प्रेम कुमार
हम, लीडर डॉ. सुनीलम (संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और पूर्व विधायक), प्रेम कुमार (महासचिव, सोशलिस्ट किसान सभा), अंशिका (छात्र नेता), संजय गड़ाले और मैं शामिल थे, कश्मीर के बीरवाह और बड़गाँव की यात्रा पर निकले। इस यात्रा में हमें डॉ. राजा मुजफ्फर और उनके साथियों के साथ कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और वहां के आंदोलनों को करीब से देखने का अवसर मिला।
हम दो गाड़ियों में सवार होकर बीरवाह और बड़गाँव की ओर रवाना हुए। रास्ते में कश्मीर की मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता ने हमारा मन मोह लिया। हरे-भरे पहाड़, झरने, नदियां, चश्मे, सेब के बगीचे और चिनार के पेड़ों ने कश्मीर को सचमुच “धरती का स्वर्ग” साबित किया। रास्ते में हमने कश्मीर की संस्कृति और मेहमाननवाजी को भी अनुभव किया, जो वास्तव में अद्वितीय थी।
बीरवाह और बड़गाँव पहुंचकर हमने डॉ. राजा मुजफ्फर और उनके साथियों मीर मुश्ताक, अरफा, अजहर भाई, सज्जाद भाई और फरहत भाई से मुलाकात की। डॉ. राजा मुजफ्फर एक आरटीआई कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो कश्मीर की प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए समर्पित हैं। उनके नेतृत्व में नदियों, पहाड़ों, चश्मों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण आंदोलन चलाए जा रहे हैं। उनके कार्यों में शामिल हैं:
1. **चश्मों का संरक्षण**: डॉ. राजा मुजफ्फर और उनकी टीम ने 50 से अधिक प्राकृतिक चश्मों को अवैध अतिक्रमण और प्रदूषण से बचाया है। यह कश्मीर की जल संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
2. **अवैध खनन के खिलाफ आंदोलन**: उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और आरटीआई के माध्यम से अवैध खनन को रोकने में सफलता हासिल की। इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकी गई, बल्कि कंपनियों द्वारा सरकार को राजस्व के नुकसान को भी कम किया गया।
3. **प्राकृतिक सुंदरता का संरक्षण**: उनके प्रयासों से कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में मदद मिली है, जो पर्यटन और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है।
4. **कश्मीरियत को बढ़ावा**: डॉ. राजा मुजफ्फर और उनकी टीम देश भर के लोगों को कश्मीर घूमने और वहां की संस्कृति व कश्मीरियत को समझने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान हमें कश्मीर की मेहमाननवाजी का अनूठा अनुभव हुआ। जैसा हमने सुना था, वैसा ही पाया। स्थानीय लोगों ने हमें जगह-जगह नाश्ता, स्वादिष्ट कश्मीरी भोजन और ताजे फल खिलाए। विशेष रूप से अरफा ने हमारे लिए सेब के बगीचों से ताजे फल तोड़कर लाए, जो उनकी आतिथ्य भावना को दर्शाता है। डॉ. राजा मुजफ्फर, मीर मुश्ताक, अजहर, सज्जाद और फरहत भाई ने हमें सेब के बगीचे दिखाए और कश्मीर की जीवनशैली के बारे में विस्तार से बताया। उनकी मेहमाननवाजी ने हमें गहराई से प्रभावित किया।
—**भौगोलिक विशेषताएं**: कश्मीर हिमालय पर्वत शृंखला में स्थित है, जहां चिनाव, झेलम और सिंधु नदियों की घाटियां हैं। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़ों, चश्मों और सेब के बगीचों के लिए प्रसम है। [
– **आर्थिक स्थिति**: कश्मीर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन, कृषि (विशेषकर सेब और केसर की खेती) और हस्तशिल्प पर निर्भर है। जम्मू में छोटी कंपनियां कालीन और इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाती हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देती हैं। हालांकि, अवैध खनन और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए चुनौती बना हुआ है।
– **रहन-सहन और संस्कृति**: कश्मीर की संस्कृति में हिंदू, मुस्लिम और बौद्ध प्रभावों का मिश्रण है। कश्मीरी भोजन, जैसे केहवा (हरी चाय, बादाम और केसर से बनी), और मेहमाननवाजी कश्मीरियत की पहचान हैं।
कश्मीर के लोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, बेरोजगारी और सुरक्षा जैसे मुद्दों से जूझ रहे हैं। डॉ. राजा मुजफ्फर ने बताया कि स्थानीय लोग अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए जागरूक हैं, लेकिन अवैध खनन और बाहरी हस्तक्षेप उनकी सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। श्रीनगर के कुछ लोगों का मानना है कि सरकार द्वारा “शांति” का दावा वास्तव में डर से उपजी चुप्पी है। बेरोजगारी और सुरक्षाबलों की भारी मौजूदगी भी उनकी चिंताओं में शामिल है। फिर भी, कश्मीरियत की भावना और मेहमाननवाजी में उनकी एकता और गर्व स्पष्ट दिखाई देता है।
डॉ. राजा मुजफ्फर ने मेरी और प्रेम कुमार की राय लेते हुए एक वीडियो बनाया, जिसमें हमने कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, वहां की समस्याओं और कश्मीरियत के बारे में अपने विचार साझा किए। यह वीडियो कश्मीर के पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
यह यात्रा कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और वहां के लोगों की जागरूकता को समझने का एक अनूठा अवसर थी। डॉ. राजा मुजफ्फर और उनकी टीम का पर्यावरण संरक्षण और कश्मीरियत को बढ़ावा देने का कार्य प्रेरणादायक है। उनकी मेहमाननवाजी और सामाजिक कार्यों ने हमें गहरे तक प्रभावित किया। हम देशवासियों से अपील करते हैं कि वे कश्मीर की यात्रा करें, वहां की संस्कृति और कश्मीरियत को समझें, और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दें।
**सुझाव**
1. कश्मीर के पर्यावरण संरक्षण के लिए और अधिक जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
2. अवैध खनन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को बढ़ावा दिया जाए।
3. कश्मीरियत और पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए देश भर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
4. स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं ताकि बेरोजगारी की समस्या कम हो।

































