राजीव लोचन साह
राजनीति में झूठ को इतने विश्वसनीय ढंग से पेश करना कि वह अटल सत्य लगने लगे, एक कारगर कला है। लोकतंत्र में कुल मिला कर जनता को आश्वस्त करना होता है, आप झूठ को भरोसेमंद बना दें या सच को। अब्राहम लिंकन ने कहा था कि आप कुछ लोगों को बहुत समय तक बेवकूफ बना सकते हैं और बहुत से लोगों को थोड़े से समय के लिये। मगर आप बहुत से लोगों बहुत समय तक बेवकूफ नहीं बना सकते। मगर कौन सा राजनैतिक दल बहुत से लोगों को ज्यादा से ज्यादा बेवकूफ बना सकता है, यही उसकी ताकत होती है। लगता है भारतीय जनता पार्टी ने इस कला में महारत हासिल कर ली है और इस मुद्दे पर अन्य दलों को काफी पीछे छोड़ दिया है। इस काम में उसे कॉरपोरेट नियंत्रित गोदी मीडिया की पूरी-पूरी मदद मिल रही है, जो उसके झूठ को दमदार ढंग से घर-घर तक पहुँचा देता है। ताजा उदाहरण महिला आरक्षण बिल का है, जो संसद में पारित हो कर कानून नहीं बन सका। बेहद जल्दबाजी में लाये गये इस बिल के बहाने से सत्ताधारी पार्टी ने लोकसभा की सीेटें बढ़ाने के एक शातिर खेल खेला था, जिसे अन्य दलों ने समय रहते भाँप कर पारित होने से रोक दिया। संसद में महिलाओं के सीटों का आरक्षण होने के लिये, सीटें बढ़ाया जाना क्यों जरूरी है ? आप चाहते हैं कि आरक्षण हो तो मौजूदा लोकसभा की सीटों में उसे देने के लिये आपको किसने रोका है ? मगर इस बिल के असफल होने के बाद अब भाजपा इस झूठ को देश भर में फैलाने में जुट गयी है कि देश के विपक्षी राजनैतिक दल महिलाओं के सशक्तीकरण के विरोधी हैं। उत्तराखंड में भाजपा द्वारा न सिर्फ इसके लिये एक विशाल रैली निकाली गयी, बल्कि संसद में बिल गिर जाने की निन्दा करने के लिये एक दिन का विशेष विधानसभा सत्र भी कर डाला। हास्यास्पद यह है कि अंकिता हत्याकांड मामले में जो सरकार अपराधियों को साफ-साफ बचाती हुए दिख रही है, वह नारी सम्मान के लिये इस तरह का तमाशा खड़ा करे।

































