साभार: गोविंद बल्लभ पंत:एक जीवनी
-शम्भु प्रसाद शाह
भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर तो नित चर्चा होती है मगर उनके पारिवारिक जीवन के अनेक पहलू अनछुए रह जाते हैं…एक कुशल राजनेता होने के साथ-साथ पंत जी एक ज़िम्मेदार पिता भी थे…उनकी तीन संतानें थीं..सबसे बड़ी पुत्री लक्ष्मी (लच्छी),पुत्र कृष्ण चन्द्र (राजा) तथा सबसे छोटी पुत्री पुष्पा (पुसी)….
उथल पुथल भरे राजनैतिक जीवन में पंत जी के लिये एक ठौर पर टिक पाना संभव नहीं था…महीनों जेल में रहना पड़ता था…अत: उन्होंने तीनों बच्चों को शिक्षा के वास्ते अपने परिजनों की देखरेख में नैनीताल में रख दिया था जहां तल्लीताल नया बाज़ार में उनका एक मकान था (जो शायद अब एक होटल में तब्दील हो चुका है) …
बच्चों से संपर्क का माध्यम केवल पत्राचार ही था…1942 के भारत छोड़ो के सिलसिले में अधिकांश कांग्रेसी नेताओं की भांति पंत जी को भी लम्बे समय कारागार में रहना पड़ा….अहमदनगर जेल से नियमित रूप से दो बड़े बच्चों को लम्बे लम्बे पत्र लिखते जो स्वाभाविक है कि ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा सेंसर होकर नैनीताल पहुंचते…
इन पत्रों में सामान्यत: गंभीर मुद्रा रखने वाले पंत जी का मुलायम ह्रदय झलकता है…बच्चों के प्रति वात्सल्य,उनकी पढ़ाई तथा उन्हें अच्छे संस्कार देने की चिंता…कहीं कहीं पर बाल सुलभ जिज्ञासा तो कहीं विनोद का पुट मिलता है…और कभी खीझ और आक्रोश भी….
प्रथम द्रष्टया इन पत्रों में जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी पुत्री को लिखे गये पत्रों,जो तब तक एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हो चुके थे,का आभास होता है …एक पत्र में स्वयं पंत जी ने भी नेहरू के पत्रों का उल्लेख किया है…परंतु ये समानता महज़ सतही है…नेहरू के पत्र उत्कृष्ट अंग्रेज़ी में हैं और उनके जीवन दर्शन तथा वैश्विक द्रष्टि के द्योतक हैं..
पंत जी के पास नेहरू जैसी लेखन शैली नहीं थी….वे ज़मीन से जुड़े सांसारिक व्यक्ति थे…उनके पत्र साधारण हिन्दी में हैं तथा रोज़ाना के सरोकारों के नज़दीक हैं…
प्रस्तुत हैं अहमदनगर जेल से लिखे गये कुछ पत्रों के संपादित अंश इस महान विभूति को श्रद्धांजलि स्वरूप :
9 फरवरी,1943 को बसंतोत्सव के अवसर पर लिखा पत्र..
प्रिय लक्ष्मी और राजा,
आज बसन्त पंचमी है ….चारों ओर नवजीवन के चिन्ह दिखाई देने लगे हैं । फूल खिलने लगे हैं और चिड़ियां चहचहा रही हैं….बंगाल में इस अवसर पर बुद्धि की देवी सरस्वती की आराधना की जाती है और उनकी प्रतिमा के साथ शोभा-यात्रा निकाली जाती है…..बसन्त के संबंध में एक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कविता इस प्रकार है :
Spring,the sweet spring,is the
Year’s pleasant king;
Then blooms each thing,then
Maids dance in the ring.
Cold doth not sting,
the pretty birds do sing.
बताओ तुम्हें कविता कैसी लगी ?
बाबू का प्यार और आशीर्वाद
9 अगस्त,1943
प्रिय लक्ष्मी,राजा,
रिमझिम..रिमझिम…इन दिनों वर्षा की बूंदों का संगीत निरंतर सुनाई दे रहा होगा …शायद इस लगातार वर्षा से तुम ऊब गये होगे किन्तु इस मौसम का भी अपना आकर्षण है…
इस मौसम में तुम्हें कोई छुट्टी नहीं मिलती अन्यथा मैं तुम्हें किसी निकटवर्ती गांव में घूमने की सलाह देता जहां तुम प्रकृति को उसके उन्मुक्त रूप में देख सकते….
बाबू के प्यार और आशीर्वाद सहित
9 नवंबर,1943
प्रिय लक्ष्मी,राजा,
क्या तुमने उन पक्षियों की सूची बनायी है जिन्हें तुम जानते हो ? …यह विषय बहुत दिलचस्प है….
मेरे कमरे में गौरैया का एक प्यारा जोड़ा है…ये दोनों निरंतर मेरे साथ रहते हैं….वर्षा के आरंभ में इन्होंने बड़ी मेहनत से दीवार में एक घोंसला बनाया है….मादा अब तक दो बार अंडे दे चुकी है और उनका परिवार निरन्तर बढ़ता जा रहा है…प्रातः से ही उनकी चहचहाहट का मधुर संगीत प्रारंभ हो जाता है….
बाबू के आशीर्वाद और स्नेह सहित
26 अप्रैल,1944
प्रिय लक्ष्मी,राजा,
अकस्मात इतनी अधिक छुट्टियों का तुमने क्या उपयोग किया है ?…अब तक तुम जवाहरलाल जी की आत्मकथा पढ़ चुके होगे । क्या तुमने उनकी ‘विश्व इतिहास की एक झलक ‘नामक दूसरी पुस्तक देखी है ?यह पुस्तक उनकी पुत्री को लिखे गये पत्रों का वृहद संकलन है …अत्यंत मनोरंजक और ज्ञानवर्धक है….यदि तुम यह पुस्तक पढ़ने तो तुम्हें हमारे देश के शानदार अतीत का पता चलेगा….
तुम्हें अपने स्कूल में यह पुस्तक प्राप्त नहीं हो सकेगी …तुम्हें अन्य स्थानों से इसे प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए जिससे हमारे प्राचीन संतों,महात्माओं,राजनीतिज्ञों द्वारा अपनी भावी संतति के छोड़ी गई धरोहर से तुम कुछ प्रेरणा प्राप्त कर सको ।
बाबू के आशीर्वाद और स्नेह सहित
24 जून,1944
प्रिय लक्ष्मी ,राजा…
तुम्हारी छमाही परीक्षाएं समाप्त हो गयी होंगी । परीक्षाओं की समाप्ति के बाद तुम्हें कुछ नयी पुस्तकें पढ़ने के लिये समय मिलेगा।
(Louisa M.) Alcott की किताबें बहुत अच्छी हैं ।
क्या तुमने उसकी Little Men पढ़ी है ? मुझे यह जानकर खुशी हुई कि तुम Tom Brown’s School Days पढ़ चुके हो….Jules Verne की पुस्तकें काफ़ी मनोरंजक हैं । वे तुम्हें स्कूल (सेंट जोसेफ्स् स्कूल,नैनीताल) की लाइब्रेरी में प्राप्त हो जायेंगी ।
पहले तुम प्रतिदिन सायंकाल हनुमान चालीसा पढ़ा करते थे। मैं आशा करता हूं अब भी करते होगे ….जो ईश्वर पर विश्वास करता है वह कभी दुखी नहीं रह सकता और उसे किसी से डरने की आवश्यकता नहीं…
बाबू के आशीर्वाद और स्नेह सहित
(बच्चों से लम्बे समय से दूर रहने और नियमित रूप से समाचार ना मिलने से पिता का चिंतित होना और अपने रोष को प्रकट करना स्वाभाविक है ):
23 सितंबर,1944
प्रिय लक्ष्मी,राजा,
एक और सप्ताह आकर चला गया लेकिन मुझे तुम्हारे पत्र अभी तक नहीं मिले ….मुझे तुमसे एक सप्ताह में कम से कम एक पत्र पाने की आशा है…कभी कभी मैं बेचैन हो उठता हूं…क्या पत्र लिखने में तुम्हें इतना प्रयत्न करना पड़ता है कि सप्ताह में एक भी पत्र ना भेज सको ?
तुम्हारे पास यदि समय की कमी हो तो केवल इतना लिखना ही काफ़ी है कि तुम सब कुशलपूर्वक हो और इतना लिखकर पोस्टकार्ड भेजने में तुम्हें कुछ मिनटों से अधिक समय नहीं लगेगा ।
बाबू के आशीर्वाद और स्नेह सहित
(लेकिन पिता आख़िर कब तक बच्चों से नाराज़ रह सकता है ? हां चिंता और नसीहत सदैव रहती ):
3 मार्च,1945
प्रिय लक्ष्मी,राजा ,
कल मुझे चन्द्र दत्त ( पंत जी की भांजी के पति तथा स्वतंत्रता के बाद नैनीताल से प्रथम सांसद चन्द्र दत्त पाण्डे ) का पत्र प्राप्त हुआ।
तुम सब एक दूसरे के साथ होली खेलने में बहुत खुश हुए होगे…मैं समझता हूं कि नैनीताल का मौसम ऐसा नहीं है कि पानी में भीगा जा सके,चाहे वह सादा हो या रंगीन…तुम्हारी पार्टी वही पुरानी रही होगी…दावत कैसी रही ? आशा है तुमने अपने साथियों को अपनी उपस्थिति में किन्हीं अश्लील शब्दों का उपयोग नहीं करने दिया होगा । मैं समझता हूं कि इस भद्दी प्रथा की सभी को निन्दा करनी चाहिए..
बाबू के स्नेह एवं आशीर्वाद सहित…

































