डॉ. अतुल शर्मा
लम्बा समय है जो मंटू के साथ गहरे और सहज ढंग से जिया मैंने। जगमोहन जोशी ‘मंटू’ आज युगमंच नैनीताल पेज से जानकारी मिली कि वो हम सबको छोड़ गया। पर वह सब पल मुझे याद आ रहे हैं जो जीवंत हैं। क्रिएटिव इंसान। प्रतिभा सम्पन्न। उत्तराखंड आन्दोलन में जो कैसेट तैयार हुआ उसमें मेरा लिखा जनगीत मंटू ने ही गाया था। संगीत बद्ध किया था। लड़के लेंगे भिड़ के लेंगे छीन के लेंगे उत्तराखंड। पूरे आन्दोलन में यह जन गीत गूंजा। साथ में गायिका श्रीमती रेखा धस्माना व अन्य रहे। (नन्दा देवी कला संगम द्वारा तैयार)। वह इतिहास बो गया।
मेरा पारिवारिक दोस्त। नैनीताल में इजा व पूरे परिवार के साथ खूब ठहाके लगाये। रवि साथ रहता। युगमंच के नुक्कड़ नाटक समारोह में तीन चार दिनों का साथ बहुत गहरे तक जोड़ता। भाई ज़हूर आलम होते संयोजक। गीतों की महफ़िल रात रात भर चलतीं। मेरे कई गीतों की धुन बनायी मंटू ने। एन एस डी द्वारा देहरादून में नाटक हुए दिनेश खन्ना के निर्देशन में। उसमें निर्मल वर्मा की कहानी पर मेरे रंग गीतों को दिनेश कृष्ण के साथ संवारा।
उत्तराखंड आन्दोलन में ही प्रभात फेरियों में साथ रहे ढपली लेकर देहरादून में। तभी नैनीताल से कदम मिला के चल कैसेट में जनकवियों के गीत गाये। धुनें बनायी। इनमें ज़हूर आलम, बल्ली सिह चीमा, बृजमोहन माहेश्वर के साथ मेरा लिखा जन गीत भी शामिल था। इसे युगमंच व जन संस्कृति मंच ने तैयार किया था।
मंटू का एक अलग ही अंदाज रहा है। नयापन। अनूठा। बेमिसाल। वे बहुत विनम्र रहे। यूँ तो नैनीताल में अपना पारिवारिक प्रोविजन स्टोर चलाते रहे। कुछ वर्ष देहरादून मे कर्नल ब्राउन स्कूल में भी संगीत सिखाया। रवि से पता चला कि उन्हें कैंसर हो गया है। वह भी गले मे संभवतः।
आज यह सूचना मिली कि 28 अप्रैल 2025 की सुबह 4—5 बजे के आसपास अस्पताल उनका निधन हो गया।
मैंने भाई राजीव लोचन साह जी से फोन पर पूछा फिर उनके भतीजे संगीतकार रवि जोशी से भी फोन पर पूछा पर जगमोहन जोशी मंटू के निधन का समाचार सच निकला। हर जगह अपनी संगीतमय ज़िम्मेदारी निभाकर वे निकल जाते जैसे उन्होंने कुछ किया ही न हो। प्रचार से दूर। वे हमेशा हमारी स्मृति में रहेंगे और उनका कार्य हमें उनके साथ होने का अहसास दिलाता रहेगा।
नैनीताल समाचार परिवार की श्रृद्धांजलि।

































