विनोद बडोनी
किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और उसके नायकों से होती है। “हमारी विरासत एवं विभूतियाँ” इसी दृष्टि से तैयार की गई पुस्तक है जो उत्तराखंड राज्य की कक्षा 6, 7 एवं 8 के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और गौरवपूर्ण परम्पराओं से परिचित कराने का माध्यम है। यह पुस्तक–श्रृंखला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर, महान विभूतियों, आंदोलनों और लोकजीवन से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसमें कहानियों, प्रसंगों और जीवन–वृत्तांतों के माध्यम से न केवल राज्य के इतिहास और संस्कृति को प्रस्तुत किया गया है बल्कि उस गौरवशाली परम्परा को भी उकेरा गया है जो पीढ़ी दर पीढ़ी उत्तराखण्ड की पहचान रही है।
पुस्तक में पौराणिक कथाओं (पंचतंत्र, लोककथाएँ), लोकनृत्य, लोकपर्व, भोजन, गीत–संगीत से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों, आंदोलनकारियों और आधुनिक युग के समाज सुधारकों तक सभी का जीवन परिचय संकलित किया गया है। बच्चों को केवल घटनाएँ ही नहीं बल्कि उनसे जुड़ी प्रेरणाएँ और मूल्य भी सहज भाषा में पढ़ने को मिलते हैं। भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है, जिससे यह किताब बच्चों के साथ–साथ आम पाठक के लिए भी रोचक बन जाती है। प्रत्येक अध्याय छोटा–सा लेकिन सटीक है, जिसमें जानकारी के साथ–साथ प्रेरणा भी निहित है। अनुक्रमणिका देखकर ही स्पष्ट हो जाता है कि लेखकों ने अलग–अलग दृष्टिकोणों से विषयों का चयन किया है—कहीं वीरता की कहानियाँ हैं, कहीं बलिदान की, तो कहीं लोकसंस्कृति और परंपराओं की झलक।
पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें स्थानीयता पर विशेष बल दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसमें लोककला, लोकसंस्कृति, आंदोलनों, साहित्य और महान विभूतियों का संतुलित समावेश है। प्रत्येक लेख केवल जानकारी नहीं देता बल्कि बच्चों और आम व्यक्ति में प्रेरणा भी जगाता है। अध्यायों का क्रमबद्ध संयोजन और संतुलित भाषा–शैली इसे पाठ्यपुस्तक के साथ–साथ सामान्य पठन–पाठन हेतु भी उपयोगी बनाती है।
श्रीराम तपस्थली देवप्रयाग, उत्तराखंड राज्य आंदोलन, खटीमा एवं मसूरी गोलीकांड, विक्टोरिया क्रॉस गब्बर सिंह नेगी, जनकवि गिर्दा, उत्तराखंड में राम के धाम, गौचर मेला, उत्तराखंड के गाँधी इन्द्रमणि बडोनी, पंच प्रयाग, मुजफ्फरनगर और श्रीयंत्र टापू की घटना, कवि कन्हैयालाल डंडरियाल, विश्व धरोहर रम्माण, टिंचरी माई,वृक्षों की रक्षक गौरा देवी, लोकपर्व इगास, समाज शिल्पी ख़ुशीराम आर्य, वीरांगना तीलू रौतेली, वीर योद्धा माधो सिंह भंडारी, बचन के पक्के तोता सिंह रांगड़, अमर शहीद श्रीदेव सुमन, कारगिल में किया कमाल, साझे चूल्हे की कहानी, लोकगायिका कबूतरी देवी, उत्तराखंडी फिल्मों का सफऱ, नंदा राजजात, हमारे लोक वाद्य, सी डी एस बिपिन रावत, मुंशी प्रसाद टम्टा – समाज सुधारक और राजनेता , लोकसंगीत के मर्मज्ञ केशव अनुरागी तथा हमारे व्यंजन सहित कुल 79 अध्याय तीनों कक्षाओं में बांटे गये हैं l
हालाँकि कुछ अध्याय अत्यधिक संक्षिप्त हैं, जिनमें पाठक और गहराई से जानना चाहेंगे । भविष्य में इस पर ध्यान दिया जा सकता है। यदि चित्रों, मानचित्रों और प्रसंगों को और समृद्ध किया जाता तो किताब और अधिक रोचक बन सकती है ।
“हमारी विरासत एवं विभूतियाँ” केवल एक पाठ्यपुस्तक नहीं बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने का माध्यम है। यह किताब बच्चों में राज्य के इतिहास और संस्कृति के प्रति गौरव जगाती है और सामान्य पाठक के लिए भी पठनीय है। सरल भाषा, रोचक प्रसंग और प्रेरक जीवन–कथाएँ इसे एक उपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक बनाती हैं। ऐसी पुस्तकें न केवल विद्यार्थियों बल्कि हर पाठक को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं और समाज में सांस्कृतिक चेतना का संचार करती हैं।
इन पुस्तकों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए हम राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक बंदना गर्ब्याल जी , अपर निदेशक और अन्य अधिकारियों सहित समस्त टीम को बहुत-बहुत बधाइयां एवं साधुवाद देते हैं और साथ ही पुस्तक लेखन, संपादन के समन्वयक श्री सुनील भट्ट प्रवक्ता एवं श्री गोपाल सिंह घुघत्याल प्रवक्ता एवं समस्त रचनाकार मंडल, संपादक मंडल को बहुत-बहुत बधाइयां देते हैं। हम यह विश्वास भी रखते हैं कि आने वाले समय में भी आपका संस्थान हमारे उत्तराखंड की भव्य और दिव्य सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संरचना, भौगोलिक संरचना, पर्यावरणीय संरचना ,ऐतिहासिक संरचना को भी विस्तृत रूप में बच्चों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे.
पुस्तक का नाम: हमारी विरासत एवं विभूतियाँ (कक्षा 6, 7 और 8)
प्रकाशक: एस.सी.ई.आर.टी., उत्तराखण्ड
प्रकाशन वर्ष: 2025–26

































