हरीश जोशी
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस स्थल को मिनी स्विट्जरलैंड की संज्ञा देते हुए गीता के अनासक्ति योग पर अपनी टीका लिखी थी,और जहां साहित्य शिरोमणि राष्ट्र कवि सुमित्रा नंदन पंत ने जन्म लिया और साहित्य सेवा की,गांधी की अनन्य विदेशी शिष्या कैथरीन मेरी हाइलामन सरला बहिन ने जिस स्थल पर लक्ष्मी आश्रम की स्थापना कर सर्वोदय विचार को सतत रूप से आगे बढ़ाया है उसी कौसानी में सरकार द्वारा हालिया खोली गई सरकारी शराब की दुकान ने यहां के शांत सुरम्य वातावरण में जहर घोल दिया है।
स्थानीय वाशिंदों के अलावा विचारक भी चिन्तित हैं कि ऐसी विशिष्टता की स्थली कौसानी में क्यों सरकार इस नई खोली गई शराब दुकान से यहां की पहचान पर कलंक लगा रही है।
गौर तलब है कि सरकार के आबकारी विभाग ने प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में उपजे विरोध के स्वरों के बीच सिद्धांततः निर्णय लेकर सभी नई खुली शराब दुकानों को बंद कर दिया है परन्तु कौसानी की दुकान बदस्तूर चल रही है ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार की यह नीति सर्वोदय और गांधी विचार के साथ साथ साहित्य स्थली रही कौसानी में सर्वोदई और साहित्यिक विचारों को कुचले जाने की कुत्सित मानसिकता तो नहीं पाले हुए है।
नई पीढ़ी में गांधी विचारों के हस्तांतरण हेतु वैचारिक धरातल तैयार करने को देश भर के गांधीवादी चिंतक 7 से 9 जून तक कौसानी में एकत्रित हुए हैं और यूथ फॉर ट्रुथ कार्यशाला के माध्यम से इस विचार बीज को आगे बढ़ा रहे हैं परन्तु सरकार की सोची समझी रणनीति के तहत कौसानी में नई खोली गई शराब दुकान एक बहुत बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है। पद्मश्री और कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित बुजुर्ग सर्वोदई राधा बहिन भट्ट दुकान खुलने की सुगबुगाहट के दौर से ही लक्ष्मी आश्रम से विरोध में न केवल खड़ी हैं बल्कि इस हेतु शासन प्रशासन पर लगातार दबाव भी बनाए हुए हैं,इस बीच तीन दिनी कार्यशाला के बाद एकजुट निर्णय लिया गया है कि कौसानी से गांधी जी के सपनों के अनुरूप हर बुराई को दूर करने सर्वोदई समाज कृतसंकल्प है और शराब की ये दुकान फिलवक्त एक बड़ी बुराई उभर कर सामने आई है जिसे कौसानी से हटाए जाने को सभी युक्तियां न केवल आजमाई जाएंगी बल्कि जरूरी हुआ तो सड़क का आंदोलन भी किया जायेगा ताकि फिर से कोई बुराई कौसानी की ओर देखने की जुर्रत भी न कर सके।
































