जगदीश जोशी
सुप्रसिद्ध कथाकार व पत्रकार नवीन जोशी ने कहा है कि उत्तराखंड में सत्तर के दशक में जनसंघर्षों का यादगार दौर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी अगुवाई करने वालों में डा शमशेर सिंह बिष्ट जैसे लोग शामिल थे। उन्होंने वर्तमान हालात में भी ऐसी ही पहल की दरकार है लेकिन सवाल यह है कि उस दौर में अंकुरित किए गए संघर्ष के बीज आखिर कब अंकुरित होंगे। जोशी ने कहा कि वर्तमान में संघर्षशील ताकतों को एक मंच पर आकर समाज को सही दिशा में ले जाने की ठोस पहल करनी होगी। जोशी जननायक व समाजसेवी डा शमशेर सिंह बिष्ट की सप्तम पुण्यतिथि पर सोमवार को अल्मोड़ा से सेवाय होटल में आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता विचार व्यक्त कर रहे थे। इसका विषय शमशेर सिंह बिष्ट का समय व आज का परिदृश्य रखा गया था।संगोष्ठी की शुभारंभ डा बिष्ट के चित्र पर कार्यक्रम के अध्यक्ष विधायक मनोज तिवारी निवर्तमान पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी आदि के पुष्पांजलि के साथ हुई।
जोशी ने अपने संबोधन शुरू करते हुए कहा कि किशोरावस्था में लगभग हर व्यक्ति विद्रोही प्रवृत्ति का होता है लेकिन बहुत कम लोग इस विद्रोह के वैचारिक स्तर तक ले जाते हैं। ऐसे लोगों से समाज सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद भी करता है। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में कुछ ऐसा दौर सामने आया जब वैचारिक परिवर्तन की बयार बही थी। हालांकि के उस दौर में मजबूत हुई क्षेत्रीय ताकत विखर कर रह गई हैं। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में उस दौर में छोड़े गए बीजों के अंकुरित होने का सही समय है हालांकि इसका इंतजार है।
उन्होंने सत्तर दशक में अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को रखा। कहा कि जब डा शमशेर की पीढ़ी संघर्ष कर रही थी तब अमेरिका वियतनाम व म्यामार आदि की घटनाओं का जिक्र किया। इसके खिलाफ भारत सहित दुनिया में विरोध की आवाज उठी थी लेकिन वर्तमान में फिलीस्तीन उक्रेन आदि के हालात पर प्रतिक्रिया नहीं हो रही है जोकि सोचनीय विषय है। उत्तराखंड में अंकिता जैसे कई मुद्दों में विरोध अंजाम तक नहीं पहुंचा है। जोशी ने कहा कि जल जंगल जमीन के मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं। इनकी लूट के खिलाफ वह गुस्सा नहीं दिखाई देता है। युवा पीढ़ी की दिशा भटक रही है। शोध बता रहे हैं कि युवाओं में समाज में दक्षिणपंथी रुझान बढ़ रहा है। हालात प्रतिरोध की आवाज को कमजोर कर रही है।
उन्होंने कहा 2007 से आए स्मार्ट फोन के बाद सोशल मीडिया लोगों की मानसिकता को बदलने में भूमिका निभा रहा है। शोध के आधार पर 2014 के आम चुनाव में 160 नतीजों पर इसका असर देखा गया है। हाल में नेपाल की घटना इसका ताजा तरीन उदाहरण है। वहीं दिशा हीन बगावत के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने पत्रकारिता व मीडिया के हालात पर भी रोशनी डाली। कहा कि यह अब ओपिनियन मेकर नहीं थोपर हो कर रह गया है। डा शमशेर सिंह बिष्ट के दौर में वनों के खिलाफ संघर्ष नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन जैसे जनसंघर्ष से जुड़ी पहल को याद किया और कहा कि एक बार फिर से जनहित में प्रतिरोध का दिया जलना चाहिए। इसके लिए जनसंपर्क तेज करना होगा और मीडिया साक्षरता की मुहिम छेड़नी होगी। संविधान की समझ कायम कर हम समाज को सही रास्ता दिखा सकते हैं। इसके लिए समान विचार धारा वाली संघर्षशील ताकतों को एक मंच पर आना होगा। जोशी ने कहा कि यही पहल सही मायने में डा शमशेर सिंह बिष्ट को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने लोगों को वरिष्ठ पत्रकार हरजिंदर की चुनाव के छल -प्रपंच- मतदाताओं की सोच बदलने का कारोबार व अखिल रंजन फेक न्यूज, मीडिया और लोकतंत्र को पढ़ने का सुझाव दिया। जोशी ने कवि विरेन डंगवाल की उम्मीदों से भरी कविता के साथ अपनी बात को विराम दिया।
संगोष्ठी में उलोवा के एड जगत रौतेला ने डा बिष्ट के दौर के जनसंघर्षों की कुछ बानगी प्रस्तुत की। उन्होंने मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार नवीन जोशी का परिचय भी प्रस्तुत किया। पहले उपपा अध्यक्ष पीसी तिवारी ने डा बिष्ट के साथ संघर्ष के दौर की याद ताजा करते हुए उस दौर के उल्लेखनीय कार्यों पर प्रकाश डाला। वर्तमान हालात में आम जन से मुखर होने की अपील की। विधायक मनोज तिवारी व निर्वतमान पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने डा बिष्ट के समाज के लिए दिए योगदान को याद किया और कहा कि जनसंघर्षों के इतिहास में उनको हमेशा याद किया जाएगा। उलोवा अध्यक्ष राजीव लोचन साह ने कहा वर्तमान परिस्थिति में लोगों को दमनकारी नीतियों के खिलाफ आगे आना होगा। डा बिष्ट की धर्म पत्नी रेवती बिष्ट ने भी विचार रखे।
संयोजक अजय मित्र बिष्ट ने सभी का आभार व्यक्त किया। वरिष्ठ रंगकर्मी पत्रकार नवीन बिष्ट भाष्कर भौर्याल ईश्वरी दत्त जोशी आदि ने गिर्दा के जनगीत प्रस्तुत किए। संचालन उलोवा के दयाकृष्ण कांडपाल ने किया। कार्यक्रम में बार अध्यक्ष महेश परिहार पूर्व अध्यक्ष शेखर लखचौरा एड जमन सिंह बिष्ट चारू तिवारी आनंद सिंह बगडवाल डा वसुधा पंत चंद्रमणि भट्ट उमेश तिवारी विश्वास प्रदीप पांडे एड भावना जोशी पत्रकार जगदीश जोशी रमेश जोशी आदि मौजूद रहे।

































