देवेश जोशी अगर कोई मुझे पूछे कि बच्चों के गीतों और प्रौढ़ों की कविताओं में क्या अंतर होता है तो मैं कहूंगा, वही जो किसी पहाड़ी स्रोत के जल और आर.ओ.के पानी में होता है। पहले पे कोई ठप्पा नहीं... Read more
रमदा उस दिन ‘रवीश कुमार’ के ‘प्राइम-टाइम’ में न्यूजीलैंड में काम कर रहे किन्हीं ‘डॉ.देवी प्रसाद’ ने बताया कि यहाँ न्यूजीलैंड में हम कोरोना-संक्रमण के खिलाफ की जा रही कोशिशों के लिए युद्ध शब्... Read more
इंद्रेश मैखुरी राजस्थान में फंसे उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के एक प्रवासी कामगार युवा,इस बात को लेकर परेशान थे कि वे घर कैसे पहुंचेंगे. निजी वाहन किराये पर लेकर आने के संदर्भ में जानकारी... Read more
प्रमोद साह कहते हैं कि समस्याएं समाधान लेकर आती हैं और समस्या संकट के साथ आती है तो वह नए रास्ते भी बनाती है . कोरोना काल उत्तराखंड कृषि के विकास और पुनर्विचार को अवसर प्रदान कर रहा है ।... Read more
कमलेश उप्रेती कोरोना काल में उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में हुए रिवर्स पलायन को जहां आशा की नज़र से देखा जा रहा है वहीं इसके एक और पहलू पर भी गौर करने की जरूरत है. आजकल गांवों... Read more
राजेन्द्र भट्ट इस कोरोना-काल में ऐसे वाकये से बात शुरू करना अच्छा लग रहा है जिससे दुष्यंत कुमार की पंक्तियाँ याद आ गईं– ‘इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है।’ ये रोशनदान नोएडा की एक युवा पुलिस... Read more
राजशेखर पंत हर बड़ी विभीषिका ने समाज को बदला है. यूं तो समाज और उससे जुड़ा हर पहलू समय के साथ-साथ हमेशा बदलते रहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे प्रकृति की हर जैविक संरचना बदलती है. पर यह परिवर्तन इतन... Read more
चन्द्रशेखर तिवारी कुमाऊं अंचल के प्रवेश द्वार हल्द्वानी शहर से सटा हुआ गौलापार क्षेत्र खेती, बागवानी और पशुपालन की दृष्टि से बहुत समृद्ध माना जाता है। प्रशासनिक इकाई की दृष्टि से गौलापार क्ष... Read more
दीपंकर भट्टाचार्य मई दिवस अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस है। इसकी प्रेरणा एक दिन में काम के घंटे तय करने के उन्नीसवीं सदी में हुए पहले बड़े संघर्ष से मिली। इस संघर्ष की मांग थी कि एक दिन में काम... Read more
टूट गई मजहब की दीवार: इरफान खान-सुतपा की यह प्रेम कहानी है. यह सहजीवन है. यह आधुनिक दांपत्य है. अजय ब्रह्मात्मज इरफान खान और सुतपा सिकदर दिल्ली स्थित एनएसडी में मिले. साल था 1985 … दि... Read more































