दीपक शर्मा ‘बीबीसी’ से साभार बीते तीन दशकों के वैश्वीकरण ने रोज़गार की परिभाषा भी बदली है और स्वरूप भी. काम करने के तौर तरीक़ों में काफ़ी बदलाव आए हैं, कोरोना संक्रमण के दौरान दुनिया भर में... Read more
रमेश शर्मा ‘डाउन टू अर्थ’ से साभार पंचायती राज की नैतिक अवधारणा में ग्राम सभा और पंचायत, व्यवस्था तंत्र की परिधि का केन्द्रबिन्दु है। भारत जैसे महान समाजवादी गणराज्य में – लोगों की जो... Read more
राजू सजवाण ‘डाउन टू अर्थ’ से साभार सीड़, राजस्थान के उदयपुर जिले का एक गांव। देखने में यह राजस्थान के अन्य गांवों की तरह ही हैं, लेकिन जैसे ही आप गांव के थोड़ा अंदर पहुंचते हैं तो आप ठिठक जा... Read more
सुशील उपाध्याय इन दिनों यदि आप हरिद्वार-ऋषिकेश या देहरादून- मसूरी घूमने आना चाह रहे हैं तो अपने कार्यक्रम पर थोड़ा पुनर्विचार कर दीजिए। वजह यह है कि इन सभी स्थानों पर अप्रैल से जून के आखिर त... Read more
विवेक मिश्रा ‘डाउन टू अर्थ’ से साभार भारत 29 लाख की आबादी के अंतर से चीन को पछाड़ कर दुनिया में सर्वाधिक आबादी वाला देश बन चुका है। यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) की द स्टेट ऑफ वर्ल... Read more
विमल सती जी हां ,आप मुझे रानीखेत की हथेली की मध्य रेखा भी कह सकते हैं।इस शहर के मुख्य बाजार में घूमते ज्यों ही आप मध्य बाजार में पहुंचकर एक ढलान पर बसाहट के बीच से उतरती सड़क को देखते हैं न,... Read more
व्योमेश चन्द्र जुगरान उमेश डोभाल स्मृति समारोह के 31 वें संस्घ्करण को इस नजरिये से भी असाधारण कहा जाना चाहिए कि इतनी लंबी अवधि तक किसी संगठन/ट्रस्ट का संचालन सुचारु ढंग से जारी है। व्यय और व... Read more
डा कैलाश पाण्डेय “जोशीमठ में सरकार के प्रयास नाकाफी” फेसबुक पर लिखना आपत्तिजनक, मुकदमा दर्ज होने का पर्याप्त आधार! आज हल्द्वानी कोतवाली से बोल रहा हूं कहते हुए 9410518019 नंबर से... Read more
सुशील उपाध्याय पिछले दिनों एक ने टिप्पणी की कि डॉ अंबेडकर अलग पाकिस्तान के समर्थक थे और वे जिन्ना का समर्थन कर रहे थे। यह टिप्पणी अधूरी सोच का परिणाम है। जब तक आप डॉक्टर अंबेडकर को समग्रता न... Read more































