नवीन बिष्ट आंखों में काला चश्मा, कान में मोबाइल लगाए, करीने से की गई केष सज्जा, काली पैन्ट अथवा जीन्स और सफेद या आफव्हाइट कलर की शर्ट पहने अलमस्त चाल में बतियाते अच्छी कदकाठी याने कि गबरू नौ... Read more
-इन्द्रेश मैखुरी 11 जनवरी 1948 को कीर्तिनगर में कामरेड नागेन्द्र सकलानी और कामरेड मोलू भरदारी की शहादत, टिहरी में राजशाही के खात्मे के परवाने पर निर्णायक दस्तखत सिद्ध हुई. यह वही राजशाही थी... Read more
डा अतुल शर्मा महान पर्यावरण विद् श्री सुन्दर लाल बहुगुणा 95 बरस के हो गये हैं । यह एक ओर उनको मंगलकामना देने का तो है ही साथ ही उस पूरी यात्रा को गहन तरह से सोचने का भी है जो अमिट है । विश... Read more
हेमंत बिष्ट अनिल भोज जी का इस संसार को छोड़कर जाना, कई क्षेत्रों में शून्यता भर गया। एक भौतिक विज्ञान प्रवक्ता के रूप में सुदीर्घ सेवा करते हुए वह साहित्य, संस्कृति और कलाओं के प्रति समर्पित... Read more
मिथिलेश कुमार सिंह ‘खबर सिर्फ इतनी नहीं है कि 1948 में टिहरी गढ़वाल के काफलपानी गांव में वह पैदा हुआ था, पढ़ाई- लिखाई देहरादून में हुई, नौकरी उसने देश के मुख्तलिफ शहरों में की, वह कवि... Read more
प्रियदर्शन ‘पहाड़ों की यातनाएं हमारे पीछे हैं, मैदानों की हमारे आगे.’ जर्मन कवि बर्तोल्त ब्रेख्त की यह काव्य पंक्ति मंगलेश डबराल को बहुत प्रिय थी और अक्सर वे इसे दोहराया करते थे.... Read more
चारु तिवारी बहुत विचलित करने वाली खबर आ रही है। हमारे अग्रज, प्रिय कवि, जनसरोकारों के लिये प्रतिबद्ध मंगलेश डबराल जी जिंदगी की जंग हार गये हैं। पिछले दिनों वे बीमार हुये तो लगातार हालत बिगड... Read more
देवेन मेवाड़ी आज पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय साठ वर्ष का हो गया है। वे सन् साठ और सत्तर के दिन थे। पंतनगर के स्वर्णिम दिन। हमें इस बात पर बहुत गर्व होता था कि हम देश के प्रथम और शीर्ष कृषि विश्... Read more
इन्द्रेश मैखुरी (नोट : यह लेख 2017 में लिखा गया था, श्रीयंत्र टापू गोलीकांड को याद करते हुए,इसे पुनः प्रस्तुत किया जा रहा है) 10 नवम्बर 1995 को श्रीनगर(गढ़वाल) के श्रीयंत्र टापू पर दो आन्दोलन... Read more































