गजेंद्र रौतेला
उत्तराखण्ड फिल्म विकास काउंसिल के सहयोग से हैम्प्स संस्था द्वारा तीन दिवसीय उत्तराखण्ड फिल्म मंथन का शुभारंभ आज राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि में रुद्रप्रयाग जिले की पुलिस अधीक्षक सुश्री निहारिका तोमर के द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया इस अवसर पर नगर पंचायत अगस्त्यमुनि के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गोस्वामी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। प्रथम दिवस में आज स्टूडियो यू के 13 के द्वारा बनाई गई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त लघु फिल्म पाताल ती,राहुल रावत द्वारा निर्मित गढ़वाली फिल्म सुनपट और जापानी फिल्म दिखाई गई। इस दौरान लगभग 173 दर्शक मौजूद थे।मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक सुश्री निहारिका तोमर में अपने उद्बोधन में स्थानीय युवाओं द्वारा विश्वस्तरीय सिनेमा बनाये जाने की प्रशंसा की। उन्होंने फिल्मों में अपनी रुचि के बारे में बताया कि वे किसी भी फिल्म में उसके क्राफ्ट के साथ साथ उसकी सिनेमेटोग्राफी को बेहद बारीकी से देखती हैं।इस संदर्भ में उन्हें भोटिया भाषा में बनी ‘पाताल ती’ एक शानदार फिल्म है।उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उत्तराखण्ड में अभी जितनी संभावनाएं हैं उसके लिए अभी बहुत काम किए जाने की आवश्यकता है खासकर यहां की लोक कथाओं और यहां के लोकजीवन पर। हमारे युवाओं को चाहिए कि इस पर कुछ अच्छा काम किया जाए ताकि उत्तराखण्ड फिल्मों के लिए एक अच्छा डेस्टिनेशन बन सके।
फिल्म फेस्टिवल के पहले दिन राहुल रावत द्वारा निर्मित गढ़वाली फिल्म सुनपट, द ब्लैक हेयर,ड्रीम्स श्रृंखला की फॉक्स वेडिंग, होइची- द इयरलेस के साथ-साथ वरिष्ठ रंगकर्मी शिरीष डोभाल जी द्वारा उत्तराखण्ड की सन 1987 की नंदा देवी राजजात की डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई जिसमें उस दौर के समाज-संस्कृति और लोकजीवन की परंपराओं को दर्शकों द्वारा बड़े उत्साह से देखा गया।इस दौरान दिखाई गई सभी फिल्मों पर दर्शकों द्वारा सवाल-जवाब और चर्चा की गई।
जिसमें साहित्य के छात्र कार्तिक अग्रवाल द्वारा तेज गति की फिल्मों और धीमी गति की फिल्मों पर सवाल किया गया कि आज के समय में ज्यादातर फिल्में तेज गति की बन रही हैं जबकि धीमी गति की फिल्मों में ठहराव अधिक होता है तो ऐसा क्यों ? इसके जवाब में स्टूडियो यू के 13 और पाताल ती के निर्देशक संतोष रावत ने कहा कि जो समाज प्रकृति के जितने करीब और प्रकृति से जुड़ा हुआ होता है उस समाज के व्यवहार में ठहराव अधिक होता है।सवाल जवाब के इस सत्र में शिक्षिका राज्यश्री भंडारी ने भी फिल्मों का समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सवाल किया। कार्यक्रम में उपस्थित राष्ट्रीय नाट्य अकादमी से पुरस्कृत रंगकर्मी और अगस्त्यमुनि महाविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ0 राकेश भट्ट ने उत्तराखण्ड की फिल्मों की गुणवत्ता और क्राफ्ट को लेकर अपनी चिंता और नाखुशी जाहिर की कि उत्तराखण्ड की भाषा संस्कृति के नाम पर बहुत ही निम्न स्तर का काम किया जा रहा है।
वरिष्ठ रंगकर्मी शिरीष डोभाल भी उनकी बात से पूर्ण सहमत थे कि यह बेहद जरूरी हो गया है कि फिल्म निर्माण के क्षेत्र में हमारे युवा प्रोफेशनल को आगे आकर यही जिम्मेदारी लेनी होगी जिसके लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित FTII जैसे संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा इसके लिए जरूरी है कि इसके लिए उत्तराखण्ड की सरकार भी बच्चों की आर्थिक मदद करे ।
फिल्म प्रदर्शन के दौरान निर्देशक संतोष रावत द्वारा नेत्र सिंह रावत का हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को याद किया गया।इस अवसर पर कलश संस्था के संस्थापक और साहित्यकार ओमप्रकाश सेमवाल,उत्सव के डॉ0 राकेश भट्ट ,पाताल ती के मुख्य कलाकार आयुष रावत और सिनेमेटोग्राफर बिट्टू रावत को भी हैम्प्स संस्था के द्वारा सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन पुस्तकालय गाँव मणिगुह की स्नेहा राणा के द्वारा किया गया।कार्यक्रम के दौरान गढ़वाली भाषा के सुप्रसिद्ध कवि जगदंबा चमोला,गंगाराम सकलानी,कुसुम भट्ट,ललिता रौतेला,माधुरी नेगी,रंगकर्मी और टी 0वी 0 कलाकार सोनिया गैरोला, भावना नेगी ,हैम्प्स के सचिव रजत बर्त्वाल, दिव्यांशु रौतेला, प्रवीन सेमवाल, अमित रावत,रमेश रावत, विशाल, हार्दिक बर्त्वाल आदि सहित पुस्तकालय गाँव मणिगुह के स्वयंसेवक प्रिया नेगी,कोमल नेगी, आरूषी राणा,अंबिका कुंवर,प्रतिमा बिष्ट, गुंजन कुंवर, श्वेता राणा,आकृति चौहान ने कार्यक्रम के संचालन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।





























