कार्यालय प्रतिनिधि
‘न्यूजलाँड्री’ ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के बारे में एक दिलचस्प मगर चैंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट से चिन्ता भी होती है कि किस तरह हमारे द्वारा टैक्स में दिये गये धन का उपयोग हमारे मुख्ष्मंत्री की छवि चमकाने में हो रहा है।
रिपोर्ट बतलाती है कि अगर हम उत्तराखंड में हैं तो हर त्यौहार पर हमें एस.एम.एस. द्वारा या हमारे व्हाट्सएप इनबाॅक्स में एक बधाई संदेश मिलता है, जिसे हम अक्सर बिना पढ़े ही डिलीट कर देते हैं। इस एक संदेश को उत्तराखंड के हर मोबाइल फोन पर भेजने का खर्च 37 लाख रुपये है। इतने में एक शानदार इनोवा गाड़ी खरीदी जा सकती है। अगर हम अपना टी.वी. खोलें और किसी अन्य प्रदेश का चैनल, उदाहरण के लिये नगालैंड का, देखें तो हो सकता है कि हमें उसमें उत्तराखंड सरकार का विज्ञापन देखने को मिल जाये। इस एक विज्ञापन के लिये सरकार ने खर्च किया होगा एक करोड़ रुपया। इतने में तो उत्तराखंड के पहाड़ी शहर में एक शानदार घर बन जाये। मजेदार बात यह है कि नगालैंड के उस विज्ञापन को देखने वाला तो उत्तराखंड में कोई होगा ही नहीं।
इस तरह प्रति दिन उत्तराखंड सरकार मुख्यमंत्री धामी की छवि चमकाने में 55 लाख रुपये प्रति दिन व्यय कर रही है।
‘न्यूजलाँड्री’ की यह रिपोर्ट बतलाती है कि पिछले चार सालों में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रचार में 1,001 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। जबकि ‘मिड डे मील’ (मध्यान्ह भोजन) परियाजना में इससे कहीं कम धनराशि व्यय हुई है। उत्तराखंड गिनती इस वक्त देश के उन प्रदेशों में है, जहाँ आक्रामक प्रचार करने में सबसे ज्यादा व्यय होता है। जबकि उत्तराखण्ड एक बहुत छोटा सा राज्य है।
वर्ष 2020-21 में जब त्रिवेन्द्र सिंह रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे, प्रदेश सरकार ने विज्ञापनों में 77 करोड़ रुपये खर्च किये थे। धामी सरकार के आने के बाद अगले वर्ष यह धनराशि लगभग तीन गुना, रुपये 227 करोड़ हो गयी और 2024-25 तक यह धनराशि 290 करोड़ पहुँच गयी।
सर्वाेच्च न्यायालय ने काॅमन काॅज बनाम भारत सरकार मामले (वर्ष 2015) में सुप्रसिद्ध कानूनविद् एन.आर. माधव मेनन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति ने जो संस्तुतियाँ कीं, न्यायालय ने उन्हें स्वीकार करते हुए अपना आदेश पारित किया। इन संस्तुतियों में कहा गया था कि विज्ञापन जनता के हित में जारी किये जाने चाहिये, न कि राजनीतिक ऐजेंडा पूरा करने के लिये। प्रचार सरकार की जिम्मेदारियों से सम्बन्धित होना चाहिये। उसे वस्तुगत से हरेक के पास आसानी से पहुँचना चाहिये। उसे कानूनी तथा वित्तीय नियमों के अन्तर्गत सस्ता तथा कुशल और पक्षपात रहित होना चाहिये।
न्यायालय के निर्णय को प्रायः अनदेखा करती रही हैं। उत्तराखंड में भी पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद इन नियमों को ताक में रख दिया गया। खुले हाथों खूब विज्ञापन बाँटे। छोटे न्यूज चैनलों की
सूची इस प्रकार है:-
इंडिया वाॅइस: 8.38 करोड; स्वराज एक्सप्रेस: 8.5 करोड़; चढ़दीकला टाईम टीवी: 8.67 करोड़; न्यूज स्टेट उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड: 8.81 करोड़; टीवी100: 8.9 करोड़; साधना प्लस न्यूज:9.7 करोड़; नेटवर्क 10: 12.81 करोड़; न्यूज 18 उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड: 12.94 करोड़; न्यूज इंडिया: 13.52 करोड़; दूरदर्शन उत्तराखंड: 31.66 करोड़। देश के बड़े-बड़े चैनलों को तो और अधिक विज्ञापन दिये गये।
अब इस धुँआधार प्रचार से क्या सचमुच पुष्कर सिंह धामी की छवि चमकी ? पता नहीं।

































