विनीता यशस्वी उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, लेकिन पहाड़ में रहने वाले आम आदमी के लिए गंभीर बीमारी आज भी किसी परीक्षा से कम नहीं। गांव के नजदीक स्वास्थ्य केंद्र है तो वहां डॉक्टर नहीं, ड... Read more
मृगेश पांडे बृजेंद लाल साह के बहुचर्चित नाटक त्रिशंकु का एक संवाद याद आता है।……सुविधा, अवसर, समझौता, और तटस्थता। जो न चल सका इन चार रास्तों पर वह हो गया त्रिशंकु बन गया। 17 सितम्... Read more































