निर्मल न्योलिया
प्रोफेसर वर्मा द्वारा इस यात्रा में कुमाऊँ के शैक्षणिक संस्थानों में “परिवेशीय संसाधन आधारित अनुभवात्मक भौतिकी कार्यशालाओं” में प्रतिभाग किया जिसमें 480 भौतिक विज्ञान शिक्षकों सहित 208 शिक्षक प्रशिक्षक तथा 410 शिक्षक प्रशिक्षु लाभान्वित हुए। डॉ. वर्मा देशभर में सरल, प्रयोगात्मक और जीवन से जुड़ी विज्ञान शिक्षण शैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होने आईआईटी कानपुर में वर्षों तक भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक रहने के बाद वर्तमान में वे कानपुर स्थित ‘सोपान आश्रम’ में समाज के गरीब और वंचित तबके के प्रतिभावान बच्चों के लिए काम कर रहे हैं। उनके ‘सोपान आश्रम’ के माध्यम से आईआईटी के शिक्षक और विद्यार्थियों के सहयोग से जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का सतत प्रयास किया जा रहा है।
जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘साइंस इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी उत्तराखंड’ द्वारा उत्तराखंड विज्ञान यात्रा- “प्रयोग-यात्रा सरिता (प्रयास) का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत राज्य के छह जिलों में भौतिक विज्ञान शिक्षकों एवं विज्ञान प्रेमियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं इस उद्देश्य से आयोजित की गई ताकि यहां के शिक्षकों तथा बच्चों को प्रयोगात्मक एवं अनुभवात्मक विज्ञान शिक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके जिससे विद्यालयों में विज्ञान केवल रटने का विषय न रहकर समझने और अनुभव करने का माध्यम बन सके। इन कार्यशालाओं में स्थानीय संसाधनों से प्रायोगिक सेट तैयार कर कक्षा कक्ष में वैज्ञानिक विधि के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिल सके जिसकी अनुशंसा विज्ञान पाठ्यचर्या में की गई है और जो ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ 2020 के अनुरूप नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों के अनुरूप है।
इस विज्ञान यात्रा के सफल संचालन सफल में ‘साइंस इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी उत्तराखंड’ के कुमाऊं मण्डल के संयोजक भवानी शंकर कांडपाल, हेमंत उपाध्याय, भुवन मेलकानी , सोपान आश्रम कानपुर के अनुभव अवस्थी, विनोद कुमार जोशी, त्रिभुवन जोशी तथा मोहित शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
12 मई को जिला संस्थान दिनेशपुर, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, उधमसिंह नगर से हुई जहां भास्कर उप्रेती की पहल पर जिले के माध्यमिक विद्यालयों के 100 विज्ञान शिक्षकों के साथ प्रायोगिक भौतिकी पर आकर्षक और ज्ञानवर्धक कार्यशाला के साथ इस खूबसूरत वैज्ञानिक यात्रा की शुरुआत हुई। 13 मई को एम.बी.जी.पी. कॉलेज हल्द्वानी के प्राध्यापक नरेंद्र सिंह की पहल पर हल्द्वानी के विद्यालयों के 75 फिजिक्स शिक्षकों के लिए प्रायोगिक भौतिकी पर कार्यशाला का दूसरा दिन अत्यंत उत्साह, सक्रिय भागीदारी और सार्थक शैक्षणिक संवाद के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यशाला ने चर्चा तथा व्यावहारिक प्रदर्शनों और संवादात्मक माध्यम से शिक्षकों को प्रेरित करना जारी रखा। हल्द्वानी सत्र का उद्देश्य भौतिकी शिक्षा में प्रायोगिक अधिगम के संदर्भ और महत्व को समझना था, जिसमें शिक्षकों ने प्रायोगिक भौतिकी के शिक्षण से संबंधित अपने कक्षा अनुभव, चुनौतियां और नवीन विचार खुलकर साझा किए।
प्रो. वर्मा ने वैचारिक स्पष्टता, व्यावहारिक अधिगम और जिज्ञासा-प्रेरित शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। सरल लेकिन प्रभावी भौतिकी प्रयोगों के प्रदर्शनों ने प्रतिभागियों को पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों पर पुनर्विचार करने और अधिक विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यशाला के दौरान आयोजित संवादात्मक प्रश्न-उत्तर सत्रों ने एक जीवंत शैक्षणिक वातावरण का निर्माण किया। इस तरह की पहल उत्तराखंड में वैज्ञानिक सोच और नवोन्मेषी शिक्षा की भावना को और मजबूत करती रहेंगी।
अगले दिन विशन सिंह मेहता के आमंत्रण पर भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, नैनीताल में विभिन्न विद्यालयों के 1000 बच्चों को सम्बोधन के बाद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, भीमताल में आयोजित दो दिवसीय आयोजन पूर्ण तौर पर गतिविधि आधारित था, इन सत्रों के संचालन में डॉक्टर शैलेन्द्र धपोला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संवादात्मक सत्रों एवं भवानी शंकर तथा उनकी टीम के सहयोग से 80 शिक्षकों तथा शिक्षक प्रशिक्षकों ने प्रयोगात्मक विज्ञान को नए दृष्टिकोण से समझा।
विज्ञान यात्रा का अगला पड़ाव अल्मोड़ा था जहां ऐतिहासिक भवन में संचालित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की दो दिवसीय कार्यशाला में यह बात सिद्ध हुई कि विज्ञान सिर्फ किताबों में नहीं, आचरण में भी होना चाहिए। इस कार्यशाला के दौरान प्लास्टिक-नैपकिन पर पूर्ण प्रतिबंध रहा तथा मुख्य वक्त डॉ वर्मा सहित सभी अतिथि और प्रतिभागी शिक्षकों ने अपने प्लेट कप स्वयं साफ किए। अल्मोड़ा डायट के प्राचार्य एल.एम. पांडे डॉ. वर्मा की सादगी भरे प्रयासों से इस कदर प्रभावित हुए कि डायट में डिस्पोजल इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।
यह क्रम आगे की विज्ञान यात्रा में भी जारी रहा जहां
बागेश्वर डायट के प्राचार्य चक्षुस्पति अवस्थी ने प्रण लिया कि संस्थान के भीतर होने वाले किसी भी कार्यक्रम या रसोई एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल आगे भी पूर्ण प्रतिबंधित रहेगा। यह स्वयं से बदलाव की अपील थी जो श्रम के सम्मान और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाता है। और वीआईपी-कल्चर को भी चुनौती देता है।
20 से 21 मई जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बागेश्वर की अनुभवनात्मक भौतिकी कार्यशाला प्रो. वर्मा ने विज्ञान को प्रयोगों से जोड़ने पर दिया जोर दिया तथा राजकीय इंटर कॉलेज वज़्युला में विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की जहां प्रो. वर्मा के नो-कॉस्ट एवं लो-कॉस्ट प्रयोगों को देख बच्चे बेहद खुश दिखे। उनके प्रयोग आधारित शिक्षण मॉडल ने विज्ञान को पुस्तकों से निकालकर विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़ने का कार्य किया है।
असल में यह अनूठी विज्ञान यात्रा एक विज्ञान कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा की नई अलख जगाने का प्रयास था। 23 मई को प्रोफेसर वर्मा और उनकी टीम पी एम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पहुंची जहां की प्रधानाचार्या के लिए यह विद्यालय को गौरवान्वित करने वाला ऐतिहासिक अवसर था, उनसे मिलने खूब भीड़ जुटी। ब्लॉक स्तरीय इस कार्यक्रम में 25 विद्यालय के 64 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। पहाड़ की यात्रा के अंतिम पड़ाव में डॉ वर्मा अल्मोड़ा जिले के दूरस्थ गांव सल्ट के अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज में बच्चों और शिक्षकों से मिले। यात्रा का समापन 1 जून को देहरादून में भौतिकी पर 6 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के साथ होगा।
इस विज्ञान यात्राओं के दौरान हुई भौतिकी कार्यशालाओं में घर के आस पास उपलब्ध बेकार पड़ी चीजों की मदद से भौतिकी की आधारभूत तथा कठिन प्रतीत होने वाली अवधारणाओं को सरलता से प्रयोगों द्वारा प्रदर्शित किया गया। सरल और रोचक प्रयोगों में डेटॉल की खाली बोतल में अपवर्तन और क्रान्तिक कोण का प्रदर्शन, तीन पोल वाला चुंबक, प्लास्टिक के डिब्बे में मृग मरीचिका, मटक-मटक खिसक-खिसक, सिक्का करे टक, जड़त्व का नियम, बैलून रॉकेट, कागज के छोटे टुकड़े से माइक्रोस्कोप बनाना, पेपर हेलीकॉप्टर, एक न्यूटन के बल का अनुभव करना, वोल्टेज की पहली, खाली सिरिंज की सहायता से बॉयल का नियम तथा वायुदाब, सफेद कागज में बल्ब का प्रतिबिंब आदि शिक्षकों के बीच खूब चर्चा का विषय रहा। प्रत्येक सरल प्रयोग के बाद 15 से 20 मिनट की खुली विस्तृत चर्चा हुई।
कुछ सरल प्रयोगों द्वारा भौतिक विज्ञान की आम तौर प्रचलित अवधारणाओं पर भी विस्तृत चर्चा देखने को मिली।
देहरादून में डॉ वर्मा के निर्देशन में 27 मई से एक जून भौतिकी की छह दिवसीय राष्ट्रीय आवासीय कार्यशाला होने जा रही है जिसे नेशनल वर्कशॉप फॉर उत्साही फिजिक्स टीचर्स 2026 नाम दिया गया है l प्रयोग यात्रा सरिता के इस संगम में देश भर के 50 चुनिंदा भौतिक विज्ञान शिक्षक सम्मिलित हो रहे हैं। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश भर के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों से विद्वान संसाधक शिक्षकों से सरल प्रयोगों द्वारा भौतिक विज्ञान की बारीकियों पर गूढ़ चर्चा करेंगे। सोपान आश्रम कानपुर द्वारा आयोजित यह 23वीं कार्यशाला है।































