राजीव लोचन साह
पहलगाम की घटना के बाद से यह तो तय था कि पाकिस्तान को अपने किये का फल भुगतना पड़ेगा। मगर जो कुछ हुआ, वह नाटकीय था। पर्याप्त तैयारी के बाद भारत ने 7 मई के तड़के पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के कुछ आतंकवादी अड्डों पर मिसाइलों से सटीक और नियंत्रित हमला किया और उन्हें नष्ट कर दिया। जवाब में पाकिस्तान ने कश्मीर के पुंछ से लेकर गुजरात के भुज तक भारत की समस्त उत्तरी और पश्चिमी सीमा पर जमीनी और आसमानी हमले शुरू कर दिये। इनमें अनेक लोग मारे गये, सम्पत्ति को क्षति पहुँची और सीमावर्ती क्षेत्रों में भगदड़ मच गई। भारत के लिये इस हमले से अपनी सीमा को बचाना और इसका जवाब देना विवशता हो गई। इस संघर्ष के पूर्ण युद्ध में बदलने का डर बना हुआ था कि 10 मई को अमेरिका से खबर आयी कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम हो गया है। उसी शाम भारत ने भी आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि कर दी। तथाकथित राष्ट्रवादियों और गोदी मीडिया, जो इस्लामाबाद पर भारतीय सेना का कब्जा हो जाने की झूठी खबरें फैला रहा था, में एकदम सन्नाटा पसर गया। विपक्षी राजनैतिक दलों, जो अब तक एकजुटता से सरकार के साथ खड़े थे और कुछ पूर्व सेनाध्यक्षों ने इस निर्णय पर सवाल उठाने शुरू किये तो सरकार के पास कोई पुख्ता जवाब नहीं था। लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुँह से स्पष्ट सुनना चाहते थे। मोदी, जो मीडिया से कभी मुखातिब नहीं होते और पहलगाम के बाद हुई सर्वदलीय बैठकों से भी कतराते रहे थे, अन्ततः 12 मई को राष्ट्र को सम्बोधित करने आये। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि आतंकवाद की कमर तोड़ दी गई है और भविष्य में पाकिस्तान ने फिर ऐसा दुस्साहस किया तो उसे उपयुक्त जवाब दिया जायेगा। मोदी के इस सम्बोधन से कुछ मिनट पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका में रहस्योद्घाटन किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को यह धमकी देकर युद्ध रुकवाया कि यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो उनके साथ व्यापार रोक दिया जायेगा।

































