इस्लाम हुसैन
मौजूदा दौर में सामाजिक कल्याण की योजनाओं, गांवों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दिए जाने वाले अनुदान, (उदाहरणार्थ मनरेगा) किसानों और कृषि में सहायता ब्याज सहायता/अनुदान, महिला सशक्तिकरण जैसे कार्यक्रमों की सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा आलोचना की जाती है। सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर दी पेंशन को तो अटल सरकार ने निगल ही लिया था।
गाहे-बगाहे मोदी सरकार के समर्थक दक्षिण पंथी कथित विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों द्वारा ऐसी सभी योजनाओं को बंद करने की मांग की जाती है। उनका हमेशा तर्क होता है कि यह योजनाएं जनता/करदाता पर बोझ हैं। इसी बात को लेकर बदरंगी टोले के लगुवे भगवे सोशल मीडिया में बकवास करते रहते हैं। इसके अलावा पश्चिमी देशों में रहकर सुख सुविधा का फायदा उठा रहा भारतीयों का एक हिस्सा ऐसी मांग उठाता रहता है।
पेंशन को भाजपा सरकार और उसके बंदरंगी संगठनों द्वारा आर्थिक बोझ माना जाता रहा है। लेकिन ज़रा आरबीआई के आंकड़ों के पर नज़र डालें तो पाएंगे कि मोदी सरकार के दौर में भारतीय कार्पोरेट्स यानि बड़े बड़े पूंजीपतियों ने भारतीय बैंकों को जमकर लूटा है, या सरकार ने लुठवाया है। इनमें भारतीय अर्थव्यवस्था के परजीवी गुजराती फर्जी उद्योगपतियों का बड़ा हाथ है।
रिजर्व बैंक के आंकडों के अनुसार;
01 अप्रैल, 2014 से 30 सितंबर, 2024 तक भारतीय बैंकों ने 16,61,310 करोड़ रुपये के क़र्ज़ को बट्टे-खाते में डाल दिया है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 12,08,621 करोड़ रुपये बट्टे-खाते में डाले, यह सारा पैसा भारतीय जनता की बचत और कमाई का था और सरकारी धन था। सहकारी बैंकों ने 6,020 करोड़ रुपये बट्टे-खाते में डाले, वो भी निम्न मध्यम वर्ग की बचत की लूट हुई,..निजी क्षेत्र के बैंकों ने 4,46,669 करोड़ रुपये बट्टे खाते में गए। 30 सितंबर, 2024 तक के आंकड़े बताते हैं कि इस राशि में से सिर्फ 2,69,795 करोड़ रुपये (16 प्रतिशत) ही वसूले जा सके हैं।
यह समझ लेना चाहिए कि गरीबों और मिडिल क्लास को दी सहायता हो या पेंशन यह केवल उनका हक बल्कि कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी भी है। अरे बड़े कैनवेस में देखें तो यह अर्थव्यवस्था को चलाने का इंजन भी है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के चलते अभी तक जितनी भी (मुल्कों की और वक्त वक्त पर) अर्थव्यवस्थाएं डूबी हैं उसको ऐसी ही कल्याणकारी योजनाओं ने उबारा है।
यह समझना और समझाना बहुत ज़रूरी के भारत जैसे समाजवादी और कल्याणकारी लोकतांत्रिक मुल्क में, सरकार अभिभावक या सरपरस्त की भूमिका से कैसे बच सकती है। तो इसलिए भारतीय जनता पार्टी, उनकी सरकारों और उनके बंदरंगी संगठनों के इस समाज-विरोधी प्रोपगंडे का मुकाबला होते रहना चाहिए।
फोटो : इंटरनेट से साभार

































