ज्ञानरंजन ‘पहल’ का अंक 125 हमारी और उसकी यात्रा का अब आख़िरी अंक होगा। अभी तक यह ख़बर अफ़वाहों में थी जो सच निकली। यह निर्णय हमारे और ‘पहल’ से जुड़े तमाम लोगों के लिए तकलीफ़देह है। ह... Read more
राजकुमार केसवानी दोस्तों, यह ‘पहल’ का अंतिम अंक है। इस एक वाक्य को लिखने के लिए जितने साहस की आवश्यकता थी, उसे जुटाने में कई माह लग गए। इससे आगे की बात तो शायद किसी फूटे झरने की मानिंद... Read more