एक वर्ष पूर्व उत्तराखंड के जन नायक डाॅ. शमशेर सिंह बिष्ट की पहली बरसी है। 22 सितम्बर 2018 को एक लम्बी बीमारी के बाद वे इस दुनिया को अलविदा कह गये थे। उनकी बरसी को उत्तराखंड के और देश भर के संघर्षशील लोगों ने एक ऐसे अवसर के रूप में देखा है, जिसमें वे एक साथ बैठ कर, गहन विचार-विमर्श कर आज के हालातों में आगे का कोई रास्ता ढूँढ सकें। इन दिनों जन आन्दोलन में सक्रिय लोगों का एक साथ मिल बैठना बहुत कठिन हो गया है। एक तरह की चुप्पी और निष्क्रियता समाज में है। सक्रियता अगर कहीं है तो वह सिर्फ सोशल मीडिया में है, जिसका कोई विशेष अर्थ नहीं है। जब तक समाज के विचारशील और जनसंघर्षों से जुड़े लोग पुनः बात-बहस का सिलसिला नहीं चलाते, हालात बदलने वाले नहीं हैं। इसीलिये शमशेर की बरसी को ऐसे लोगों ने एक मौके के रूप में देखा है।
यह आयोजन अल्मोड़ा में होगा। पहला सत्र 10 बजे से रामजे इण्टर काॅलेज के प्रांगण में होगा। ‘शमशेर की याद’ नामक इस सत्र में बाहर से आये विशिष्ट लोग शमशेर सिंह बिष्ट को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। डाॅ. कपिलेश भोज द्वारा लिखित शमशेर सिंह बिष्ट की जीवनी ‘उत्तराखंड के जन नायक डाॅ. शमशेर सिंह बिष्ट’ और कुमाउनी मासिक पत्रिका ‘पहरू’ के शमशेर पर केन्द्रित अंक का विमोचन होगा। दूसरा सत्र भोजनोपरान्त शिखर होटल के सभागार में ‘शमशेर का रास्ता’ के रूप में होगा। इसमें आयोजन में भाग लेने आये सभी प्रतिभागी परस्पर विचार-विमर्श कर शमशेर के किये हुए से प्रेरणा लेकर आगे के लिये रास्ता तलाशने की कोशिश करेंगे। इस सत्र के लिये समय की कोई सीमा नहीं है। यदि लम्बे विचार-विमर्श के बाद आगे के लिये कोई रास्ता निकल सका तो वही इस सत्र की उपलब्धि होगी।
उत्तराखंड और देश भर से लगभग 150 लोगों के इस आयोजन में भाग लेने की उम्मीद है।
राजीव लोचन साह 15 अगस्त 1977 को हरीश पन्त और पवन राकेश के साथ ‘नैनीताल समाचार’ का प्रकाशन शुरू करने के बाद 42 साल से अनवरत् उसका सम्पादन कर रहे हैं। इतने ही लम्बे समय से उत्तराखंड के जनान्दोलनों में भी सक्रिय हैं।