राजीव लोचन साह
अमेरिका और वहाँ के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत का अपमान करना अब आम बात हो गई है। एक ओर ट्रम्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना दोस्त बतलाते हुए गलबहियाँ डालते हैं और दूसरी ओर भारत का अपमान करने का कोई अवसर जाया नहीं करते। अभी कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें न्यूयार्क की पुलिस ने हरियाणा के एक युवक को इस तरह दबोचा था, मानो किसी खूँखार आतंकवादी को कब्जे में किया हो। इस युवक की गलती मात्र इतनी थी कि वैध वीजा के बावजूद वह अंग्रेजी न जानने के कारण अपनी बात समझा नहीं पा रहा था। चार महीने पहले हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड़े सैकड़ों भारतीयों को सेना के विमानों में वापस भेजे जाने के दृश्यों ने देशवासियों को झकझोर दिया था। अब तो भारत के हितैषी अमेरिकी भी मानने लगे हैं कि अमेरिका द्वारा भारत के अपमान की इन्तिहा हो गई है। बार्ड कॉलेज में विदेश नीति के प्रोफेसर और हडसन इंस्टीट्यूट के विशिष्ट फेलो वॉल्टर रसेल मीड ने ‘बिजनेस टु डे’ में प्रकाशित अपने लेख में कहा है कि ट्रम्प की विजय पर खुशी मनाने वाले भारतीय क्या अब सोच रहे होंगे कि उन्होंने गलती की ? मीड ने नयी वीजा नीति के तहत अमेरिका आना चाहने वाले भारतीय छात्रों को हतोत्साहित करने और ट्रम्प द्वारा एप्पल के आई फोन का उत्पादन चीन से भारत लाने की योजना की सार्वजनिक आलोचना का जिक्र करते हुए आश्चर्य व्यक्त किया कि अमेरिका जिहादियों की फंडिंग करने वाले पाकिस्तान की तुलना में भारत को कमतर कैसे आँक सकता है। उन्होंने ट्रम्प की टीम को नसीहत दी है कि भारत जैसे महत्वपूर्ण दोस्त को सुई चुभा कर चिढ़ाने से बाज आये। इधर यह भी खबर आयी है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने जन्मदिन पर आयोजित की जाने वाली विवादास्पद मिलिट्री परेड में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल मुनीर को आमंत्रित किया है, मोदी को नहीं। एक स्वाभिमानी भारतीय के लिये अमेरिका द्वारा भारत को अपमानित करना अब सहनशक्ति की सीमा से बाहर हो गया है।

































