मिथिलेश कुमार सिंह ‘खबर सिर्फ इतनी नहीं है कि 1948 में टिहरी गढ़वाल के काफलपानी गांव में वह पैदा हुआ था, पढ़ाई- लिखाई देहरादून में हुई, नौकरी उसने देश के मुख्तलिफ शहरों में की, वह कवि... Read more
प्रियदर्शन ‘पहाड़ों की यातनाएं हमारे पीछे हैं, मैदानों की हमारे आगे.’ जर्मन कवि बर्तोल्त ब्रेख्त की यह काव्य पंक्ति मंगलेश डबराल को बहुत प्रिय थी और अक्सर वे इसे दोहराया करते थे.... Read more
चारु तिवारी बहुत विचलित करने वाली खबर आ रही है। हमारे अग्रज, प्रिय कवि, जनसरोकारों के लिये प्रतिबद्ध मंगलेश डबराल जी जिंदगी की जंग हार गये हैं। पिछले दिनों वे बीमार हुये तो लगातार हालत बिगड... Read more
इस्लाम हुसैन वो दौर, जब दो आढ़तिए कपड़े की थैली में हाथ डालकर उंगलियों के इशारे से गुपचुप किसान की फसल की कीमत तय कर लेते थे। नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों में सबसे बड़ी आशंका मंडी समितियो... Read more
विवेकानंद माथने केंद्र सरकार भारत की खेती को पूरी तरह से कारपोरेट्स के हवाले करने का काम कर रही है। उसके लिये नीतियां और कानून में बदलाव किये जा रहे है। कॉन्ट्रैक्ट खेती के द्वारा कृषि उत्पा... Read more
बसन्त पाण्डे खास तौर से भौगोलिक विषमताओं वाले यहां के पर्वतीय क्षेत्रों में मातृ एवं शिशुओं की देखभाल के सरकारी इंतजाम अति दयनीय दशा में हैं।पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों के हालात बद से भी बदतर... Read more
रिया कक्षा – 10 नानकमत्ता पब्लिक स्कूल उसका कहना था कि वो अब बड़ी हो गई है। खेलने-कूदने का समय नहीं बचा है! योगिता की ही तरह तो होता है हम सबके साथ। बड़े होते-होते इतने बड़े हो जाते... Read more
केशव भटृ जीन डेलहाय ने यूं तो बेल्जियम में जन्म लिया लेकिन उसकी आत्मा हमेशा हिमालय की वादियों में विचरती है साल 2014 के सितंबर महीने में एक शाम जब वह बागेश्वर पहुंचा तोए छह फीट से ज्यादा लम... Read more
अरुण कुकसाल मैंने जानना चाहा कि यह पाठ किस बारे में है तो उसने बताया कि वह अल्लाह से दुआ मांगने की कहानी है। बगैर किसी निश्चित प्रतिक्रिया की अपेक्षा किए मैंने पूछाए अगर तुम्हें कहीं अल्लाह... Read more































