इस्लाम हुसैन हल्द्वानी में रेलवे की कथित जमीन पर बनभूलपरा की बस्ती बसने को लेकर मीडिया में और ख़ास विचार धारा ने यह अफवाह ख़ूब फैलाई है कि यहां कथित रेलवे की ज़मीन पर लोगों को बसाने का का... Read more
बी. डी. सुयाल क्रोकोडाइल यानि मगरमच्छ एक डरावने सरीसृप हैं| इनके दर्शन मात्र से ही शरीर में सिहरन होने लगती है| ये डायनासोर के जमाने से पृथ्वी पर मौजूद हैं| जाहिर है मगरमच्छ 240 मिलियन वर्ष... Read more
गोविन्द पंत ‘राजू’ त्यौहार होली का हो तो बात टोपियों की क्यों न हो भला ! पहाड़ में तो होली का टोपियों से बड़ा गजब का रिश्ता है। आज तो तमाम तरह की अजब-गजब टोपियां और हैट आदि होली के दौरान लोगों... Read more
‘नैनीताल समाचार’ का होली अंक सदा से ही संग्रहणीय रहा है। अब जबकि कुमाउंनी होली का तेजी से शरण हो रहा है या वह व्यावसायिकता की ओर उन्मुख हो रही है, उसे संरक्षित करना और भी ज्यादा... Read more
डॉ. योगेश धस्माना उत्तराखण्ड में अंग्रेजी शासन के आगमन (1815) के बाद अल्मोड़ा और पौड़ी की पहचान दो प्रमुख सांस्कृतिक केन्द्रों के रूप में उभरी। गढ़वाल और कुमाऊँ के दो सम्भागों में फैला उत्तराखण... Read more
देहरादून होली की शान थे दीवान सिंह कुमैय्या फोटोग्राफर डॉ. अतुल शर्मा हमें प्रसिद्ध फोटोग्राफर स्व.दिवान सिंह कुमैया जी की बहुत याद आती है, खास तौर पर होली के अवसर पर, हम उस समय फालतू लाइन क... Read more
अरुण कुकसाल हम थैं द्यावा होली कू दान, तुम थैं द्ययालू श्रीभगवान ’हमें होली का दान दो, आपको श्रीभगवान देंगे’ देर रात तक तल्ली-मल्ली चामी से हारमोनियम और ढोलक की आवाज हम बच्चों को सुनाई देती... Read more
राजू सजवान ‘डाउन टू अर्थ’ से साभार जोशीमठ में व्यापक स्तर भूधंसाव की शुरुआत को दो माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो भूधंसाव के कारणों का खुलासा किया गया है और ना ही बेघर हुए लोग... Read more
शगुन, हिमांशु, तरण देओल, सीमा प्रसाद ‘डाउन टू अर्थ’ से साभार शहरीकरण भले ही विकास का एक पैमाना हो, लेकिन इसने हिमालय क्षेत्र को त्रासदी के मुहाने तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा... Read more
कमलेश जोशी जोशीमठ में जो कुछ आज हो रहा है वह किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं बल्कि मानवजनित आपदा है. भूगर्भ वैज्ञानिक, पर्यावरणविद वर्षों से कहते आ रहे हैं कि उत्तराखंड राज्य भूकंप के ज़ो... Read more































