विनीता यशस्वी
18 सितंबर 2025 को अंकिता भंडारी हत्याकांड की तीसरी बरसी पर उत्तराखंड के जन संगठनों ने नैनीताल में जुलूस निकालकर सभा की तथा महिलाओं के साथ बढ़ रहे अपराधों के लिए चिंता जताई।
इस कार्यक्रम की शुरूआत रामलीला स्टेज मल्लीताल से जनगीत ’औरतें उठी नहीं तो जुल्म बढ़ता जाएगा’ से हुई, जिसे सतीश धौलाखंडी और त्रिलोचन भट्ट ने गाया। राजीव लोचन साह के शुरुआती संबोधन के बाद सभी लोग जुलूस के रूप में गांधी मूर्ति पर तल्लीताल डांठ आये। पूरे रास्ते में जनगीत गाए गए और नारे लगाए गए। तल्लीताल डांठ में पहुँचकर एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने अंकिता और अन्य पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय की मांग की। कार्यक्रम का संचालन शीला रजवार ने किया।
इस कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने एकजुट होकर महिला हिंसा, प्रशासनिक लापरवाही और सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई तथा महिलाओं को सुरक्षा सम्मान व बराबरी के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
श्रीनगर से आये मुकेश सेमवाल ने अंकिता के माता-पिता की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि अंकिता की माँ अस्पताल में भर्ती हैं, जिस कारण उनके पिता कार्यक्रम में नहीं आ सके। अंकिता के घर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका घर श्रीनगर के पास है, जो छोटा और जर्जर है और बारिश में उसकी छत टपकती है। उन्होंने बताया कि अंकिता ने नदी से पत्थर लाकर अपने घर में रखा था ताकि वह भविष्य में अपना घर बना सके, लेकिन उसकी हत्या ने उसके सपनों को चकनाचूर कर दिया। अंकिता अपनी पहली तनख्वाह के बाद नौकरी छोड़ना चाहती थी परन्तु उसे पहली तनख्वाह मिलती इससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। मुकेश सेमवाल ने यह भी कहा कि प्रशासन ने कोर्ट आने-जाने के लिए अंकिता के परिवार को कोई सुविधा नहीं दी, पर आज जनता उसके परिवार के साथ लगातार खड़े रहे।
महिला मंच से कमला पंत ने अपने वक्तव्य में महिला हिंसा को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंकिता के लिए न्याय की यह छोटी जीत एकजुटता के कारण संभव हुई, लेकिन यह लड़ाई सभी पीड़ित महिलाओं के लिए जारी रहनी चाहिए। उत्तराखंड आंदोलन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर जैसे कष्ट सहे गए थे, लेकिन आज भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शोषण बढ़ रहा है। उन्होंने उत्तराखंड को ‘ऐशगाह’ न बनने देने की अपील की और साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई की भविष्य में हमें किसी और अंकिता या किरन या नन्ही परी जैसी बच्वियों के लिये सड़क पर न उतरना पड़े।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन मेहरा ने प्रशासन और शासन पर सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री और रेणु बिष्ट से पूछताछ की मांग की तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपराधियों को राहत देने के आरोप लगाए। उन्होंने उत्तराखंड का महिला हिंसा के मामले में पहले स्थान पर होने में चिंता जताई।
रामनगर से आये मुनीष कुमार ने अपने वक्तव्य में अंकिता हत्याकांड और नेपाल में हुए आंदोलन का जिक्र किया। उन्होंने न्यायपालिका में अन्याय होने का आरोप लगाया और कहा कि अंकिता को अभी तक पूरा न्याय नहीं मिला है। उन्होंने उत्तराखंड आंदोलन की एकजुटता को याद करते हुए आज भी उसी भावना के साथ एकजुट होने की आवश्यकता बताई। भाकपा माले से के.के. बोरा ने अपने संबोधन में दुनिया की आधी आबादी (महिलाओं) को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया तथा पितृसत्तात्मक व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
धीरज ने सरकार पर अपराधियों को खुली छूट देने का आरोप लगाया और उत्तराखंड सरकार पर पर तीन साल में अंकिता को पूरा न्याय न दिलाने पाने पर सवाल उठाया। उनका मानना है कि एक तरफ सरकार महिलाओं को आरक्षण दे रही है और दूसरी ओर उनके खिलाफ बढ़ रहे अपराध को राकने में नाकामयाब रही हैं।
परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने बार-बार होने वाली घटनाओं को व्यवस्था की खामी बताया। उन्होंने स्कूल बंद होने और लड़कियों को रोजगार न मिलने की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा ही रहा तो भविष्य में महिलाओं को राजगार मिल पाना बहुत मुश्किल हो जायेगा जिससे उन्हें फिर से गुलामी का जीवन जीने को मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने मानना है कि अंकिता को एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक सामाजिक मुद्दे के रूप में देखे जाने की जरूरत है और साथ ही इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक परिवर्तन लाये बिना स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
हाइकोर्ट उत्तराखंड के अधिवक्ता नवनीश नेगी ने अंकिता के परिवार की कमजोर आर्थिक और सामाजिक स्थिति का जिक्र करते हुए सरकार पर केस दबाने का आरोप लगाया। उनका मानना है कि सामाजिक दबाव और आंदोलन के कारण कुछ हद तक अंकिता को न्याय मिला। उन्होंने कहा कि इस समय हाईकोर्ट में केस चलने के कारण और अधिक एकजुटता की आवश्यकता है। उन्होंने न्यायपालिका से कहा कि वह अपराधियों को अपराधी की तरह देखें, न कि ‘मंत्री के बच्चों’ की तरह।
वन पंचायत संगठन, भवाली से आये तरुण जोशी ने अपने वक्तव्य में अंकिता सहित सभी पीड़ित बच्चियों के लिए न्याय की मांग की। उन्होंने उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और महिला हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के लिए बड़े आंदोलन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस समय पूरे उत्तराखंड में लगभग हर जगह किसी न किसी समस्या को लेकर आंदालन चल रहे हैं। हमें भविष्य में मिलकर इस लड़ाइयों को लड़ना होगा ताकि हम समाधान तक पहुँच सकें।
रचनात्मक महिला मंच सल्ट से आयी पूजा रावत ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की और अंकिता और अन्य बच्चियों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, हल्द्वानी से आयी रजनी जोशी ने उत्तराखंड में बिगड़ते हालात पर चिंता व्यक्त की और कहा कि अब महिला हिंसा के विरोध में सड़कों पर उतरने की जरूरत है। देहरादून से वरुण चंदोला ने जनता की आवाज से सरकार को जगाने की बात पर जोर दिया। उन्होंने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निरंतर संघर्ष की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम के दौरान वरुण ने ढपली भी बजाई।
महिला कांग्रेस प्रकोष्ठ, नैनीताल की जिला अध्यक्ष खष्टी बिष्ट ने कहा कि इस लड़ाई को हमने सड़क से सदन तक लड़ा है। किरण के मामले में अपराधियों के छूटने पर उन्होंने सवाल उठाया। ‘वीआईपी कौन था ?’ का सवाल करते हुए उन्होंन कहा कि अंकिता को अभी अधूरा न्याय ही मिला है। उन्होंने उत्तराखंड को देवभूमि कहलाने के बावजूद महिला अपराधों में शीर्ष पर होने पर चिंता व्यक्त की।
सभा के अंत में नैनीताल पीपल्स फोरम के कैलाश जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने जसपुर में हाल ही में बच्ची के साथ हुई र्दुव्यवहार की घटना का जिक्र किया और जिला पंचायत चुनावों में हुई गुंडागर्दी की निंदा की। साथ ही, उन्होंने एकजुटता के साथ महिला हिंसा के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की अपील की।
कार्यक्रम का समापन ‘नफस नफस, कदम कदम’ के जनगीत के साथ हुआ। सभी वक्ताओं ने एकजुट होकर अंकिता, कशिश, प्रीति और किरण नेगी के लिए न्याय की मांग को और तेज करने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में शहर के तमाम बुद्विजीवियों, संस्कृतिकर्मियों, जनसंगठनों, नगरपालिका अध्यक्ष, नैनीताल व राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सेदारी की व महिला हिंसा के खिलाफ एकजुट रहने की बात कही। कार्यक्रम में हिस्सेदारी के लिये अल्मोड़ा, रामनगर, हल्द्वानी, उधमसिंह नगर, खटीमा, सल्ट, भवाली, रामगढ़, देहरादून, कोटद्वार, श्रीनगर, चमोली से भी लोग पहँुचे।
कल जब नैनीताल में यह कार्यक्रम हो रहा था उस समय हल्द्वानी में भी जनता ने ‘नन्हीं परी हत्याकांड’ के आरोपियों के सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किये जाने पर आक्रोश व्यक्त किया। बुद्धपार्क में जनसभा की और सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय तक जुलूस निकालकर अपना मांगपत्र सौंपा। इससे पहले पिथारागढ़ में भी जनसैलाब आक्रोशित होकर सड़क पर उतरा था। यहाँ पर यह बताया जाना जरूरी है कि 11 साल पहले नन्ही परी अपने परिवार के साथ हल्द्वानी में एक शादी समारोह में शामिल होने आयी थी। रात में उसका अपहरण कर दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गयी थी।

































