बृजमोहन जोशी
प्रसिद्ध रंगकर्मी, मूर्तिकार, चित्रकार शास्त्रीय संगीत और लोक संस्कृति के विविध आयामों के ज्ञाता थे विश्वंभर नाथ साह ‘सखा’ दाज्यू।
आपका जन्म अल्मोड़ा में हुआ और आपका लालन पालन शिक्षा आदि अपने नाना नानी के घर कैलाखान नैनीताल में हुई। पठन पाठन के बाद कुछ समय के लिए आपने नैनीताल में एक निजी स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाऐं दी, कुछ समय बाद आपने वह नौकरी छोड़ दी। कुछ समय आप नैनीताल छावनी परिषद के सभासद भी रहे। आप श्री मां नयना देवी मन्दिर नैनीताल अमर उदय ट्रस्ट के न्यासी भी थे। नैनीताल में होने वाले सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, और राजनीतिक कार्यक्रमों में आपकी भागीदारी हमेशा बनी रहती थी। आप वर्षों तक कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्यों में शामिल रहे।
आप कुमाऊंनी बैठकिय (नागर होली) होली के मर्मज्ञ के साथ साथ एक मंजे हुए होल्यार भी थे।
आप वर्ष 1916 से पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल द्वारा आयोजित भारतीय नव वर्ष मिलन समारोह में गिरीश तिवारी गिर्दा के साथ-साथ सक्रिय रूप से मेरे साथ जुड़े रहे। श्री मां नयना देवी मंदिर मल्लीताल नैनीताल अमर उदय ट्रस्ट का सलाहकार सदस्य होने के नाते मुझे भी आपके साथ श्री मां नयना देवी मंदिर प्रांगण में स्थित दशावतार भवन में आपके साथ आपसे बहुत कुछ सीखने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ। मैं अकसर आपके आवास पर आपसे व गिर्दा से लोक संस्कृति के विविध आयामों पर जानकारी प्राप्त करता रहता था। के.के.साह जी के आवास में होने वाली होली कि बैठकों में आपकी गायकी को कौन भूल सकता है।
मुझे आज भी याद है श्री मां नयना देवी जन्म शताब्दी समारोह हेतु एक आरती की धुन जिसे आपने मेरे सामने न जाने कितनी बार गुनगुनाया आपके आवास पर मैं न जाने कितनी देर आपके साथ बैठा रहता था,आप ने उस आरती को बहुत ही लगन के साथ लयबद्ध किया आज भी मेरे कानों में आपकी वो लयकारी गूंजती रहती है। आज बड़े भारी मन से हम सभी आपकी तीसरी पुण्यतिथि पर आपको अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

































