राजीव लोचन साह
पहलगाम की घटना, ऑपरेशन सिन्दूर, उसके बाद भारत-पाक सीमा पर झड़प और अन्ततः युद्धविराम। मगर युद्ध विराम के दो सप्ताह बाद भी तस्वीर अभी साफ नहीं हो पा रही है और रहस्य के जाले बने हुए हैं। सबसे बड़ा रहस्य तो यह है कि जिन आतताइयों ने 22 अप्रेल को पहलगाम में 26 पर्यटकों की, बाकायदा उनका धर्म पूछ कर, नृशंस हत्या की थी, एक महीना बीत जाने के बाद भी उनका पता नहीं चल पाया है। न वे जिन्दा पकड़े गये हैं और न उनके शव ही मिले हैं। इस बात से पूरे देश में असहजता है। सरकार द्वारा हमें बताया जा रहा था कि आतंकवाद खत्म हो गया है और अब उससे घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि यह बात तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2016 में ही कही थी कि नोटबन्दी इसलिये की जा रही है, ताकि आतंकवाद की कमर तोड़ी जा सके। तब देशवासियों ने इसीलिये इतनी बड़ी विपत्ति को खुशी-खुशी झेला था। अब इन आतंकवादियों के हवा में विलीन हो जाने से भारत के नागरिकों का विश्वास डगमगा गया है। उधर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक अजीब सा बयान देकर देशवासियों को हैरत में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर से पहले पाकिस्तान को आगाह कर दिया गया था। अब यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही है। क्या लड़ाई में दुश्मन से यह कहा जाता है कि हम आ रहे हैं ? हमले की आकस्मिकता से दुश्मन को आश्चर्य में डाल देना लड़ाई में सबसे जरूरी होता है। तब हमारे विदेश मंत्री ऐसा क्यों किया होगा ? उधर अमेरिका के राष्ट्रपति अनेक तरह से बात बदल कर बार-बार यह कह रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया। भारत सरकार प्रभावी ढंग से उनके दावों का खंडन भी नहीं कर पा रही है। भारतवासी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जब कश्मीर के एक हिस्से से पाकिस्तान का आधिपत्य समाप्त करने का सुनहरा मौका सामने था तो भारत ने युद्ध क्यों रोक दिया होगा, वह भी अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि एक तीसरे देश के दबाव पर ?

































