संजीव भगत
बाघ ने फिर ज्योली गांव में एक महिला हेमा पांडे (50) को अपना शिकार बना डाला । पिछले एक पखवाड़े में यह तीसरी घटना है जिसमे महिला को बाघ ने निवाला बनाया है। इससे पहले भीमताल व जंतवाल गांव में बाघ ने महिलाओं को अपना निशाना बनाया ।
आज जिस ज्योली गांव के जंगल में महिला को निशाना बनाया वो गांव हल्द्वानी ने मात्र पन्द्रह किलोमीटर दूर है । खेती के हिसाब से ये गांव बहुत समृद्ध है । और गांव के कई परिवार शहद के कारोबार से जुड़े है। ज्योली गांव भीमताल विकाम खण्ड व कालाढूंगी विधान सभा के अंतर्गत आता है।
एक तरह से देखा जाय तो भीमताल ,जंतवाल गांव व ज्योली के जंगलों की सीमा आपस में मिलती है और ये सभी गांव 10-15 किमी के दायरे में हैं। जिससे ऐसा लगता है कि एक ही बाघ ने इन सभी महिलाओं को शिकार बनाया है। इस बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग के पास न कोई ठोस जानकारी है न रणनीति है।
आजकल जिन गांवों में बाघ के हमले हो रहे हैं वो शहरों के नजदीकी गांव हैं तथा वहां अधिकांश घर आबाद हैं। पलायन न के बराबर है। जब पूर्ण रूप से आबाद गांवो में जंगली जानवर इस कदर हमलावर है तो उन वीरान गांव में जंगली जानवरों का कैसा आतंक होगा जहां गांव में कुछ ही लोग बचे है। हम जंगल के किनारे रहते हैं। यहाँ अधिकांश जंगली जानवर नजर आते रहते हैं। वे हमारी कड़ी निगरानी करते हैं। सामान्यतः हमला नहीं करते लेकिन आसान मौका भी नहीं छोड़ते ।
जंगलों में जंगली जानवरों की भरमार हो चुकी है। शायद जंगल की खाद्य श्रृंखला में कुछ परिवर्तन हो चुका है। जिसे समाज और सरकार समझ नहीं पा रही है । सरकार के पास मुआवजा देने के अलावा कोई समाधान नहीं है। आज के समाज ने जंगल से नाता तोड़ लिया है । जंगली जानवरों की प्रवृति भी बदल रही है। बाघ आसान शिकार तलाशते है महिलाऐं सबसे आसान शिकार है। उसके बाद गाय व बछड़े का नंबर आता है । हम इसी तरह डर -डर कर जीने के लिए अभिशप्त हैं।

































