राजीव लोचन साह
कश्मीर के पहलगाम में पाक समर्थित आतंकवादियों द्वारा निर्दोष पर्यटकों की हत्या से पाकिस्तान ने अपने ही पाँवों पर कुल्हाड़ी मार ली है। पर्यटकों की हत्या से पूर्व पहले उनका धर्म पूछने के पीछे उसका खेल यह रहा होगा कि इससे पिछले कुछ साल से भारत में कमजोर हो रहा हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द पूरी तरह नष्ट हो जायेगा, बांग्ला देश जैसी स्थितियाँ पैदा हो जायेंगी और एक तरह का गृह युद्ध खड़ा हो जायेगा। मगर अपने इस षड़यंत्र में वे सफल नहीं हुए। हालाँकि कई जगह धर्मान्ध हिन्दुओं ने मुसलमानों पर हमले किये, एकाध जगह पर मुसलमानों की हत्या भी हुई और कश्मीरी छात्रों को धमका कर अपने शिक्षा संस्थान छोड़ कर वापस घर जाने को मजबूर किया गया, मगर कुल मिला कर मुसलमानों और विशेष रूप से कश्मीरियों ने ही इस कुचक्र की हवा निकाल दी। कश्मीर में स्वतःस्फूर्त बन्द हुआ, बड़े-बड़े जलूस निकले, मस्जिदों में प्रार्थनायें की गयीं और अब तो ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें हिन्दुत्ववादी भाजपा के कश्मीर घूमने गये नेता अपनी जान बचाने के लिये कश्मीरियों के प्रति खुल कर कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हैं। कश्मीर में एक तबका है, जिसका रुझान पाकिस्तान की ओर है। मगर इस घटना के बाद उसकी जड़ें पूरी तरह उखड़ गयी हैं। भाजपा को इस घटना से यह लाभ तो हुआ है कि पिछले लोकसभा चुनाव से पहले उससे दूर छिटके कुछ अन्ध राष्ट्रवादी वापस उसकी शरण में लौटते दिखाई दिये हैं। गोदी मीडिया ने देश का ध्यान पूरी तरह भटका कर उसे इस इल्जाम से बचा लिया है कि इस घटना के पीछे बहुत बड़ी सुरक्षा चूक है, जिसकी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है। इस घटना के बाद सर्वदलीय बैठक से मुँह चुरा कर बिहार से गीदड़भभकी देने वाले प्रधानमंत्री के व्यवहार को भी गोदी मीडिया ने आलोचनाओं से बचा लिया। मगर कुल मिला कर इस महादेश की समृद्ध लोकतांत्रिक और धर्म निरपेक्ष परम्परायें ही थीं, जिनके प्रति निष्ठा दिखा कर जनता ने अपनी एकजुटता से इस हमले को नाकाम कर दिया।

































