सतीश जोशी
नैनीताल समाचार के पटांगण में होली बैठकों की यादें मन मस्तिष्क में तरोताजा है। पंडित तारादत्त काण्डपाल जी भांग घोटने (ठंडई) का सारा सामान हल्द्वानी से एकत्रित कर लाये हैं, जिसको बनाने की प्रक्रिया एक दिन पूर्व ही शुरू कर दी गयी है। प्रातः से ही अशोक होटल के कर्मचारी पटांगण में दरी-कालीन बिछा कर आलू-चटनी आदि बनाने में व्यस्त हो गये हैं।
ग्यारह-बारह बजे तक धीरे-धीरे होलियार समाचार की सीढ़ी उतरना आरम्भ कर देते हैं और सुनहरी धूप में कालीन पर पलथी मार कर बैठ जाते हैं। वो देखो धरमवीर परमार जी पगड़ी पहन कर हाथ में छड़ी लिये स्वांग की मुद्रा में सीढ़ी उतर रहे हैं। उनके पीछे वाचस्पति ड्यूँडी, हेम सनवाल, प्रमोद साह, के. के. साह जी, सखा दाज्यू तथा शहर के तमाम बुजुर्ग होल्यार आ रहे हैं। गिर्दा की आँखे अनूप साह को तलाश रहीं है- गिर्दा को अनूप साह का न दिखना अखरता है। चुपके से मुझे बुलाकर कहता, यार भुला, एक कष्ट कर दे। वो रात भर होली गायन में रमा होगा। अभी बिस्तर में ही पसरा होगा। तू जाकर उसे बुला लाना।
गिर्दा की बात सच ही थी। मैं अनूपदा के घर पर उपस्थित हूँ। उसे उठाता हूँ- वो उठ कर एक बीड़ी सुलगाते हुए अनमने मन से पूछता है, ‘‘किलै सब ए गईं ?’’ सुबह चार बजे होली महफिल से फारिग हुआ अनूपदा मेरे साथ चल पड़ता।
समाचार का पटांगण खचाखच भर गया है। कोई सीढ़ियों पर बैठा है तो कोई अपने टिकने का ठिकाना ढूँढ रहा है। श्रोताओं को अबीर गुलाल लगाया जाता और सम्मानित होलियारों को सफेद टोपी पहनाई जाती।
वाचस्पति ड्यँूडी तबला कस रहे हैं और हारमोनियम पकड़ कर अनूप दा मीठे गले से स्वर तलाशते हुए गाते-
‘‘अब के रूठे श्याम को,
होली में मना लाऊंगी
श्री वृन्दावन की कुंज गलिन से
मैं तो मना लाऊंगी।’’
धीरे-धीरे महफिल इस कदर जमती कि श्रोता मुग्ध हो जाते। अपने फन में माहिर बुजुर्ग होल्यार सधे गले से खूब होलियाँ सुनाते। इसी बीच शहर के किसी बुजुर्ग होल्यार को सम्मानित किये जाने की परम्परा भी चल पड़ी थी।
पिछले लगभग पाँच दशकों से तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद नैनीताल समाचार को नियमित रूप से निकालने तथा होली बैठकी की परम्परा को बनाये रखने वाले संपादक राजीव लोचन साह जी जी रौं लाख सौ बरीस। नैनीताल समाचार के सम्पादक मण्डल में हरीश पंत, पवन राकेश, विनोद पांडे, दिनेश उपाध्याय, विनीता यशस्वी जी रौं लाख सौ बरीस।
समाचार परिवार के अरुण रौतेला, प्रताप सिंह खाती, पूर्व स्तम्भ महेश जोशी जी रौं लाख सौ बरीस। समाचार में नियमित लिखने वाले लेखक और पाठक जी रौं लाख सौ बरीस। समाचार के पटांगण में बरस के बरस होली गायन करने वे होलियार, जो अब हमारे बीच नहीं रहे, उनकी स्मृतियाँ जी रौं लाख सौ बरीस।
सोशल मीडिया पर कुछ दिन पूर्व बनारस बनारस पुस्तक मेले में ‘‘देश हमारा कहाँ जा रहा, कहो नरेन्दर मजा आ रहा’ गाने वाले जेन-जी (छात्र-छात्रायें) जी रौं लाख सौ बरीस। उत्तराखंड में फैल रही घृणा के अधियारे में जुगनू की तरह चमकते कोटद्वार के दीपक जी रौं लाख सौ बरीस। अंकिता हत्याकांड में वी.आई.पी. की पहचान उजागर करने और उत्तराखंड की बहन-बेटियों का जीवन सुरक्षित करने की मुहिम में लगा उत्तराखंड महिला मंच जी रौ लाख सौ बरीस। उत्तराखंड की स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर आन्दोलन करने वाले चैखुटिया के तथा पेपर लीक और बेरोजगारी के सवाल पर देहरादून में आन्दोलन करने वाले सभी नौजवान जी रौं लाख सौ बरीस। लगभग छः माह से राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद वैज्ञानिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जी रौं लाख सौ बरीस। बगैर मुकदमे के पाँच साल से जेल में बन्द उमर खालिद, शरजील इमाम और उनके साथी जी रौं लाख सौ बरीस। ‘पहाड़’, ‘उत्तरा’ और ‘युुगमंच’ के समस्त जन जी रांै लाख सौ बरील। पिछले एक साल में हमसे जुदा हुए कामरेड राजा बहुगुणा, डाॅ. जी.पी.साह और जगमोहन जोशी ‘मंटू’ की स्मृति जी रौ लाख सौ बरीस।

































