केशव भट्ट
बागेश्वर दौरे पर पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस बार पत्रकारों के उटपटांग सवालों से दूर ही रहना भला समझा. उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) का जिन्न बाहर आने के बाद से वो बहुत असहज हो गए हैं. हों भी क्यो नहीं.. करे कोई.. भरे कोई..
पुराने वाले चालाक—धूर्त हाई ब्लड प्रेसर वालों के वजाय धामीजी बहुत सरल स्वभाव वाले हुवे. सीएम बनने के बाद कई बार जब वो बागेश्वर आए तो खुद ही पत्रकारों से रूबरू हो लिया करते थे. तब तक मीठी राजनीति ही उनका चेहरा हुवा. वो तो अचानक ही उन्हें कड़वी—मीठी की झोल वाली राजनीति से रूबरू होना पड़ गया है तो नाव डूब—उतरा रही है. हर जगह एक ही सवाल उन्हें झेलना पड़ रहा है.. ‘भ्रष्ट—अ—चारियों को कब लटकाओगे..? जिस सीबीआई को कभी आपकी पार्टी ‘तोता’ कहती थी उससे जांच कराने में डर किस बात का..? वैसे आपके अपने भी तो अंदर किए गए ठैरे..!’ हर जगह वो कहते फिर रहे हैं कि, ‘जांच बिठा दी गई है भ्रष्टाचारियों को बख्शा नही जाएगा.’ लेकिन..! इस बीच जांच ज्यों—ज्यों आगे बड़ सफेदपोशों के दामन तक पहुचने लगी है वो अशांत से हो चले हैं. अब मीडिया से दूरी बना उन्होंने अपनी और पार्टी की भलाई समझ मौन धारण कर लिया है. इस बार बागेश्वर में उन्होंने हर जगह एकतरफा अपने मन की ही बात कहने में ही आनंद लिया.
बागेश्वर दौरे में कोट भ्रामरी मंदिर में मेले के उद्घाटन के बाद वो रात में बैजनाथ टीआरसी में ही रूके और सुबह कुछ साथियों के साथ वो मार्निंग वॉक पर निकल गए. न कोई सुरक्षा का तामझाम और न ही भीड़ का कारवां. रास्ते में हर किसी से ग्रामीण शैली में नमस्कार का आदान—प्रदान कर वो आम आदमी बन बैजनाथ मंदिर परिसर में चहल—कदमी कर आए. वीआईपी को ऐसा ही होना चाहिए. दिवंगत मोहन पर्रिकर जब गोवा के मुख्यमंत्री थे तब वो भी वहां बड़ी ही सादगी से अपनी जिंदगी का आनंद लेते थे. हर किसी के लिए वो सुलभ रहे थे. केन्द्र ने जब उन्हें गोवा से बुला रक्षा मंत्री के पद में धकेला तो कुछ वर्षों बाद वो वहां के वीवीआईपी कल्चर से परेशान हो वापस गोवा भाग खड़े हुवे.
उत्तराखंड में भी वीवीआईपी कल्चर के पांव बहुत गहरे तक चले गए हैं. इस वीवीआईपी कल्चर ने जनता और उनकी जरूरतों को जानवरों से भी ज्यादा गया—गुजरा कर दिया है. अब देखना है कि धामीजी भ्रष्टाचार रूपी इस बवंडर को कैसे साफ कर हांसिये पर धकेल दी गई जनता के साथ खड़े होते हैं. वैसे..! अभी बीते कुछ दिनों की ही बात है, ब्राजील में एक मछुआरा रोमुआल्डे जब मछली पकड़ने बीच समुद्र में गया था तो उसकी नाव डूबने लगी. नाव में उसने मछलियों को रखने वाला फ्रीजर रखा था तो वो उसी में चढ़ गया और इसी फ्रीजर के सहारे रोमुआल्डे मछुआरे ने 450 किमी का समुद्री सफर तय कर अपनी जान बचा ली.
उम्मीद है कि ब्राजील के रोमुआल्डे मछुआरे के तरह धामीजी भी अपनी कड़वी राजनीति की नौका से किनारा पा आम जन के साथ खड़े हो ही लेंगे. लेकिन…! आज के राजनीतिक माहौल को देख लगता नहीं की जनता का ये सपना कभी सच होगा. पार्टी के ईशारे पर एक सफेदपोश के कुर्सी से उतरने के बाद दूसरा झक्क सफेदपोश नए सपने से जनता को बरगलाने आ ही जाने वाला हुवा.


































One Comment
बटरोही
नैनीताल समाचार के कमेंट मैं बहुत ध्यान से लागतार पढ़ता हूँ और ज्यादातर वह सामाजिक-राजनीतिक समस्याओं की तह में जाने की कोशिश करते हैं. जरूर, हर बार एक चिढ़ और व्यंग्य का भाव वहाँ मौजूद रहता है. सभी कुछ अनर्गल और निरर्थक तो नहीं हो रहा है भाई. बेहतर पक्ष भी रेखांकित किये जाने चाहिए. और किसी एक राजनीतिक दल पर ही फोकस करना भी ठीक नहीं लगता. सभी हमारे भाई-बन्धु हैं और सभी की निष्ठाएँ कमोबेश एक जैसी हैं. नैनीताल समाचार और उसके संपादक के पास वह निष्पक्ष दृष्टि है, मुझे लगता है उसका इस्तेमाल वह कम करते हैं. केवल संपादकीय ही नहीं, चयनित समाचारों में भी यह दृष्टि झलकनी चाहिए.