शम्भु राणा
स्मिता कर्नाटक की संस्मरणात्मक पुस्तक ‘डी. एस. बी के गलियारों से’ अभी हाल ही में छप कर आई है.इससे पहले 2023 में उनकी एक और किताब ( शायद पहली) ‘देहरी के पार’ आई थी, जिसमें दो सहेलियों द्वारा कोविड के फौरन बाद अकेले की गई यात्रा के प्रसंग हैं। ‘डी. एस. बी. के गलियारों से’ के केंद्र में 80-90 के दरमियान का नैनीताल शहर है। बचपन, स्कूल, घर- मोहल्ला और दोस्तों की यादें हैं। सीमित आबादी का कम भीड़-भाड़, फ्लैट्स की रौनकें, सिनेमा के प्रति तब के बच्चों-युवाओं का आकर्षण, ताल, नावें, पैडल रिक्शा ….. लेखिका के हम उम्र लोगों के लिए यह सब कमोबेश देखी-भोगी चीजें हैं। शहर चाहे जो रहा हो, बाद की पीढ़ी ने इनमें से कई चीजें नहीं देखी होंगी या बिकुल बदले हुए रूप में उन्हें देखने को मिली होंगी।
किताब के लगभग मध्य में डी.एस.बी. परिसर आता है। वहां के कई यादगार किस्से कहानियां हैं।तब का पहनावा, घर से बाहर और कॉलेज में भी लड़कियों का दायरा। दोस्तों-सहपाठियों की यादें यहां दर्ज हैं, जिनमें कइयों से आज के मोबाइल युग के कारण संपर्क रहता है। फिर भी कइयों को समय की आंधी न जाने कहां उड़ा ले जाती है। उस समय को जी चुके लोगों को इस प्रकार के संस्मरण पढ़ना उस कालखंड में फिर से प्रवेश करना या उसे फिर जी लेने जैसा अनुभव हो सकता है।
कुछ संस्मरण वाकई सुंदर और भावनात्मक हैं। कॉलेज में बिताया समय और अनुभव हर किसी के कमोबेश थोड़े से हेरफेर के साथ एक से ही होते होंगे। उन्ही सब को रोचक तरीके से लिखा गया है।
किसी किताब की यह बड़ी विशेषता मानी जा सकती है कि वह बोझिल न हो और खुद को पढ़वा ले जाए।यह बात इस किताब में काफी हद तक मौजूद है। लेकिन साथ ही यह भी कि कुछ गैर-जरूरी सी चीजों का मोह छोड़ दिया जाता तो अच्छा होता। हर बात काबिले जिक्र नहीं होती, न ही पाठक की दिलचस्पी इसमें होती है। कहीं-कहीं पर अत्यधिक विवरण भी किताब की कसावट में व्यवधान डालते महसूस होते हैं। इस से बचा जा सकता था।
डी. एस. बी. के गलियारों से / लेखिका : स्मिता कर्नाटक / प्रकाशक : समय साक्ष्य, फालतू लाइन, देहरादून / मूल्य : ₹ 195 (अमेज़न में भी उपलब्ध)

































