राजीव लोचन साह
वर्ष 2025 जाते-जाते कुछ और दुःखद घटनायें पीछे छोड़ गया है। सबसे ताजा घटना भिकियासैंण के पास हुई केएमओयू की बस दुर्घटना की है, जिसमें 7 लोगों की मृत्यु हो गयी। भिकियासैंण-रामनगर मार्ग में ऐसी घटनायें अनेक बार घट चुकी हैं। इन्हें रोकने के प्रयास कतई सफल नहीं हो पा रहे हैं। उधर अंकिता हत्याकांड के मामले में उर्मिला सनावर नामक एक महिला ने कुछ सनसनीखेज खुलासे किये हैं, जिससे उत्तराखंड की जनता में एक बार फिर गुस्सा बढ़ने लगा है। उर्मिला ने अब तक अज्ञात रहे ‘वी.आई.पी’ का बाकायदा नाम उजागर कर दिया है, जो सत्ताधारी पार्टी का एक बहुत बड़ा नेता बतलाया जा रहा है। होना तो यह चाहिये था कि सरकार तत्काल उच्चस्तरीय जाँच करवा कर इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर देती। मगर सत्ताधारियों की आदत होती है कि तब तक कोई निर्णायक कदम नहीं उठाते, जब तक पानी सिर तक नहीं पहुँच जाता। शासक दल के जिम्मेदार लोगों के अंटशंट बयान आने से लोगों का गुस्सा और अधिक भड़क रहा है।
इन से थोड़ा हट कर, मगर ज्यादा चिन्ताजनक घटना देहरादून में 9 दिसम्बर को घटी जब वहाँ पढ़ने वाले त्रिपुरा के एक छात्र की नस्लीय आधार पर हत्या कर दी गयी। 24 वर्षीय एंजेल चकमा एमबीए के छात्र थे। उनके पिता एक बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) जवान हैं, जो वर्तमान में मणिपुर में तैनात हैं। घटना की शुरूआत एक झगड़े से हुई, जब एंजेल और उनके भाई पर कुछ लोगों ने ‘चिंकी’, ‘चीनी’ और ‘मोमो’ जैसी नस्लीय टिप्पणियाँ कीं। विरोध करने पर हमलावरों ने एंजेल पर चाकू और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। एंजेल को गंभीर चोटें आईं। उनके भाई को भी चोटें आईं, लेकिन एंजेल की हालत ज्यादा गंभीर थी। इलाज के दौरान 26 दिसम्बर को एंजेल का देहान्त हो गया।
एंजेल के पिता ने सीसीटीवी फुटेज का जिक्र किया है, जिसमें हमले की पूरी घटना कैद हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरू में एफआईआर दर्ज करने में देरी की और चकमा छात्र संगठन के दबाव के बाद ही कार्रवाही की। पिता ने यह भी कहा कि उनके बेटे को जातीय और नस्लीय आधार पर प्रताड़ित किया गया। इस घटना ने उत्तर-पूर्वी राज्यों में आक्रोश पैदा किया है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कैंडललाइट विजिल और विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें उत्तर-पूर्वी नागरिकों के खिलाफ भेदभाव को रोकने की माँग की गई। पुलिस ने कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें 3 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, 2 नाबालिगों को जुवेनाइल होम में रखा गया है। एक आरोपी नेपाल से है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जाँच में कोई नस्लीय टिप्पणियाँ या पूर्वाग्रह नहीं पाया गया, बल्कि यह एक सामान्य विवाद था।
एंजेल की हत्या की घटना चिन्ताजनक इसलिये है कि यह साबित करती है कि तथाकथित ‘देवभूमि’ अब पूरी तरह ‘दानव भूमि’ बनने जा रही है। सत्ताधारी दल ने राजनीतिक लाभ के लिये साम्प्रदायिक धु्रवीकरण का रास्ता अपनाया, मगर नफरत जब फैलने लगी तो उसने अलग-अलग रूप धरने शुरू कर दिये। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि नफरत अन्ततः नफरत ही पैदा करती है और मुहब्बत मुहब्बत ही। इसीलिये हर धर्म में मुहब्बत को एक मूल्य के रूप में स्थापित किया गया है। यह तो इधर के वर्षों में हो रहा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम गुस्से में भरे आते हैं और सेवा और प्यार में सराबोर रहने वाले उनके सेवक हनुमान भी। सरकार जिस तरह से धार्मिक वैमनस्य को अनदेखा करती है, बल्कि जानबूझकर निष्क्रिय रहती है, उससे यह नफरत लगातार बढ़ती जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने का एक ही तरीका है कि सरकार-प्रशासन सजग रहे और तत्काल कड़े कदम उठाये। मगर ऐसा होता तो दिखता नहीं।
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