चारु तिवारी सागर से शिखर का अग्रदूत हे ज्योति पुत्र! तेरा वज्र जहां-जहां गिरा ढहती गई दीवारें भय की स्वार्थ की, अह्म की, अकर्मण्यता की तू विद्युत सा कौंधा और खींच गया अग्निपथ अंधकार की छाती... Read more
चारु तिवारी सागर से शिखर का अग्रदूत हे ज्योति पुत्र! तेरा वज्र जहां-जहां गिरा ढहती गई दीवारें भय की स्वार्थ की, अह्म की, अकर्मण्यता की तू विद्युत सा कौंधा और खींच गया अग्निपथ अंधकार की छाती... Read more
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