राजीव लोचन साह
इस पखवाड़े उत्तराखंड में दो महत्वपूर्ण घटनायें हुईं। 26 जनवरी को कोटद्वार में बजरंग दल के कुछ लोग एक मुसलमान दुकानदार को हड़काने आये कि उसने अपनी दुकान का नाम ‘बाबा’ क्यों रखा है। कुछ महीने पहले ही उससे कह दिया गया था कि वह अपनी दुकान का नाम बदल दे। इन दंगाइयों की क्षुद्र जानकारी के अनुसार ‘बाबा’ शब्द पर हिन्दुओं का एकाधिकार है और किसी अन्य मतावलम्बी को ‘बाबा’ नाम का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने शायद शिरडी के साईंबाबा का नाम भी नहीं सुना होगा, जिनके मन्दिर अब देश भर में बन गये हैं। प्रदेश सरकार की शह पाये हुए ये गुण्डे ही अब यह तय करते हैं कि कोई क्या बेचे, क्या खाये, क्या नाम रखे और कौन किससे क्या बात करे। किसी वास्तविक या मनगढ़न्त अपराध में हिन्दू-मुस्लिम का कोण मिल जाये तो इनकी बाँछें खिल जाती हैं। इनके लिये संविधान और कानून निरर्थक हैं। ये अपने आप को कानून से ऊपर समझते हैं। पुलिस द्वारा इनके अपराधों को अनदेखा करने से इनके हौसले बढ़ते रहते हैं।
बहरहाल, उस रोज ये एक सहमे हुए बूढ़े मुसलमान को धमका ही रहे थे कि पास ही में जिम चलाने वाला एक युवक बीच में टपक पड़ा। उसने दुकानदार को बचाने की कोशिश की तो ये गुण्डे उससे भिड़ गये। उससे पूछा गया कि तुम कौन हो, तुम्हारा नाम क्या है तो उसने अकड़ के साथ अपना नाम दीपक मोहम्मद बतला दिया। जबकि उसका नाम दीपक कश्यप था। उस हट्टे-कट्टे नौजवान से पार पाने में बजरंगी असफल हुए तो भाग खड़े हुए। तीन-चार दिन बाद कोटद्वार के बाहर, हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून, से भी अराजक तत्व बुला कर भीड़ के साथ दीपक को सबक सिखाने की कोशिश की गयी। मगर इस बार पुलिस चैकन्नी थी और उसने दीपक को पिटने से बचा लिया। दोनों पक्षों को अलग कर मामला शान्त कर दिया गया। हालाँकि हुड़दंगियों को शहर में कार और बाईक रैली निकालने से नहीं रोका गया, बावजूद इसके कि इनमें कई गाड़ियाँ बगैर नम्बर की थीं। मगर अब तक कुछ बड़े अखबारों में कोटद्वार की घटना की खबर छप गयी थी। सोशल मीडिया में भी इस घटना पर खूब चर्चा होने लगी थी।
दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी। पुलिस ने हुड़दंगियों की ओर से दीपक मोहम्मद और विजय रावत के बाकायदा नाम से प्राथमिकी दर्ज की, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से 30-40 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी लिखी गयी। हालाँकि, पुलिस सबको जानती रही होगी और अब तो फैक्ट चैकिंग साईट ‘अल्ट न्यूज’ ने सोशल मीडिया से ही इस हुड़दंग में शामिल तीन-चार लोगों के नाम खोज निकाले हैं। लेकिन पुलिस उनके खिलाफ कुछ कार्रवाही करेगी, इसमें सन्देह है। 1 मई 2025 को नैनीताल में मुसलमानों की दुकानें तोड़ कर उनकी पिटाई करने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने मामला तब दर्ज किया, जब हाईकोर्ट ने उसे फटकार लगाई। मगर ‘बीस-पच्चीस अज्ञात लोगों’ को पुलिस सात महीने बाद भी ‘ज्ञात’ नहीं कर पायी है, जबकि नैनीताल में दर्जनों लोग उन्हें जानते हैं और यह घटना कोतवाली से महज बीस मीटर दूर हुई थी।
कोटद्वार की घटना की खबर देश भर में फैल गयी। संसद में इस पर चर्चा हुई और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दीपक मोहम्मद के साहस की प्रशंसा करते हुए एक ‘ट्वीट’ भी किया। देश भर से इतनी बड़ी संख्या में पत्रकार कोटद्वार आने लगे कि खिसियाहट और अपराधबोध से ग्रसित पुलिस ने मीडिया को कोटद्वार आने से ही रोकना शुरू कर दिया। ऐसी घटनाओं के भी खूब वीडियो वायरल हुए। अपने साम्प्रदायिक व्यवहार के लिये मशहूर कोटद्वार की विधायक और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी के स्पष्टीकरण देने वाले बयान भी चर्चित रहे। इधर हिन्दू रक्षा दल ने बेहद भड़काऊ अंदाज में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के हिन्दुत्ववादियों का आह्वान किया है कि 12 फरवरी को दीपक मोहम्मद को सबक सिखने के लिये कोटद्वार पहुँचें। देखें कोटद्वार पुलिस इन नफरतियों का खैर मकदम कैसे करती है। इससे पूर्व बिहार के एक मीडिया इंफ्लुएंसर ने दीपक की गर्दन काटने के लिये 2 लाख रुपये का ईनाम घोषित किया था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद उसने माफी माँग ली है।
कोटद्वार की बाजार में 40-50 कप चाय रोजाना बेच कर गुजर-बसर करने वाली बहादुर माँ के बेटे दीपक की शोहरत के इतनी तेजी से फैलने के पीछे कारण यह लगता है कि देश का आम जन धर्म के नाम पर की जाने वाली इस गुण्डागर्दी से अब आज़िज आ चुका है। मगर गुण्डे संगठित और सत्ता की शह पाये हुए हैं और सामान्य नागरिक बिखरा और डरा हुआ है। वह दीपक जैसे साहसी व्यक्ति में अपना अक्स देखता है और उस जैसा बनने की हसरत रखता है। मगर व्यवहार में कर कुछ नहीं पाता है। साम्प्रदायिकता के विष को समूल खत्म तभी किया जा सकता है, जब उसका संगठित विरोध हो। अपने परिवार, पास-पड़ोस, मोहल्ले और शहर में लगातार बातचीत कर लोगों के दिमाग साफ किये जायें, तभी यह जहर साफ किया जा सकता है। मगर ऐसा करने की कोशिश ही नहीं की जाती। भाजपा को लगता है कि यह जहर उसे केन्द्र और प्रदेश में एक और बार सत्ता में आने का मौका दे देगा। यह उसकी गलतफहमी है। अगला चुनाव वह जीत अवश्य सकती है, मगर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से नहीं बल्कि चुनाव जीतने के उसके उस कौशल से, जो उसने हाल के सालों में हासिल किया है। चुनाव आयोग को पालतू बना कर उसने स्पेशल इंटेंशिव रिवीजन जैसे करतब करवाये हैं, बूथ स्तरीय संगठन से फर्जी मतदान का तंत्र बनाया है और ई.वी.एम. में छेड़छाड़ जैसा आजमाया हुआ तरीका तो है ही। उसके गलत को सही साबित करने तथा झूठ को छिपाने के लिये शक्तिशाली गोदी मीडिया तथा आई.टी. सेल भी है। मगर पिछले तीन-चार सालों में भाजपा ने अपना जनाधार बहुत तेजी से खोया है। चुनावों में यदि पारदर्शिता और ईमानदारी रही तो उसके लिये कोई सम्भावना नहीं दिखती।
8 फरवरी को देहरादून में ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के द्वारा एक पंचायत आयोजित की गई। अभी दिसम्बर में अंकिता भंडारी हत्याकांड में तथाकथित ‘वी.आई.पी.’ का नाम उजागर होने के बाद प्रदेश भर में जनता का जो गुस्सा उमड़ा था, उससे आतंकित हो कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले यह वादा किया कि सरकार वही करेगी, जो अंकिता भंडारी के माता-पिता चाहेंगे। उसके बाद दबाव बढ़ने पर उन्होंने सी.बी.आई. जाँच की घोषणा कर दी। इस घोषणा से उन्हें जनता में फैले गुस्से को ठंडा करने में काफी हद तक सफलता मिल गई। मगर तथाकथित वी.आई.पी. को बचाने के लिये उन्होंने अत्यन्त चतुराई से अंकिता के माँ-बाप की तहरीर को किनारे करते हुए एक फर्जी पर्यावरणविद् अनिल जोशी की तहरीर को आधार बनाया। अंकिता के माता-पिता द्वारा अपनी लिखित तहरीर में स्पष्ट रूप से ‘सी.बी.आई. जाँच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में करवाने तथा वी.आई.पी. का पता लगाने’ की माँग थी।
जनता तो मुख्यमंत्री की सी.बी.आई. जाँच की घोषणा से काफी हद तक भ्रमित हो गयी, लेकिन प्रदेश के आन्दोलनकारी संगठन और विपक्षी दल इस बहकावे में नहीं आये। आन्दोलन के अगले चरण के रूप में महिला मंच की पहल पर यह ‘महापंचायत’ आयोजित की गयी थी। इसे विफल करने के लिये सरकार ने सभी आजमाये हुए तरीके अपनाये। परेड ग्राउण्ड, जहाँ यह महापंचायत होनी थी, में मुख्यमंत्री की पत्नी गीता धामी के एन.जी.ओ. की ओर से एक भव्य ‘उत्तरायणी कौथिग’ का आयोजन कर दिया गया, जिसका गोदी मीडिया ने इस तरह गुणगान किया मानो उत्तराखंड में सांस्कृतिक क्रांति हो गयी हो। इसके बरक्स महापंचायत सम्बन्धी खबरें यथासम्भव गायब कर दी गईं या इधर-उधर के कोनों में सिमटा दी गयीं। यह सब प्रपंच इसलिये रचा गया, ताकि संदेश यह जाये कि परेड ग्राउण्ड में तो एक दूसरा आयोजन हो रहा है। महापंचायत तो रद्द हो गयी है या स्थगित हो गयी है। महापंचायत के दिन जिन गाड़ियों में महिलाओं को देखा, उन्हें इधर-उधर भटका दिया गया।
इसके बावजूद महापंचायत सफल रही। परेड ग्राउण्ड में सरकार का कब्जा हो जाने के बाद उसे ग्राउण्ड के बाहर देहरादून क्लब के सामने सड़क पर आयोजित किया गया। प्रदेश के कोने-कोने से, यहाँ तक कि प्रदेश के बाहर से भी जन संगठनों का प्रतिनिधित्व रहा। स्वाभाविक रूप से महिलाओं की प्रमुख भागीदारी रही। विपक्षी दलों ने भी अपने प्रतिनिधि भेजे, हालाँकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और उत्तराखंड का प्रतिनिधि क्षेत्रीय दल माने जाने वाले उत्तराखंड क्रांति दल का सिर्फ मुँहजबानी जैसा समर्थन रहा। हरीश रावत को छोड़ कर इन दलों के बड़े नेता नदारद थे। रावत नपा-तुला बोले और काफी देर जनता के साथ जमीन पर बैठे रहे। सबसे महत्वपूर्ण उपस्थिति अंकिता के माता-पिता वीेरेन्द्र भंडारी और सोनी देवी की रही। उनकी मौजूदगी ने आयोजन को प्रामाणिकता और विश्वसनीयता प्रदान की। वीरेन्द्र भंडारी ने एक बार फिर खुल कर सी.बी.आई. जाँच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में किये जाने तथा वी.आई.पी. का पर्दाफाश करने की माँग की। मंच पर चुपचाप सिसकती सोनी देवी को देख कर दर्शकों के हृदय द्रवित हो गये। मजेदार बात यह है कि लगभग उसी समय बगल के भव्य मंच से मुख्यमंत्री की पत्नी भी घड़ियाली आँसू बहा रही थीं कि उनके पति ने जनता के लिये अपना जीवन इस तरह समर्पित कर दिया है कि उनके पास परिवार के लिये समय ही नहीं बचा है।
महापंचायत में पारित प्रस्तावों में अंकिता के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गये पत्र को ही सी.बी.आई. जाँच का आधार मानने; इस मामले से असम्बद्ध व्यक्ति अनिल प्रकाश जोशी की एफ.आई.आर. पर जाँच कराने के फैसले को खारिज करने; हत्याकांड की जाँच होने तक पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री के पद से हटने; वी.आई.पी. के तौर पर नामित दुष्यन्त कुमार गौतम और अजय कुमार को तत्काल जाँच के घेरे में लाये जाने और पन्द्रह दिन के भीतर पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर जाँच शुरू न किये जाने पर एक बड़ा जनान्दोलन शुरू किये जाने की बात की गई है।

































