पहाड़ में रहने वाले आम आदमी के लिए गंभीर बीमारी आज भी किसी परीक्षा से कम नहीं। गांव के नजदीक स्वास्थ्य केंद्र है तो वहां डॉक्टर नहीं, ड... Read more
विनीता यशस्वी उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस देवभूमि की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आई है—नशे के बढ़ते कारोबार की। पुलिस और एसटीएफ की लगातार कार्रवाई के बावजूद... Read more
चंद्रशेखर तिवारी उत्तराखंड के पहाड़ों में लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक जीवनधारा के अभिन्न अंग रहे हैं। इस समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत बनाए रख... Read more
रमेश पांडे ‘कृषक’ आप लोकसभा की राजनीति में हैं, आप विधानसभा की राजनीति में हैं या फिर पंचायत की राजनीति में हैं, आपको भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में एक भगत सिंह कोश्य... Read more
गोविंद पंत ‘राजू’ ओवर टूरिज्म हिमालयी इलाकों की एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।प्रत्यक्ष रूप में तो इससे इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में सुधार दिखाई देता है लेकिन इसके दूरगामी पर... Read more
विनीता यशस्वी पहाड़ों की अपनी कोई भाषा नहीं होती, लेकिन वे उन लोगों की कहानियां जरूर याद रखते हैं, जो उनकी चोटियों तक पहुंचने के लिए अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। निर्मल ‘निम... Read more
रमदा “साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय सार सार को गहि रहे थोथा देई उड़ाय” कक्षा चार-पांच से लेकर हिन्दी साहित्य में मास्टर्स करने तक कबीर निरंतर पाठ्यक्रम में हैं और उसी हिसाब से उनकी व्याख्या... Read more
विनीता यशस्वी देहरादून। उत्तराखंड में जुलाई 2026 की पहचान भले ही मानसून और आपदा की घटनाओं से बनी हो, लेकिन महीने की खबरें केवल बारिश और भूस्खलन तक सीमित नहीं रहीं। शिक्षा व्यवस्था में पेपर ल... Read more































