रमदा
वंदेमातरम्
अस्सी साल तक हम राष्ट्र गीत के दो ही पदों तक सीमित रहे माँ , इन्हीं को गाते / गवाते रहे और पूरी शिद्दत से इन पदों के एक एक शब्द पर सक्रिय रहे .
सुजलां :
तेरी नदियों के प्रचुर और शुद्ध जल को निर्मल बनाए रखने के हमारे प्रयासों का ही परिणाम ही आज “नमामि गंगे ” के स्वरुप में हमारे सामने है.
सुफलां :
तेरे बागों से मिलने वाले अच्छे फलों के कारण ही तमाम फल -पट्टियों का भू -उपयोग बदलने में हमने कोई कसर नहीं छोडी है.
मलयजशीतलाम् :
तेरे आँचल से आने वाली चन्दन-सुवासित हवाओं को हम अब वायु प्रदूषण और ए. क्यू. आई के आइने से देखते हैं .
शस्यश्यामलाम् :
तेरी हरी भरी लहलहाती फसलों में किसी तरह की कमी न हो इसलिए धरतीपुत्र आन्दोलनों का सहारा लेते रहते हैं और हम अमेरिका जैसे देशों से समझौते करते रहते हैं .
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम् :
तेरी उज्जवल चांदनी से भरी रातों का आनंद उठाने के लिए बालिकाए-महिलाएं निसंकोच, बिना किसी भय के स्वच्छंद भ्रमण करती हैं.
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम् :
फूलों से लदे वृक्ष से तेरी शोभा को अनवरत अक्षुण्ण बनाये हुए हैं, उन पर किसी तरह का कोई संकट नहीं है . हम निरंतर वृक्षारोपण -अभियानों में संलग्न हैं और एक पेड़ काटने से पहले हज़ार बार सोचते हैं .
सुहासिनीं सुमधुरभाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम् .
हमारे इन कारनामों को देख- समझ कर मुस्कुराते हुए तू हमें अपने मधुर वरदानों से अनुग्रहित करना चाहती होगी ना ! इसीलिये हमने तय किया है कि हम अब सारे छह के छह पदों का न केवल गायन करेंगे बल्कि उन पर भी पूरी शिद्दत से सक्रिय होंगे और दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती की भी वैसे ही उपासना करेंगे जैसी राम की थी और आजकल कृष्ण की करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रणाम मां / वंदेमातरम्































