राजीव लोचन साह
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की निरंकुशता लगातार बढ़ रही है, मगर उनकी दादागिरी का कोई जवाब किसी के पास नहीं है। उनके द्वारा लगाये गये अनाप-शनाप टैरिफ से विश्व व्यापार में जो असंतुलन पैदा हुआ, उसका समाधान अब तक नहीं खोजा जा सका है। टैरिफ लगाना तो अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, मगर अब वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर निकल कर अब वह पूरी दुनिया को आँखें दिखाने लगा है। कनाडा को संयुक्त राज्य अमेरिका का एक हिस्सा मानने और ग्रीनलैंड पर अपना हक जताने की बात ट्रम्प राष्ट्रपति बनने से पहले भी जताते रहे थे। मगर इधर उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण कर सबको हैरत में डाल दिया। इस वर्ष की शुरूआत में अमेरिकी सेनाओं ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर जमीनी और हवाई हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर अमेरिका ले आये। अमेरिका का कहना है कि मादुरो के शासन में वेनेजुएला ड्रग तस्करी और आतंकवाद को बढ़ावा देकर अमेरिका की सुरक्षा के लिये खतरा पैदा कर रहा है। लेकिन न दुनिया का कोई देश इस बात को मानने को तैयार है और न ही वेनेजुएला की जनता। सभी का कहना है कि इस बहाने अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडार और अन्य ऊर्जा संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है। मादुरो के स्थान पर राष्ट्राध्यक्ष बनीं उप राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि उनकी सरकार मादुरो की नीतियों पर चलती रहेगी और अमेरिका की धमकियों के खिलाफ राजनैतिक संघर्ष जारी रखेगी। दुनिया भर में एक संप्रभु देश पर इस बेशर्म हमले की निन्दा की जा रही है। अमेरिका के भीतर भी इस कार्रवाही का कड़ा विरोध किया जा रहा है। अमेरिका द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को हटाने के पहले भी दर्जनों उदाहरण हैं। सबसे ज्वलन्त उदाहरण ईराक का है, जहाँ सामूहिक नरसंहार के हथियार होने का दावा कर अमेरिका ने राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटा कर फाँसी दे डाली। बाद में ईराक में कोई भी हथियार नहीं मिले।

































