इस अंक के साथ ‘नैनीताल समाचार’ अपने जीवन के 48 वर्ष पूरे कर 49वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। अगला वर्ष, यानी 15 अगस्त 2026 से शुरू होने वाला वर्ष हमारा ‘स्वर्ण जयन्ती’ वर्ष होगा। स्वर्ण जयन्ती वर्ष !! विश्वास नहीं होता। कितना रोमांचक लगता है ? एक्रोफोबिया जैसा, मानो आप एक बहुत ऊँची, सपाट चट्टान से नीचे झाँक रहे हों और आपके पाँव काँपने लगे हों। कैसे पहुँच चुके होगे हम यहाँ तक ?
इस ऐतिहासिक पड़ाव पर हम क्या सोच रहे हैं, यह जानना जितना जरूरी है, उससे ज्यादा जरूरी यह जानना है कि हमारे पाठक और सहयोगी हमारे बारे में क्या सोच रहे हैं। काल के प्रवाह में अनेक लोग बिछुड़ गये हैं। शुरू में उँगलियों में गिने जाने लायक लोग थे। दो-तीन साल के भीतर सैकड़ों हो गये। जैसा इस तरह के सफर में होता है, कुछ जुड़ते रहे, तो कुछ छूटते भी रहे। रिश्ते एक अजूबा होते हैं। वे टूटते नहीं भी तो भी धीरे-धीरे कहीं खो जाते हैं। यह महसूस तब होता है, जब अचानक कोई आपके सामने आ खड़ा होता है और आप सोचते हैं कि अरे, यह तो बहुत करीब था, कहाँ खो गया होगा। रिश्ता तो हमने कभी तोड़ा ही नहीं था।
नैनीताल समाचार के साथ यह बार-बार होता है। कोई पुराना पाठक या सहयोगी मिलता है, मगर फिलहाल वह समाचार परिवार से छूट गया होता है। हालाँकि उसके पास समाचार की तमाम यादें होती हैं। वह पुनः उस रिश्ते को शुरू करना चाहता है, करता भी है। कुछ लोगों को मृत्यु ने छीना तो कुछ को परिस्थितियों ने। मगर अनेक हैं, जो लगातार हमारे साथ चलते आये हैं। ऐसे तमाम लेखकों, पाठकों, चाहे वे थोड़े समय के लिये सहयात्री रहे हों या लम्बे समय के लिये, के अनुभव महत्वपूर्ण हैं। वे यदि वस्तुनिष्ठ ढंग से समाचार के बारे में अपनी राय, संस्मरण हमें लिख कर दें, यह बतायें कि स्वर्ण जयन्ती वर्ष के रूप में हमें क्या करना चाहिये तो हम उसे नैनीताल समाचार के पृष्ठों पर भी साझा करेंगे।
यह ‘उत्तराखंड राज्य’ का भी रजत जयन्ती वर्ष है। उत्तराखंड की रजत जयन्ती ?? कैसा राज्य माँगा था, कैसा मिला और कैसा वह इन पच्चीस सालों में हो गया है। अपने प्रकाशन के इन 48 वर्षों में हमने बार-बार उत्तराखंड राज्य के बारे में प्रकाशित किया है, बल्कि सच कहा जाये तो उत्तराखंड के अलावा हमने छापा भी क्या ? शुरूआती दिनों में हम उत्तराखंड राज्य को लेकर आशंकित थे, उसकी तमाम जरूरत होने के बावजूद। यह बात भी हमारे जेहन में थी कि उत्तराखंड राज्य की माँग का एक ऐतिहासिक आधार रहा है। ऐसे कुछ पुराने लेख और सम्पादकीय हमने इस अंक में दिये हैं और उनके साथ ही ऐसे कुछ नये लेख भी। इसके साथ हमने आज के उत्तराखंड की पड़ताल करने की कोशिश की है। हालाँकि वह अभी अधूरी है। यह कोशिश आगामी अंकों में जारी रहेगी।
विशेषांक होने के कारण इसमें बहुत सी सामग्री आने से रह गयी है, विशेषकर ताजा घटनाओं के बारे में रपटें। विकास के गलत माॅडल पर चले जाने और जलवायु परिवर्तन के कारण इस बरसात में हम भयावह आपदायें झेल रहे हैं। नैनीताल जिला पंचायत के चुनाव में पंचायत सदस्यों के अपहरण के रूप में जबर्दस्त गुण्डागर्दी देखने को मिली तो पौड़ी में एक धंधेबाज भाजपा नेता की गिरफ्त में आये एक युवक द्वारा गोली मार कर आत्महत्या का मामला सामने आया। सरकार के संरक्षण में प्रदेश में नफरत फैलाने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसी अनेकों घटनायें है, जिन पर इस अंक में कुछ नहीं आ पाया है।
नैनीताल समाचार के जनमबार और भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम अपने पाठकों, लेखकों, सहयोगियों, विज्ञापनदाताओं और सभी हितैषियों को हार्दिक शुभकामनायें देते हैं।

































