सी. एम. पपनै
33वाँ उमेश डोभाल स्मृति समारोह इस बार 24 और 25 मार्च को अल्मोड़ा के जिला पंचायत सभागार में सम्पन्न हुआ। प्रेस क्लब अल्मोड़ा और और जिला पत्रकारों द्वारा गठित आयोजन समिति के सान्निध्य में सम्पन्न इस यादगार आयोजन में उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और कस्बों से तथा उत्तर प्रदेश और दिल्ली से बड़ी संख्या में पहुँचे पत्रकारों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों व सामाजिक संगठनों की प्रभावी उपस्थिति रही।
24 मार्च को प्रातः 11.30 बजे अल्मोड़ा के गांधी पार्क से ‘उमेश डोभाल एक व्यक्ति नहीं, एक धारा थी, एक धारा है’ नारे के साथ एक रैली शुरू हुई। ‘‘उत्तराखंड मेरि मातृभूमी, मातृभूमी मेरि पितृभूमी’’; ‘‘जैंता एक दिन तो आलो ऊ दिन यो दुनी में’’, ‘‘हम लड़ते रैयाँ दाज्यू, हम लड़ते रूँलो’’; ‘‘लस्का कमर बाँधा, हिम्मता का साथा’’ और ‘‘नफस नफस कदम कदम, बस एक फिक्र दम बदम’’ आदि जनगीत गाते हुए अत्यन्त प्रभावशाली जुलूस मालरोड और लाला बाजार होता हुआ जिला पंचायत सभागार में पहुँचा। प्रथम सत्र में मंचासीन गोविंद पंत ‘राजू’, पी. सी. तिवारी, बल्ली सिंह चीमा, चारु तिवारी, राजीव लोचन साह, सुरेश नौटियाल तथा अल्मोड़ा प्रेस क्लब के अध्यक्ष जगदीश जोशी के साथ प्रकाश पंत, मुकुल कुमार, ईश्वर दत्त जोशी, विमल भारती, डॉ. निर्मल जोशी, आनंद सिंह राणा, कपिल मल्होत्रा, रूपेश कुमार आदि वक्ताओं द्वारा उत्तराखंड राज्य गठन के पच्चीस वर्षों की बेबाक समीक्षा की गई।
चर्चा में कहा गया कि जैसा राज्य और पत्रकारिता उत्तराखंड का जन चाहता था वैसा नहीं हो रहा है। लगता था नए राज्य गठन के बाद नौकरशाही कम होगी, जन की भागीदारी होगी। ऐसा नहीं हुआ। खेती किसानी समाप्त हो गई है। गाँव भुतहा हो गए हैं। खेती-किसानी पर देश की लड़ाई किसान ही लड़ रहा है। ओने पौने दामों में कृषक से कृषि उत्पाद खरीद बिचैलियों द्वारा महंगे दामों में बेचे जा रहे हैं। उमेश डोभाल खाली पत्रकार नहीं थे, गलत पर समझौता नहीं करते थे। उत्तराखंड में बुद्धिजीवियांे का बड़ा तबका है। उन्हें अंचल के उद्धार हेतु आगे आना चाहिए। वक्ताओं द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन, साहित्य व पत्रकारिता में अल्मोड़ा के लोगों की प्रमुखता से निभाई गई भूमिका पर सारगर्भित प्रकाश डाला गया। बताया गया कि उमेश डोभाल ट्रस्ट से जुड़े लोग घंटी बजाने का कार्य करते हैं। उमेश डोभाल की वैचारिकता मूल रूप से शराब के खिलाफ थी, वही लड़ाई आज शराब को बढ़ावा दे रही सरकार के खिलाफ है।
बड़ी संख्या में बेरोजगारी पर वक्ताओं द्वारा अवगत कराया गया। राज्य गठन से पूर्व ही अंचल में स्थापित अनेकों कल-कारखाने पलायन कर गए थे। सिडकुल बनने से लगता था, अंचल के युवाओं को रोजगार मिलेगा। मगर हालात खराब हैं। श्रम कानून बदल दिए गए हैं। नौकरियाँ ठेकेदारी पर चली गई है। अंग्रेजों से लड़ कर पंचायतों को जो हक मिले थे, राज्य गठन के बाद वे छीन लिए गए हैं। खेती किसानी हो नहीं रही है, किसान निधि बढ़ती जा रही है। किसान की कोई परिभाषा प्रदेश में नहीं है। दस नाली से कम जमीन वाला भूमिहीन कहलाया जाता है, जिनका प्रदेश में बड़ा प्रतिशत है। उधमसिंह नगर के पत्रकार विमल भारती के साथ पुलिस के अमानुषिक व्यवहार से पत्रकारों में रोष था। इस घटना में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही की माँग की गई। वक्ताओं का निष्कर्ष था कि प्रदेश में कुछ सिरफिरों को ताकत देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जनता को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार तो है, चुने हुए को वापस बुलाने का अधिकार नहीं है। वर्तमान समस्याएँ राजनैतिक हैं, उनका समाधान राजनैतिक ही हो सकता है।
अल्मोड़ा के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा अवगत कराया गया उनकी मान्यता खत्म कर दी गई है। उक्त नीति की निंदा की गई और मान्यता बहाल करने की माँग पर जोर दिया गया। विगत दिनों अल्मोड़ा के खत्याड़ी गाँव निवासी, विख्यात लोकगायक स्व. दिवान कनवाल के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
तीसरे पहर ‘विहान’ संस्था द्वारा आगंतुकों के मनोरंजन हेतु नंदा देवी डोले के साथ गीत, संगीत तथा नृत्य का मनभावन कार्यक्रम मंचित किया गया। सुप्रसिद्ध जनकवि बल्ली सिंह चीमा के साथ कुछ आगंतुकों द्वारा कवितापाठ किया गया। पहले दिन का मंच संचालन चंद्र शेखर द्विवेदी तथा विभु कृष्णन द्वारा किया गया।
25 मार्च को पहले सत्र का श्रीगणेश भास्कर भौर्यांल के बिणाई वादन और कुमाउनी लोक धुनों के साथ हुआ। अध्यक्ष मंडल में नवीन बिष्ट, ओ. पी. पांडे, रमेश पांडे ‘कृषक’, नरेश नौड़ियाल, डॉ. हयात रावत, चंद्र मोहन पपनै तथा दया शंकर टम्टा थे। सत्र में मंचासीनों के साथ-साथ राष्ट्रीय जल सम्मान प्राप्त मोहन कांडपाल, दिनेश उपाध्याय, कुंडल चैहान, जगमोहन रौतेला, शंकर सिंह भाटिया, सूरज कुकरेती, शालिनी तथा प्रभात ध्यानी द्वारा विचार व्यक्त किए गए।
वक्ताओं द्वारा कहा गया कि नौलों का पानी सूख गया है। गंगा की प्रथम इकाई नौला है। ‘पानी बोओ, पानी उगाओ’ के नारे के साथ बाँज के पेड़ लगा व खाव खोद जल स्रोतों का पुनरुद्धार किया जाना चाहिए। पलायन पर अंकुश लगा कर खेती को बचाना जरूरी है। खेती की जमीन सिकुड़ गई है। पंचायती व्यवस्था छीन ली गई है। संसाधनों की लूट मची हुई है। अनभिज्ञ लोगों से प्रदेश की योजनाएँ बनवाई जा रही हैं, जबकि बुजुर्गों व स्थानीय अनुभवी लोगों से विचार विमर्श कर दीर्घ हित में योजनाएँ क्रियान्वित की जानी चाहिए थीं। युवा पीढ़ी नशे का सेवन कर बर्बाद हो रही है। बेरोजगारी से निराशा की जद में पहुँच चुके युवाओं का मनोबल बढ़ाना अति आवश्यक है। सत्ताधारी राजनैतिक पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं की भर्ती सरकारी तौर पर हो रही है।
वक्ताओं द्वारा कहा गया कि जनपक्षधर पत्रकारिता कमजोर हो चुकी है। पत्रकार संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों व नेताओं से सवाल-जवाब नहीं कर पा रहे हैं। उनके समक्ष आजीविका का संकट भी है। सिर्फ सोशल मीडिया के पत्रकार ही स्वतंत्र हैं। प्रदेश में मॉल तो बन गए हैं, लेकिन अस्पताल नहीं बने। सरकारी अस्पतालों के टैस्ट प्राइवेट में करवाए जा रहे हैं। मरीजों को हायर सेंटर रैफर किया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टर सिर्फ अस्थाई तौर पर रखे जा रहे हंै। प्राइवेट स्कूल और अस्पताल खूब खुल रहे हैं और उनका उद्घाटन मंत्रीगण कर रहे हैं। सत्र का समापन हर्ष काफर की कविताओं से हुआ। मंच संचालन विजय वर्द्धन उप्रेती ने किया।
समारोह के अंतिम सत्र में मंचासीन राजीव लोचन साह, पी. सी. तिवारी, जहूर आलम, गोविंद पंत ‘राजू’, प्रोफेसर शेखर पाठक तथा ट्रस्ट पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा स्मारिका का विमोचन किया गया। वर्ष 2026 का उमेश डोभाल स्मृति सम्मान सुप्रसिद्ध साहित्यकार कपिलेश भोज को प्रदान किया गया। राजेन्द्र रावत ‘राजू’ स्मृति जनसरोकार सम्मान पर्यावरण संवर्द्धन के प्रति समर्पित ‘वृक्ष प्रेमी’ किशन सिंह मलड़ा को तथा गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ स्मृति जनकवि सम्मान’ रंगकर्मी यमुना राम को उनके जनपक्षीय नाटकों और जन गीतों के लिए दिया गया। सोशल मीडिया सम्मान ‘विजयपथ न्यूज’ के विजय सिंह रावत को दिया गया, जिसे उनकी अनुपस्थिति में प्रेम पंचोली द्वारा ग्रहण किया गया। पिं्रट मीडिया सम्मान राजू सजवान को दिया गया तथा एक विशेष सम्मान से लेखक शंभू राणा को सम्मानित किया गया। सम्मान में प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह व ग्यारह-ग्यारह हजार रुपयों के चैक प्रदान किये गये। मेधावी छात्र अनिरुद्ध ज्योति पुरस्कार पौड़ी के सिरौली गाँव के कितन राज को तथा भुवनेश्वरी सम्मान चम्याला की मोनिका पँवार को दिया गया। उक्त मेधावी छात्रों को प्रशस्ति पत्र व पच्चीस हजार रुपया प्रदान किये गये।
सम्मानित हुए कपिलेश भोज, यमुना राम, किशन सिंह मलड़ा द्वारा उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट का आभार व्यक्त करते हुए जनपक्षीय पत्रकारिता को ठोस रूप देने का आह्वान किया गया। प्रोफेसर शेखर पाठक द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड की जुझारू पत्रकारिता का संदर्भ देते हुए आज के उत्तराखंड के हालात पर निराशा प्रकट की गई। उन्होंने कहा कि हमारा देश और समाज मरा नहीं है, लेकिन बदलाव के लिए और अधिक संगठित प्रयास की आवश्यकता है। हमारे विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन बुनियादी चीजों पर हममें एकरूपता होनी चाहिए। युवाओं के लिए चुनौती है। पच्चीस प्रतिशत युवा गुस्से में दिखता है, मगर अन्य पिचहतर प्रतिशत चुप है। युवाओं में बेचैनी का न होना अच्छा नहीं है।
उमेश डोभाल ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंन्द पंत राजू ने कहा कि विगत पच्चीस वर्षों में उत्तराखंड में बहुत कुछ बदला है, मगर सकारात्मक रूप में नहीं। उत्तर प्रदेश विधान सभा में हमारे विधायक रिक्शा से आते-जाते थे। आज के विधायकों के आगे-पीछे दसियों लग्जरी गाड़ियों का काफिला चलता है। राज्य बनने के बाद सत्ता पत्रकारिता के खिलाफ रही है। इस अवसर पर अनेक प्रस्ताव भी पारित किए गए, जिन्हें ट्रस्ट द्वारा संवैधानिक पदों पर बैठे संबंधित नेताओं और अधिकारियों को भेजा जायेगा। प्रस्तावों में अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कथित वीआईपी को जाँच के दायरे में लाने और जाँच उच्च न्यायालय के जज की निगरानी में करने; नदियों से हो रहे अनियंत्रित खनन पर रोक लगाने; बदहाल शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देने; धार्मिक संस्थाओं के विषय पर तथा नजूल भूमि पर निवासरत लोगों को उनका हक देने तथा पुलिस द्वारा पत्रकारों को प्रताड़ित करने की नापाक कोशिश पर लगाम लगाने आदि प्रस्ताव मुख्य थे।
अल्मोड़ा के इस यादगार आयोजन को सफल बनाने के लिये डॉ. हयात सिंह रावत, प्रकाश पांडेय, डॉ. निर्मल जोशी, राजेंद्र रावत, सी. एस. द्विवेदी, रमेश जोशी, प्रेस क्लब के अध्यक्ष जगदीश जोशी तथा उपाध्यक्ष कमलेश कनवाल, सचिव अशोक पांडे, उप सचिव कपिल मल्होत्रा, मोहित अधिकारी, किशन जोशी, हरीश भंडारी, हिमांशु लटवाल, दयाकृष्ण कांडपाल, नसीम अहमद जोशी आदि का ट्रस्ट द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

































