चन्द्रशेखर तिवारी पहाड़ के उच्च शिखर, पेड़-पौंधे, फूल-पत्तियां, नदी-नाले और जंगल में रहने वाले सभी जीव-जन्तुओं के साथ मनुष्य के सम्बन्धों की रीति उसके पैदा होने से ही चलती आयी है। समय-समय पर... Read more
देवेश जोशी बसंत पंचमी से प्रारम्भ बसंत मैदानी क्षेत्र में होली के साथ विदा ले लेता है पर पहाड़ में ये बैसाखी तक अपने पूरे ठाठ में देखा जा सकता है। मैदानी बसंत के प्रतीक-पुष्प टेसू, ढा... Read more
योगेश भटृ वाह सरकार वाह, क्या दांव खेला है ! इधर बजट पेश किया और लगे हाथ गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। इसे कहते हैं सियासत। एक ओर राजधानी के मुद्दे पर नयी बहस, तो दूस... Read more
प्रमोद साह यूं तो होली समूचे भारत में धूमधाम से मनाया जाने वाला त्यौहार है . जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन रंगों के साथ परवान चढ़ता है और रंग खेलकर ,गले मिलकर लोग साल भर के गिले-शिकवे भू... Read more
देवेश जोशी कुछ ही महीने पहले की बात है। अननोन नम्बर से मोबाइल पर काॅल आती है। उठाया तो कोई महिला कड़क आवाज़ में पूरे आत्मविश्वास के साथ पूछ रही थी – आप कौन हो? मैंने घबराते हुए कहा, मैडम... Read more
योगेश भटृ कर्मचारियों को तन्ख्वाहें समय पर मिल रही हैं, अफसरों और मंत्रियों की गाड़ियां फर्राटे भर रही है, हैलीकाप्टर उड़ रहे हैं । सितारा होटलों में सरकारी जलसे भी हो रहें और विदेश यात्राएं... Read more
राहुल सिंह शेखावत एक बार फिर गैरसैंण के करीब में भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र का गवाह बनने जा रहा है। इस खूबसूरत पहाड़ी स्थान पर 3 से 7 मार्च तक बजट सत्र आहूत हो रहा है। सवाल ये है कि क्या गैरसैं... Read more
मंगलेश डबराल 2017 में कवि, क्रांतिकारी, पादरी और मार्क्सवादी एर्नेस्तो कार्देनाल की कविताओं के अनुवाद के लिए एक आलेख लिखा था. आज उनके निधन पर एक स्मरण. रूबेन दारीओ, पाब्लो नेरूदा और सेसर वाय... Read more
राजशेखर पंत सुबह उठ कर दाढ़ी बनाना एक रूटीन प्रक्रिया है. हम इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचते. पांच, सात या दस-बीस रुपये में डिस्पोजेबल रेजर की कई किस्में बाज़ार में कहीं भी मिल जाती हैं और हफ्... Read more































