( ताजा खबर यह है कि नगरपालिका द्वारा बिजली विभाग को बिजली के बिल के 10 लाख रुपये अदा कर देने और इस माह के अंत तक 40 लाख रुपये देने का वादा करने के बाद विभाग द्वारा कल, 21 मार्च से नैनीताल की स्ट्रीट लाइट सुचारू कर दी गयी है। अभी इस मद में लगभग 4 करोड़ रुपये की देनदारी बांकी हैं।)
– सम्पादक
प्रयाग पांडे
नव निर्वाचित नगर पालिका परिषद के कार्यभार ग्रहण करने के करीब डेढ़ माह बाद ही विश्व विख्यात सैलानी नगरी नैनीताल की मालरोड समेत सभी सार्वजनिक मार्ग बुधवार से अंधेरे के आगोश में समा गए हैं। सुना है कि पूर्व अवशेष विद्युत बिल जमा नहीं होने के चलते विद्युत विभाग ने नगर की पथ प्रकाश व्यवस्था का विद्युत संयोजन विच्छेद कर दिया है। इस कारण नगर के सभी सार्वजनिक मार्गों में अंधेरा छा गया है। नगर पालिका परिषद असहाय बनी हुई है। किंकर्तव्यविमूढ़।
यह स्थिति स्थानीय निकायों की रुग्ण आर्थिक व्यवस्था का जीता -जागता उदाहरण है। आजादी से पहले हमारे जो कर्णधार ग्राम स्वराज और स्वायत्त शासन के हिमायती थे, उनकी ही अदूरदर्शिता एवं अधिकारों के केन्द्रीयकरण की नीति ने स्थानीय निकायों को इतना लाचार और परजीवी बना दिया है।
1920 के प्रारंभिक वर्षों में जब भारत के महानगरों की सड़कों में पथ प्रकाश के लिए लालटेन जला करती थीं तब नैनीताल नगर पालिका के पास अपना विद्युत उत्पादन संयंत्र था। नगर के भीतर छह विद्युत सब स्टेशन थे। 1950 के दशक में नैनीताल नगर पालिका के दुर्गापुर पॉवर हाउस में प्रतिमाह 1,73,456 यूनिट विद्युत का उत्पादन होता था। नगर पालिका के पास आवश्यकता से कहीं अधिक बिजली उपलब्ध थी। पालिका अपने कारकुनों सहित कई सरकारी विभागों को मुफ़्त में बिजली की सुविधा प्रदान करती थी। नगर क्षेत्र के अलावा आसपास के इलाकों को भी विद्युत आपूर्ति करती थी।
1947 में देश आजाद हुआ। ग्राम स्वराज एवं अधिकार संपन्न स्थानीय निकायों के पक्षधर नेतागण सत्ता में आए। आजादी के डेढ़ दशक के बाद आजाद भारत के हुक्मरानों ने स्थानीय निकायों को अधिकार विहीन करने का उपक्रम शुरू कर दिया। 1976 में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था। डॉक्टर एम. चन्ना रेड्डी उत्तर प्रदेश के राज्यपाल थे, उनके शासनकाल में जनवरी,1976 में शासन ने दुर्गापुर पॉवर हाउस सहित इससे जुड़ी सभी परिसम्पतियाँ नगर पालिका से छीन कर विद्युत विभाग के हवाले कर दी गई। विद्युत विभाग का नगर पालिका की संपतियों में कब्जा है। विद्युत विभाग पालिका से पथ प्रकाश व्यवस्था का विद्युत बिल भी वसूलता है।

































