रमदा उत्तराखण्ड के एक पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आ जाने के साथ ही इस सच्चाई को स्वीकारना आवश्यक है कि आजादी के तत्काल बाद से देश-प्रदेश के स्तर पर सामाजिक, राजनैतिक-आर्थिक मामलों, प्... Read more
पुरुषोत्तम असनोड़ा उत्तरांचल राज्य का गठन क्या जनाकांक्षाओं की पूर्ति है ? सपनों में भी उत्तराखण्ड पुकार रहे बच्चों, घसियारों के लोकगीतों में पैंठ चुके भावों और तथा आम उत्तराखण्डी की आशा-अभिल... Read more
रमदा सवाल है कि इस समय 1994 के जन सैलाब के असल हिस्सेदार कहाँ हैं ? अनिश्चितताजनित संज्ञाहीनता में या चिन्तन में (ईश्वर करे कि चिन्तन में हों)? वे अखबारों की ताजा सुर्खियों में नहीं हैं... Read more
आशा जोशी समय हर घाव को नहीं मिटाता, पर जीने की नई वजह ज़रूर दे देता है…… ‘झंझावात’ पुस्तक वरिष्ठ लेखक व स्वतंत्र पत्रकार हरीश जोशी जी एवं उनके दोनों बच्चों अचला और अन... Read more
पूरन बिष्ट बताते है कि मूल नक्षत्रों में पैदा होने वाले बच्चों का माँ-बाप परित्याग कर दिया करते थे। बाद में जब अघविश्वासों में वर्णित ‘अशुभ’ को ‘शुभ’ में बदलने के शॉर्टकट अपनाये जाने... Read more
चंदन घुघत्याल स्कूल के Founders’ Day के बाद पहली बार दीवाली की पाँच दिन की छुट्टियाँ मिलीं। मन में एक ही ललक थी कि इस बार माँ के साथ गाँव में दीवाली मनाऊँगा। वह बचपन की सोंधी यादें, माँ के ह... Read more
शीशपाल गुसाईं दिल्ली—भारत की राजधानी—आज अपने ही धुएँ में घुट रही है। यह वही शहर है जिसे कभी “भारत का चेहरा” कहा जाता था, लेकिन अब वही शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित महानगरों में गिना जाता है।... Read more
नज़ीर अकबराबादी हमें अदाएँ दिवाली की ज़ोर भाती हैं हमें अदाएँ दिवाली की ज़ोर भाती हैं । कि लाखों झमकें हरएक घर में जगमगाती हैं ।। चिराग जलते हैं और लौएँ झिलमिलाती हैं । मकां-मकां में बहारें... Read more
कार्यालय प्रतिनिधि देहरादून से अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले के विरोध में , आज देहरादून में गांधी पार्क मुख्य द्वार पर (सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में नव गठित Sonam Vangchuk Rihai Manc... Read more
राजीव लोचन साह 6 अक्टूबर को भारत की न्यायपालिका के इतिहास में एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, जब एक व्यक्ति ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश की। 71 वर्षीय एडव... Read more































