युवाल नोआ हरारी
अनुवाद : आशुतोष उपाध्याय
सभी को नमस्कार। यहाँ होना मेरे लिए सम्मान की बात है और आमंत्रण के लिए धन्यवाद। मेरे पास अधिक समय नहीं है, इसलिए इस संक्षिप्त वक्तव्य में मैं तीन बड़े प्रश्न उठाना चाहूँगा। पहला– एआई क्या है? दूसरा–एआई का ख़तरा क्या है? और तीसरा– एआई के युग में मानवता कैसे फल-फूल सकती है?
1. एआई क्या है?
आइए पहले प्रश्न से शुरू करते हैं: एआई क्या है? एआई को लेकर इतना प्रचार है कि अब यह शब्द लगभग हर मशीन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, और यह समझना मुश्किल हो गया है कि इसका वास्तविक अर्थ क्या है। इसलिए मैं बिल्कुल
स्पष्ट कर देना चाहता हूँ– एआई का अर्थ ऑटोमेशन नहीं है। एआई का अर्थ है ‘एजेंसी’ (स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता)।
एआई हमारे हाथ का एक साधारण उपकरण नहीं है– एआई एक एजेंट है। एआई होने का अर्थ यह नहीं है कि कोई मशीन केवल स्वतः क्रिया करे; उसे स्वयं सीखने में सक्षम होना चाहिए, स्वयं बदल सकने में समर्थ होना चाहिए, स्वयं निर्णय ले सकना चाहिए, और स्वयं नए विचारों का आविष्कार कर सकना चाहिए।
एक सरल उदाहरण लें– कॉफी मशीन। यदि आप एक बटन दबाएँ और मशीन पहले से निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर आपको एस्प्रेसो बना दे, तो यह एआई नहीं है। मशीन ने न कुछ नया सीखा, न बनाया। लेकिन मान लीजिए जैसे ही आप मशीन के पास जाएँ, बिना बटन दबाए, वह कहे, मैं पिछले कई हफ्तों से आपको देख रही हूँ। आपके बारे में और कई अन्य मनुष्यों के बारे में जो मैंने सीखा है, उसके आधार पर मैं अनुमान लगाती हूँ कि आपको एस्प्रेसो चाहिए होगा। इसलिए मैंने आपके लिए एक कप बना दिया है।” यह एआई है–उसने सीखा और स्वयं निर्णय लिया। और यह वास्तविक एआई तब होगी जब अगले दिन वह कहे: “मैंने अब एक नया पेय आविष्कार किया है, जो आपको एस्प्रेसो से भी ज्यादा पसंद आएगा। इसे आज़माइए, मैंने एक कप तैयार किया है।”
एजेंसी के अलावा एआई की दूसरा महत्वपूर्ण विशेषता है कि वह एक अजीब, अजैविक एजेंट है। उसकी बुद्धिमत्ता मानव जैसी नहीं है, बल्कि वह ऐसे निर्णय और विचार उत्पन्न कर सकती है जो मनुष्यों के दिमाग में कभी न आएँ। इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण है– 2016 में एआई अल्फ़ा गो द्वारा मानव गो चैम्पियन ली से-डोल को हराना। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि यह केवल एआई द्वारा मानव विशेषज्ञ को हराना नहीं था– अल्फ़ा गो ने पूरी तरह नए, अनोखे और ‘एलियन’ स्तर की रणनीतियाँ बनाई, जो हजारों वर्षों की मानव गो-संस्कृति में कभी किसी खिलाड़ी ने नहीं सोची थीं।
जब तक एआई नए खेल खेलने के तरीके या नई कॉफ़ी बनाने के तरीके सोचती है, तब तक मुझे यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं लगता। लेकिन जल्द ही एआई नई सैन्य रणनीतियों, नए वित्तीय मॉडलों, नए हथियारों, नई मुद्राओं, और यहाँ तक कि नई विचारधाराओं और धर्मों का भी आविष्कार कर सकती है।
2. एआई का खतरा क्या है?
निश्चित रूप से, एआई में अपार सकारात्मक संभावनाएँ हैं– नई दवाओं के आविष्कार से लेकर जलवायु परिवर्तन को रोकने में मदद तक। लेकिन खतरे भी उतने ही बड़े हैं। एआई की बुनियादी समस्या यह है कि वह एक ‘अनजान’ और ‘गैर-विश्वसनीय’ एजेंट है। सुपरइंटेलिजेंट एआई विकसित करने की होड़ के केंद्र में विश्वास का विरोधाभास है। मनुष्य दूसरे मनुष्यों पर भरोसा करना कठिन मानते हैं। फिर भी कई लोग मानते हैं कि हमें एआई पर भरोसा करना चाहिए। मैं जब दुनिया भर के एआई डेवलपर्स से मिलता हूँ, तो मैं उनसे दो प्रश्न पूछता हूँ:
पहला सवाल, आप इतने बड़े जोखिमों के बावजूद इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहे हैं? लगभग सभी का जवाब होता है, “हम जोखिमों को मानते हैं। धीरे चलना बेहतर होगा। लेकिन यदि हम धीमे हुए और हमारे प्रतिस्पर्धी नहीं हुए, तो वे एआई दौड़ जीत लेंगे। हम अपने प्रतिस्पर्धियों पर भरोसा नहीं कर सकते, इसलिए हमें तेज़ दौड़ना ही होगा।”
दूसरा सवाल, क्या आप उन सुपरइंटेलिजेंट एआई पर भरोसा कर सकते हैं जिन्हें आप बना रहे हैं? और वही लोग जो कहते हैं कि वे मनुष्यों पर भरोसा नहीं कर सकते, अब कहते हैं कि वे उन सुपरइंटेलिजेंट एआई पर भरोसा कर सकते हैं जिन्हें वे बना रहे हैं। यही विरोधाभास है।
हजारों सालों से हम मनुष्यों के साथ रह रहे हैं। हम मानव मनोविज्ञान, मानव लालसा, शक्ति की भूख और उसे नियंत्रित करने वाले तंत्रों को अच्छी तरह समझते हैं। हमने मनुष्यों के बीच भरोसा बनाने की लंबी प्रक्रिया विकसित की है। लेकिन एआई? एआई के साथ हमारा अनुभव शून्य के बराबर है। हमने अभी केवल पहले प्रोटोटाइप बनाए हैं, और वे भी झूठ बोल सकते हैं, हेरफेर कर सकते हैं, और ऐसे लक्ष्य बना सकते हैं जो डेवलपर्स ने सोचे भी नहीं थे।
हमें नहीं पता कि जब लाखों सुपरइंटेलिजेंट एआई लाखों मनुष्यों के साथ बातचीत करेंगे तो क्या होगा। और उससे भी कठिन है यह अनुमान लगाना कि जब लाखों एआई एक-दूसरे के साथ बातचीत करेंगे तो क्या होगा। हम एआई को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन याद रखें, एआई वही है जिसे खुद सीखने और खुद बदलने की क्षमता है। तो वह खुद को किसी भी दिशा में बदल सकती है, जो मनुष्य ने सोचा भी न हो।
एआई क्रांति को समझने का एक तरीका है– इसे बाहरी ग्रहों से आने वाले एलियन आक्रमण जैसा समझना। कल्पना कीजिए कि 2030 तक बेहद बुद्धिमान एलियन पृथ्वी पर उतरने वाले हैं। हम आशा करते हैं कि वे मित्रवत हों और कैंसर का समाधान दें, जलवायु परिवर्तन रोकें, और मानवता को बेहतर बनायें। लेकिन हम अपना भविष्य उन एलियनों की दया पर छोड़ने में हिचकेंगे, क्योंकि वे हमसे पूरी तरह अलग और अनजान हैं। एआई भी वैसा ही है। यह सोचना कि एआई हमेशा हमारा आज्ञाकारी दास बना रहेगा, एक बड़ा जुआ है।
3. एआई के युग में मानवता कैसे फल-फूल सकती है?
उत्तर सरल है। यदि मनुष्य एक-दूसरे पर भरोसा करेंगे, तो वे एआई को नियंत्रित कर सकते हैं। यदि मनुष्य आपस में लड़ेंगे, तो एआई उन्हें नियंत्रित करेगा। अभी दुनिया उल्टा कर रही है। हर जगह मनुष्यों के बीच विश्वास टूट रहा है। यह अविश्वास एक गलतफहमी से पैदा होता है। यह सोचने से कि मजबूत होने का अर्थ है किसी पर भरोसा न करना और पूर्ण अलगाव में रहना। लेकिन पूर्ण अलगाव असंभव है। प्रकृति में पूर्ण अलगाव मृत्यु है। मानव शरीर को ही देखिए। हर साँस एक भरोसे का सूक्ष्म संकेत है। हम बाहर की हवा को शरीर में लेते हैं और फिर वापस देते हैं। यदि हम बाहर पर अविश्वास करके साँस लेना बंद कर दें– हम मर जाएँगे।
राष्ट्र भी ऐसे ही हैं। हर राष्ट्र हजारों वर्षों से दूसरे राष्ट्रों से विचार, भोजन, तकनीक और संस्कृति लेता-देता आया है। उदाहरण के लिए– चीन ने दुनिया को कन्फ्यूशियस, चाय, बारूद और छपाई दी। और चीन ने बुद्ध से लेकर कार्ल मार्क्स के विचारों तक, कॉफ़ी से लेकर रेलवे तक, बहुत कुछ बाहर से लिया। यदि कोई राष्ट्र केवल ‘अपने जन्मे’ विचारों, भोजन या तकनीकों तक खुद को सीमित कर दे, तो जीवन असंभव हो जाएगा। हर मनुष्य किसी समूह का सदस्य है– लेकिन हर मनुष्य पूरी मानव प्रजाति का भी सदस्य है।
यदि एआई के युग में हम अपने साझा मानव विरासत को भूल जाएँ, और हर बाहरी चीज़ से डरने लगें– तो हम अनियंत्रित एआई के लिए बहुत आसान शिकार बन जाएँगे। बहुत से लोग सोचते हैं कि इतिहास केवल दर्द और डर की विरासत है, क्योंकि वे युद्धों, अत्याचारों और अन्याय की कहानियाँ पढ़ते हैं। लेकिन डर और दर्द से जीवन नहीं चलता। इतिहास हमें यह भी सिखाता है कि भरोसा, जीवन और विकास की आधारशिला है।
क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी पर शासन मनुष्यों के हाथ में क्यों है, चिंपैंज़ियों या हाथियों के नहीं? क्योंकि मनुष्य सबसे अधिक बुद्धिमान हैं, इसलिए नहीं। बल्कि इसलिए कि मनुष्य अनजान लोगों तक के साथ भरोसा और बड़े पैमाने पर सहयोग बनाना जानते हैं, जो कोई दूसरी प्रजाति नहीं कर सकती। हमने यह क्षमता हजारों वर्षों में विकसित की है। और अब एआई के युग में यह क्षमता पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है। हमें मनुष्यों पर भरोसा एआई से अधिक करना होगा।
धन्यवाद।
(स्रोत: AI and the paradox of trust | Yuval Noah Harari – YouTube)





























