चारु तिवारी जब भी पौड़ी जाना होता है एक जगह हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती रही है। बताती रही है अपनी थाती। कोटद्वार से ऊपर जाने के बाद एक पट्टी शुरू हो जाती है कोडिया। यहीं एक गांव है पाली। बहुत... Read more
गोविंद पंत ‘राजू’ हल्द्वानी से एक मित्र के बहुत सालों बाद अचानक आए फोन ने पुरमल सिंह धर्मशक्तू के निधन की दुखदाई सूचना दी। 1984 के आसपास पुरमल लखनऊ में टेलीफोन विभाग में कार्यरत था और उससे... Read more
विनोद पांडे सन् 1976 में नैनीताल और नैनीताल के डीएसबी काॅलेज की रंगत कुछ और ही हुआ करती थी। पढ़ाई का माहौल अपने उरूज पर होता था। सन् 75 में इमरजेंसी लगने के बाद काॅलेज की नाममात्र की छात्र रा... Read more
राजीव लोचन साह अभी-अभी राजा बहुगुणा के देहान्त का समाचार झकझोर गया। उसकी बीमारी का समाचार सुन तो रहा था। करीब महीना भर पहले हल्द्वानी गया ही इसलिये था कि एक बार उससे मिल लूँ। मगर भाकपा (माले... Read more
चारु तिवारी हम सब लोग अपने अग्रज और उत्तराखंड राज्य के शिल्पियों में से एक रहे इन जांबाज आंदोलनकारी दिवाकर भट्ट के निधन से स्तब्ध हैं। उनका निधन आंदोलनों के एक युग का अवसान है। उन्हें हम सब... Read more
डाॅ. अरुण कुकसाल ‘THE ESSENTIAL R. S. TOLIA’ ग्रंथ का प्रकाशन ‘दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र’, देहरादून ने मै. बिशन सिंह महेन्द्र पाल सिंह, देहरादून के साथ मिलकर वर्ष-2017 में किया। उत... Read more
विजया सती कभी कोई सांझ माधुर्य का झरना बनकर बह उठती है. ऐसी ही एक अनौपचारिक सांझ घिर आई थी नवंबर 12 को हल्द्वानी के पंत निवास में, जब लंदन से अपनी जड़ों की ओर बारम्बार लौटते संस्कृति कर्मी... Read more
नवीन जोशी मनोज तिवारी और मैंने पत्रकारिता की दुनिया में एक साथ ही कदम रखे थे। 1977 का साल था। ‘स्वतंत्र भारत’ से एक बड़ी अनुभवी टीम ‘अमृत प्रभात’ चली गई थी, जो उसी समय... Read more
चारू तिवारी उन दिनों हम बग्वालीपोखर में रहते थे। यह 1980 की बात है। यहीं इंटर कालेज में दसवीं कक्षा में पढ़ते थे। बग्वालीपोखर में तब न तो सड़क थी और न बिजली। देश में आपातकाल के बाद आई जनता पार... Read more
(नवीन जोशी द्वारा 22 सितम्बर 2025 को अल्मोड़ा में दिए गए शम्शेर स्मृति व्याख्यान का सम्पादित आलेख) आज यहां, अल्मोड़ा के इस मंच पर खड़े हुए मन उदास है। कारण कई हैं जिनमें मुख्य है देश दुनिया के... Read more































