देवेश जोशी उचाणा को मेरो मैर, कनो पड़े गंगाळ! बग्द-बग्द मैर गए देवप्रयाग बेड़, हेरी हेरी दिदा ऐग्यूं रीति घर! हे शोभनू धुनार, मेरा मैर छलैइ दे! निरभागी मैर यो गंगाळ पड़ीगे। नौ मण साट्यों कू उध... Read more
देवेश जोशी उचाणा को मेरो मैर, कनो पड़े गंगाळ! बग्द-बग्द मैर गए देवप्रयाग बेड़, हेरी हेरी दिदा ऐग्यूं रीति घर! हे शोभनू धुनार, मेरा मैर छलैइ दे! निरभागी मैर यो गंगाळ पड़ीगे। नौ मण साट्यों कू उध... Read more
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